यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई के इस्तेमाल पर किसी तरह का शुल्क लगाए जाने की अटकलों पर सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आम नागरिकों और ग्राहकों के लिए दैनिक आधार पर किए जाने वाले डिजिटल भुगतान पर कोई चार्ज नहीं वसूला जाएगा। इस निर्णय से देश भर के उन करोड़ों उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है जो अपनी दैनिक खरीदारी और पैसों के लेन-देन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं।
आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों के लिए सेवा रहेगी निशुल्क
नीतिगत स्थिति को विस्तार से समझाते हुए सरकार ने कहा कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले सभी पी2पी (पर्सन-टू-पर्सन) लेन-देन पूरी तरह निशुल्क रहेंगे। इसके साथ ही, छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के अधिकांश मर्चेंट लेन-देन पर भी किसी प्रकार की फीस नहीं लगेगी। वर्ष 2016 में यूपीआई की शुरुआत के बाद से करीब 10 सालों में इसका दायरा अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। इतनी बड़ी मात्रा में हो रहे लेन-देन के संचालन खर्च को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है।
एमडीआर की प्रस्तावित व्यवस्था और कानून में बदलाव
भविष्य में यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू भी किया जाता है, तो यह केवल एक तय सीमा यानी थ्रेशॉल्ड से अधिक मूल्य वाले चुनिंदा बड़े व्यापारिक लेन-देन तक ही सीमित रहेगा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क किसी भी स्थिति में डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले एमडीआर से बहुत कम होगा। इस व्यवस्था को कानूनी रूप देने के लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किया गया है। बिल पास होने के बाद, एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी यह तय करेगी कि किन लेन-देन पर कितना मामूली शुल्क लगाया जाएगा।
डिजिटल ढांचे की मजबूती और वित्तीय आत्मनिर्भरता
यूपीआई के टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की आवश्यकता इसके लगातार बढ़ते आंकड़ों से सामने आती है। केवल जुलाई 2026 के दौरान ही यूपीआई के माध्यम से कुल 2,366 करोड़ लेन-देन दर्ज किए गए, जिनकी कुल कीमत लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। इसके अलावा, भारत का यह डिजिटल भुगतान तंत्र अब 11 विदेशी देशों में भी सक्रिय है। इतने विशाल नेटवर्क के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने की व्यवस्था और उन्नत तकनीकी बुनियादी ढांचे पर निरंतर भारी पूंजीगत निवेश की आवश्यकता होती है। सरकार का मानना है कि इसे केवल सरकारी सब्सिडी के भरोसे लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता, इसलिए एक पारदर्शी और आत्मनिर्भर वित्तीय मॉडल आवश्यक है।
अफवाहों से बचने की आधिकारिक अपील
सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर फैल रही गलत जानकारियों को देखते हुए प्रशासन ने आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। नागरिकों को केवल वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और एनपीसीआई द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है। बिना पुष्टि वाले संदेशों को आगे भेजने से मना किया गया है और यह आश्वस्त किया गया है कि आम जनता के रोजमर्रा के लेन-देन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा।



















