वैश्विक स्तर पर ईरान से जुड़े तनाव और मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई संघर्ष या अनिश्चितता का माहौल बनता है, तो आम निवेशक घबराकर अपनी संपत्तियों को बेचने लगते हैं। हालांकि, वित्तीय बाजार के समझदार और अनुभवी निवेशकों के लिए ऐसी गिरावट हमेशा से एक बेहतरीन अवसर लेकर आती है। निवेश की इस विशेष तकनीक को कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग यानी विपरीत दिशा में निवेश करना कहा जाता है। जब पूरे बाजार में डर का माहौल होता है और मजबूत बुनियादी ढांचे वाली कंपनियों के भाव भी घट जाते हैं, तब इस रणनीति पर चलने वाले निवेशक सतर्कता से खरीदारी शुरू करते हैं।
कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग का मूल गणित और एक्सपर्ट्स की राय
कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग का सीधा सा सिद्धांत यह है कि जब अधिकांश लोग बिकवाली में लगे हों, तब आप खरीदारी के मौके तलाशें और जब बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर हो, तब अति-उत्साह से बचें। ऑप्टिमा मनी के संस्थापक और निवेश विशेषज्ञ पंकज मठपाल के अनुसार, बाजार में जारी यह मंदी कंपनियों की अपनी आंतरिक कमजोरी या खराब वित्तीय स्थिति के कारण नहीं है। यह गिरावट पूरी तरह से वैश्विक घटनाओं और तनाव का परिणाम है। जब अच्छी कंपनियों के शेयर बिना किसी मौलिक कारण के अनुचित रूप से सस्ते हो जाते हैं, तब उनमें किया गया निवेश भविष्य में बहुत सकारात्मक परिणाम दे सकता है।
सीधे शेयरों के बजाय म्यूचुअल फंड्स का रास्ता क्यों है बेहतर?
अस्थिरता के इस माहौल में किसी एक कंपनी के शेयर में जोखिम लेने के बजाय लार्ज और मिडकैप श्रेणी के म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगाना एक सुरक्षित और रणनीतिक कदम माना जाता है। बाजार की इस हालिया गिरावट ने भारतीय इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन प्रीमियम को संतुलित किया है, जिससे अत्यधिक महंगे हो चुके शेयरों की कीमतें अब अधिक आरामदायक स्तर पर आ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय उन नए और छूटे हुए निवेशकों के लिए बाजार में प्रवेश करने का सबसे अच्छा मौका है, जो पहले आई तेजी के दौरान निवेश नहीं कर पाए थे। पेशेवर फंड मैनेजर अनिश्चित दौर में पोर्टफोलियो को संतुलित रखने में निपुण होते हैं, जिससे व्यक्तिगत निवेशकों का जोखिम काफी घट जाता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य और लार्ज व मिडकैप की भूमिका
अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारत आने वाले महीनों में एक मजबूत आर्थिक विकास के दौर में प्रवेश करने जा रहा है। इस आर्थिक विस्तार में मैन्युफैक्चरिंग, उपभोग, बिजली, वित्तीय सेवाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, शिक्षा और डिजिटल सेवाओं जैसे लगभग सभी प्रमुख उद्योग अग्रणी भूमिका निभाएंगे। आर्थिक गतिविधियों में होने वाली इस तेजी का सीधा लाभ लार्जकैप और मिडकैप आकार की कंपनियों को मिलेगा। लार्जकैप कंपनियां पोर्टफोलियो को स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करती हैं, जबकि मिडकैप कंपनियों में तेज विकास की अपार संभावना होती है। इन दोनों का संतुलन निवेशकों को कम जोखिम में ज्यादा रिटर्न दिलाने में मदद करता है।
पिछले तीन सालों में लार्ज और मिडकैप फंड्स का रिकॉर्ड प्रदर्शन
यदि ऐतिहासिक रिटर्न पर नजर डालें, तो लार्ज और मिडकैप म्यूचुअल फंड्स ने काफी आकर्षक प्रदर्शन दिखाया है। इस कैटेगरी के सबसे पुराने फंड्स में शामिल निप्पॉन इंडिया विजन लार्ज एंड मिडकैप फंड ने पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 17.91 प्रतिशत का वार्षिक रिटर्न दिया है। इसके अलावा आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, बंधन और इन्वेस्को जैसे स्थापित फंड हाउसों के लार्ज और मिडकैप फंड्स ने भी तीन साल की अवधि में दोहरे अंकों का मजबूत रिटर्न दर्ज किया है। आंकड़ों के मुताबिक आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने 16.41 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया है, जबकि बंधन लार्ज एंड मिडकैप फंड और इन्वेस्को लार्ज एंड मिडकैप फंड ने पिछले तीन वर्षों में क्रमशः 15.33 प्रतिशत और 14.97 प्रतिशत का रिटर्न हासिल किया है।



















