पूर्णिया के खुदरा बाजारों में चीनी की आसमान छूती कीमतों ने आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों की दैनिक जिंदगी पर गहरा असर डाला है। पिछले कुछ हफ्तों में मिठास का यह अहम जरिया इतना महंगा हो चुका है कि लोगों को अपने घरेलू बजट में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिले की प्रमुख व्यावसायिक मंडियों में शुमार हरदा बाजार में खरीदारी करने पहुंचे उपभोक्ता बढ़ती कीमतों को लेकर अपनी नाराजगी और चिंता जाहिर कर रहे हैं। बाजार में सामान खरीदने आए लोग बताते हैं कि दैनिक जरूरत की चीजों पर अचानक बढ़ा यह वित्तीय बोझ उनके परिवार के संतुलित खर्च को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर रहा है।
रसोई के बजट पर भारी पड़ रही चीनी की महंगाई
हरदा बाजार में दैनिक खरीदारी के लिए पहुंचे ग्राहकों में सदानंद महलदार, दिनेश कुमार और गौतम कुमार शामिल हैं। उनके साथ ही सोनिका भारती, रजीना खातून और मोजीबुर रहमान ने भी बाजार के मौजूदा हालातों पर अपनी बात रखी। इन सभी उपभोक्ताओं का कहना है कि चीनी की दरों में आई इस तेज वृद्धि ने उनके घर का मासिक बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। जो चीनी हाल तक 40 से 45 रुपये प्रति किलो की दर से आसानी से मिल जाती थी, अब वही चीनी खुदरा बाजार में 68 से 70 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर पर बिक रही है। दामों में इस भारी उछाल का सीधा गणित समझाते हुए ग्राहकों ने बताया कि जितने पैसों में वे पहले डेढ़ किलो चीनी खरीदा करते थे, उतने ही पैसों में अब उन्हें महज एक किलो चीनी ही मिल पा रही है। इस स्थिति के कारण कई परिवारों ने अपनी दैनिक खपत में स्वेच्छा से कटौती करना शुरू कर दिया है।
चाय विक्रेताओं और छोटे कारोबारियों के सामने संकट
चीनी के बढ़ते दामों का केवल घरेलू बजट पर ही असर नहीं पड़ा है, बल्कि स्थानीय चाय विक्रेताओं और छोटे दुकानदारों के सामने भी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। सड़क किनारे चाय की दुकानें चलाने वाले दुकानदारों का कहना है कि चीनी महंगी होने से उनकी उत्पादन लागत में काफी इजाफा हुआ है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि वे चाय के प्रति कप दाम बढ़ाते हैं, तो नियमित ग्राहकों के छिटकने का डर बना रहता है। दूसरी ओर, यदि वे पुरानी दरों पर ही चाय बेचते हैं, तो उनकी बचत और मुनाफा पूरी तरह खत्म हो जाता है। ऐसे में चाय का व्यवसाय करना अत्यंत कठिन साबित हो रहा है और मिठास महंगी होने से उनकी रोजाना की कमाई प्रभावित हुई है।
बाजार में स्टॉक पर्याप्त, फिर भी खरीदारी में गिरावट
स्थानीय व्यापारी कनक दास ने बाजार की जमीनी स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मंडी में चीनी की कोई भौतिक किल्लत या आपूर्ति का संकट नहीं है। थोक और खुदरा स्तर पर चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके बावजूद, कीमतें 45 रुपये से बढ़कर 68 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाने के कारण खरीदारों के व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है। कनक दास के मुताबिक, दाम अधिक होने की वजह से कई ग्राहक अब अपनी सामान्य आवश्यकता के मुकाबले कम मात्रा में चीनी खरीद रहे हैं। हालांकि चाय और मीठे व्यंजनों के लिए चीनी एक आवश्यक वस्तु है, इसलिए मांग बिल्कुल बंद तो नहीं हुई है, लेकिन कुल बिक्री की मात्रा पर असर साफ दिखाई दे रहा है।
प्याज और सरसों तेल पर भी सरकारी नियंत्रण की मांग
लगातार बढ़ती महंगाई से परेशान पूर्णिया के स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने प्रशासन तथा सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। लोगों का कहना है कि केवल चीनी ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। निवासियों ने सरकार से मांग की है कि प्याज और सरसों तेल जैसी बुनियादी खाद्य सामग्रियों के दामों में हो रही वृद्धि पर भी तुरंत प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। आम जनता का मानना है कि जब तक बुनियादी खाद्य वस्तुओं के बाजार भाव स्थिर और नियंत्रित नहीं होंगे, तब तक मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए सामान्य जीवन व्यतीत करना बेहद मुश्किल बना रहेगा।



















