त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले भारतीय सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर सूचकांक और ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी के कारण गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण फिर से बढ़ा है। इसके चलते शुक्रवार के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में सोने के सभी मानक ग्रेड में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया, जिससे खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों के लिए लागत बढ़ गई है।
घरेलू बाजार में सोने के ताजा भाव और विभिन्न शुद्धता की स्थिति
भारत में शुद्धता के विभिन्न पैमानों पर सोने के दाम में आज बढ़त दर्ज की गई है। 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 710 रुपये यानी लगभग 0.47 प्रतिशत बढ़कर 1,51,420 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। थोक या बड़े पैमाने पर खरीदारी करने वालों के लिए 100 ग्राम 24 कैरेट सोने की दर 15,14,200 रुपये दर्ज की गई, जो पिछले सत्र के मुकाबले 7,100 रुपये अधिक है।
भारतीय परिवारों में आभूषण निर्माण के लिए सर्वाधिक पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने की कीमतों में भी तेजी देखी गई। 22 कैरेट सोना 650 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा होकर 1,38,800 रुपये पर पहुंच गया है। यदि 100 ग्राम की मात्रा में 22 कैरेट सोने की खरीद की जाती है, तो इसका भाव 13,88,000 रुपये बैठता है, जिसमें 6,500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
हल्के गहनों और आधुनिक डिजाइनों के लिए उपयोग किए जाने वाले 18 कैरेट सोने के दाम भी बढ़े हैं। 18 कैरेट सोना 540 रुपये की तेजी के साथ 1,13,570 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर हुआ है। इसके 100 ग्राम की खेप के लिए खरीदारों को 11,35,700 रुपये चुकाने होंगे, जो पिछले दिन की तुलना में 5,400 रुपये की सीधी वृद्धि दर्शाता है।
पारंपरिक रूप से सोने के सिक्के या गिन्नी में निवेश करने वाले खरीदारों के लिए 8 ग्राम अथवा एक सॉवरेन का भाव भी बढ़ गया है। 24 कैरेट शुद्धता वाले 8 ग्राम सोने के लिए ग्राहकों को लगभग 1,21,136 रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं दूसरी ओर, 22 कैरेट वाले 8 ग्राम सोने की कीमत वर्तमान में लगभग 1,11,040 रुपये दर्ज की गई है।
चार कारोबारी सत्रों में 1.5 प्रतिशत से अधिक की रिकवरी
बीते कुछ सत्रों के दौरान सर्राफा बाजार में काफी अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया है। निवेशक अमेरिकी डॉलर की चाल, ट्रेजरी यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की उम्मीदों का लगातार आकलन कर रहे हैं। हालिया गिरावट के बाद आई इस रिकवरी का असर पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो 6 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1,49,180 रुपये प्रति 10 ग्राम था। आज 1,51,420 रुपये के स्तर पर पहुंचते ही इसमें लगभग 2,240 रुपये की स्पष्ट बढ़त आ चुकी है। यह महज चार कारोबारी सत्रों के भीतर लगभग 1.5 प्रतिशत की मजबूत उछाल को प्रदर्शित करता है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी सोने के वायदा अनुबंधों ने मजबूती दिखाई है। सप्ताह की शुरुआत में तीव्र गिरावट के बाद घरेलू फ्यूचर्स 1.49 लाख रुपये के स्तर तक लुढ़क गए थे, लेकिन ताजा लिवाली के समर्थन से वे फिर से 1.51 लाख रुपये के पार निकल आए हैं।
चांदी की कीमतों में भी जोरदार उछाल
पीली धातु के साथ-साथ चांदी में भी जोरदार लिवाली का माहौल बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में चांदी की कीमत लगभग 2 प्रतिशत चढ़कर 60.40 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई है। इस वैश्विक तेजी का सीधा प्रभाव भारत के भौतिक बाजार पर भी देखने को मिला है। घरेलू बाजार में आज चांदी की कीमत लगभग 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है, जिससे औद्योगिक उपयोग और आभूषण दोनों श्रेणियों के खरीदारों पर सीधा वित्तीय असर पड़ा है।
वैश्विक बाजार के रुझान और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना शुक्रवार को 4,174.78 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जो पिछले सत्र के 4,118.63 डॉलर प्रति औंस से मजबूत सुधार को दर्शाता है। कारोबार के दौरान हाजिर सोना कुछ समय के लिए 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार भी निकला था। इस उछाल को अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी, ट्रेजरी यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की गिरती कीमतों से सहारा मिला। हाल ही में संपन्न हुई अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी नीलामी में निवेशकों की मजबूत मांग ने लंबी अवधि की यील्ड पर दबाव कम करने में मदद की, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों के लिए परिदृश्य सुधरा।
हालांकि सोने का 4,180 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसलना यह दर्शाता है कि तेजी की यह गति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आगे की चाल काफी हद तक आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। कोटक नियो के कमोडिटी रिसर्च के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट कायनात चैनवाला ने बाजार की स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि मुख्य बाधा फेडरल रिजर्व का सख्त रुख है, जहां नीति निर्माता मुद्रास्फीति को लक्ष्य तक लाने के लिए और सख्त कदमों के संकेत दे रहे हैं।
मुद्रास्फीति के आंकड़े और भू-राजनीतिक कारकों पर नजर
कायनात चैनवाला के अनुसार ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की आशंकाएं सोने में लगातार तेजी की गुंजाइश को सीमित कर रही हैं, जिससे बाजार आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़ों और दर संबंधी उम्मीदों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। निकट अवधि में सोने और चांदी के सीमित दायरे में रहने की संभावना है, जहां डॉलर और ट्रेजरी यील्ड ही व्यापार की दिशा तय करेंगे।
अब बाजार की पूरी नजर 14 अक्टूबर को जारी होने वाले अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों पर टिकी है, जो फेड की नीतिगत राह के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण साबित होंगे। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि जब तक बॉन्ड यील्ड और डॉलर में व्यापक बदलाव नहीं आता या अमेरिका-ईरान स्थिति में कोई बड़ा कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक सोने और चांदी में बहुत बड़ी तेजी के आसार सीमित ही नजर आ रहे हैं।



















