घरेलू शेयर बाजारों में लंबी गिरावट से जूझ रहे शेयरों में अक्सर खुदरा निवेशकों का रुझान कम होने लगता है, मगर स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड के मामले में बाजार विश्लेषक बिल्कुल उलट राय रख रहे हैं। पूरे एक साल के दौरान इस काउंटर में 26 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की जा चुकी है, जिसके बाद यह अपने 52 हफ्तों के सबसे निचले स्तर 36.31 रुपये के काफी करीब पहुंच गया। हालिया सत्र में स्टॉक लगभग डेढ़ प्रतिशत सुधरकर 40.19 रुपये के भाव पर दर्ज किया गया। इस तेज गिरावट के बावजूद ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी की विकास संभावनाओं को बेहद मजबूत माना है और मौजूदा भाव से इसमें 73 प्रतिशत तक की भारी बढ़त आने का अनुमान पेश किया है।
ब्रोकरेज की खरीदारी राय और 65 रुपये का भाव
मोतीलाल ओसवाल ने इस रिन्यूएबल ऊर्जा शेयर पर अपना सकारात्मक रुख कायम रखा है। ब्रोकरेज हाउस ने स्टॉक के लिए 'Buy' रेटिंग को बरकरार रखते हुए 65 रुपये का नया मूल्य लक्ष्य निर्धारित किया है। सिर्फ एक फर्म ही इस कंपनी पर आशावादी नहीं है, बल्कि बाजार के व्यापक आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं। इस शेयर पर लगातार नजर रखने वाले 12 बड़े विश्लेषकों में से 10 विशेषज्ञों ने इसे खरीदने यानी 'Buy' की सलाह दी है, जबकि शेष 2 जानकारों ने 'Hold' रुख अपनाने को कहा है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस काउंटर को ट्रैक करने वाले किसी भी विश्लेषक ने निवेशकों को बिकवाली यानी 'Sell' की संस्तुति नहीं दी है।
हालिया करेक्शन के बाद आकर्षक मूल्यांकन
विगत तीन महीनों की अवधि में इस ऊर्जा शेयर की कीमतों में करीब 31 प्रतिशत की तीखी गिरावट देखी गई है। वहीं कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक का हिसाब लगाएं तो स्टॉक लगभग 24 प्रतिशत कमजोर पड़ चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बिकवाली के दबाव ने शेयर के वैल्यूएशन को काफी आकर्षक स्तर पर ला खड़ा किया है। मौजूदा दौर में यह कंपनी वित्त वर्ष 2028 की संभावित प्रति शेयर आय (EPS) के मात्र 17.5 गुना पर ट्रेड कर रही है, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत लगभग 22 गुना रहा है। कंपनी के कारोबारी ढांचे को देखें तो उसकी कुल कमाई का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान बनता है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2027 के दूसरे छह महीनों में डिलीवरी 1.2 गीगावॉट से बढ़कर 2.1 गीगावॉट तक पहुंचने का आकलन किया गया है।
5.9 गीगावॉट की ऑर्डर बुक और आय की स्थिरता
स्टॉक के फंडामेंटल्स को सहारा देने वाला सबसे अहम आधार कंपनी का मजबूत वर्क ऑर्डर पोर्टफोलियो है। जून में समाप्त हुई तिमाही तक कंपनी के पास 5.9 गीगावॉट क्षमता के ठोस और पक्के ऑर्डर मौजूद थे। ऑर्डर का यह विशाल आकार वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक की परियोजनाओं की आपूर्ति के लिए 100 प्रतिशत तक राजस्व की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से लेकर वित्त वर्ष 2028 के बीच कंपनी का परिचालन मुनाफा यानी EBITDA 22 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) की गति से विस्तार कर सकता है।
बिजली की खपत में बदलाव और स्वच्छ ऊर्जा की रफ्तार
देशभर में पावर ग्रिड पर ऊर्जा खपत के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। शाम के समय जब बिजली की मांग अपने चरम पर होती है, तब हाजिर बाजार में ऊंची कीमतों के कारण पवन व सौर हाइब्रिड मॉडल और स्थिर व निरंतर आपूर्ति देने वाले अक्षय ऊर्जा संयंत्रों की उपयोगिता बढ़ गई है। चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में देश के भीतर 3 गीगावॉट पवन ऊर्जा क्षमता ग्रिड से जोड़ी जा चुकी है। उम्मीद जताई गई है कि बाकी बचे छह महीनों में 4.5 गीगावॉट अतिरिक्त क्षमता का विस्तार होगा। पवन टर्बाइन बनाने वाली अग्रणी घरेलू इकाई होने के नाते इस पूरी नई क्षमता स्थापना का सीधा फायदा कंपनी की ऑर्डर बुक में जुड़ना तय माना जा रहा है।
विकास को गति देने वाले तीन प्रमुख कारक
आने वाले समय में कंपनी के कारोबार को विस्तार देने के लिए तीन बड़े माध्यम चिन्हित किए गए हैं। पहला इंजन कंपनी का नया 'डेवकॉ' ढांचा है, जिसके माध्यम से केवल चार महीनों के अल्प समय में ही 600 मेगावाट से अधिक क्षमता के अनुबंध हासिल किए जा चुके हैं। दूसरा अवसर विदेशी बाजारों से जुड़ा है, जहां ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे विकसित क्षेत्रों में टर्बाइन निर्यात के नए रास्ते खुल रहे हैं। तीसरा सबसे व्यापक बदलाव 'रीपावरिंग' के मोर्चे पर आना है। देश भर में लगभग 10 से 20 साल पुरानी पड़ चुकी पुरानी टर्बाइनों को आधुनिक और अधिक क्षमता वाले उपकरणों से बदला जाना है। इस रीपावरिंग प्रक्रिया से चालू वित्त वर्ष की समाप्ति तक कंपनी को बड़े पैमाने पर नए कार्य आदेश मिलने की संभावना जताई गई है।


















