पंजाब में गुरुवार, 15 अक्टूबर को सामान्य जनजीवन प्रभावित होने के आसार हैं, क्योंकि मानसा जिले में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया गया है। इस बंद का मुख्य मकसद घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना और राज्य सरकार एवं पुलिस प्रशासन से जवाबदेही तय करवाना है। परिवार और समर्थकों के गुस्से को देखते हुए कई सामाजिक संगठनों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया है।
एसजीपीसी का समर्थन और प्रमुख संस्थानों की स्थिति
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने इस बंद को औपचारिक रूप से अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इसके परिणामस्वरूप एसजीपीसी के तहत आने वाले तमाम प्रशासनिक दफ्तर और उससे जुड़े संस्थान बंद रहने की संभावना है। हालांकि, पूरे पंजाब में स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों या सार्वजनिक परिवहन को बंद रखने के लिए सरकार की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जमीनी स्तर पर बंद का असर अलग-अलग जिलों में स्थानीय व्यापारियों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और अन्य संस्थाओं की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
मानसा जिले में गहराया तनाव और सड़क जाम
घटनास्थल मानसा जिले में स्थिति विशेष रूप से तनावपूर्ण बनी हुई है। परविंदर सिंह झोटा की हत्या के तुरंत बाद से ही इलाके में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं और कई जगहों पर सड़कों पर जाम लगा दिया गया है, जिससे रोजमर्रा की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है, लेकिन नागरिकों और राहगीरों को किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
स्कूल, कॉलेज, बाजार और परिवहन सेवाओं की स्थिति
शिक्षा संस्थानों की बात करें तो समूचे राज्य में किसी व्यापक अवकाश की पुष्टि नहीं हुई है। छात्र और अभिभावक अपने-अपने स्थानीय स्कूलों, कॉलेजों और जिला प्रशासन द्वारा जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों पर नजर बनाए रखें। वहीं, व्यावसायिक गतिविधियों पर असर केवल उन्हीं बाजारों और इलाकों में देखने को मिल सकता है जहां के व्यापार मंडल बंद के आह्वान का स्वेच्छा से समर्थन करेंगे। राज्यभर की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी, ऐसा कोई अनिवार्य आदेश नहीं है।
यातायात व्यवस्था के लिहाज से सरकारी बसों और निजी परिवहन वाहनों को उन संवेदनशील इलाकों में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है जहां प्रदर्शनकारी सड़कों पर मौजूद हैं। हालांकि, पूरे राज्य में परिवहन सेवाओं को स्थगित करने का कोई सामान्य आदेश नहीं दिया गया है। इसी तरह, 15 अक्टूबर को पेट्रोल पंपों और सरकारी दफ्तरों को बंद रखने के संबंध में भी कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं हुआ है। जैसे-जैसे नए संगठन इस बंद को समर्थन देने आगे आएंगे, स्थिति में बदलाव संभव है, इसलिए यात्रा से पूर्व स्थानीय परामर्श जरूर जांच लें।
हत्या की पृष्ठभूमि और पुलिस कार्रवाई
इस बंद की पृष्ठभूमि मंगलवार, 13 अक्टूबर की उस खूनी घटना से जुड़ी है जब मानसा जिले में कथित नशा बिक्री को लेकर एक केमिस्ट के साथ हिंसक टकराव हुआ। इसी विवाद के दौरान नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। गोलीबारी की इस हिंसक घटना में झोटा के चार साथी भी घायल हो गए थे।
घटना के बाद आरोपी केमिस्ट अश्वनी कुमार मौके से फरार हो गया था, जिसे बाद में पुलिस ने राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। इस जघन्य हत्याकांड ने क्षेत्र में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। परविंदर सिंह झोटा के परिजनों और उनके समर्थकों ने इलाके में चल रहे कथित नशे के कारोबार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्याय की मांग और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई के दबाव के तहत ही झोटा के परिवार ने 15 अक्टूबर को पूरे पंजाब में बंद का ऐलान किया है।



















