बढ़ते वायु प्रदूषण और वैश्विक तापमान में हो रही बढ़ोतरी ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा कर दिया है। यह स्थिति जहां पर्यावरण संरक्षण की तत्काल मांग करती है, वहीं नए उद्यमियों और महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए पर्यावरण अनुकूल कारोबार शुरू करने के नए रास्ते भी खोल रही है। आज के दौर में ऐसे उद्यम स्थापित करना बेहद व्यावहारिक हो गया है जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसकी सुरक्षा करते हैं। केंद्र सरकार और विभिन्न वित्तीय संस्थान इन टिकाऊ पहलों को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर पूंजीगत वित्तीय सहायता और रियायती दरों पर कर्ज की सुविधा मुहैया करा रहे हैं।
सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और सरकारी मदद के रास्ते
ऊर्जा की लगातार बढ़ती खपत और बिजली के भारी भरकम बिलों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सौर ऊर्जा पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सौर ऊर्जा क्षेत्र में कई अलग-अलग रूपों में काम शुरू किया जा सकता है, जिसमें सोलर पैनल की डीलरशिप लेना, सौर उपकरणों का विनिर्माण करना अथवा छतों पर सोलर सिस्टम लगाने का तकनीकी स्टार्टअप स्थापित करना शामिल है। इस दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और अन्य रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के जरिए आवासीय व व्यावसायिक दोनों स्तरों पर प्लांट लगाने के लिए भारी सब्सिडी दी जा रही है। अगर कोई छोटा उद्यम या सूक्ष्म उद्योग इस क्षेत्र में कदम रखता है, तो उसे सरकार की ओर से 30% से 40% तक की भारी सब्सिडी का प्रत्यक्ष लाभ मिल जाता है।
कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण में कारोबार की संभावनाएं
औद्योगिक और शहरी कचरा आज एक बड़ी समस्या है, लेकिन यही समस्या रीसायकलिंग उद्योग के लिए कच्चे माल का काम करती है। प्लास्टिक अपशिष्ट, इलेक्ट्रॉनिक कचरा और ठोस कचरे का सुरक्षित निपटान तथा पुनर्चक्रण वर्तमान समय में सबसे तेजी से फलने-फूलने वाला व्यापारिक क्षेत्र बन चुका है। युवा उद्यमी इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक की खाली बोतलों से पॉलिएस्टर धागे व कपड़े तैयार करने की यूनिट लगा सकते हैं। इसी प्रकार बेकार पड़े पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामानों की प्रोसेसिंग करके उनमें मौजूद तांबा, सोना जैसी कीमती धातुओं को निकाला जा सकता है या फिर गीले कचरे को प्रसंस्कृत करके उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाई जा सकती है। स्वच्छ भारत मिशन और स्टार्टअप इंडिया जैसे प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अंतर्गत कचरा प्रबंधन से जुड़ी इकाइयों को स्थापित करने के लिए सरकार औद्योगिक भूमि आवंटन में प्राथमिकता देती है और मशीनरी की खरीद पर विशेष अनुदान भी उपलब्ध कराती है।
ईवी चार्जिंग नेटवर्क और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग की मांग
सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की तादाद में लगातार तेजी देखी जा रही है, जिसके चलते सार्वजनिक और निजी चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है। वाणिज्यिक परिसरों, पार्किंग स्थलों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन लगाना एक दीर्घकालिक व सुरक्षित आमदनी वाला विकल्प साबित हो रहा है। इसके साथ ही एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण पैकेजिंग उद्योग में आमूलचूल बदलाव आया है। अब उत्पादों की डिलीवरी और खुदरा व्यापार के लिए बायोडिग्रेडेबल सामग्री और कागज से बनी पैकेजिंग का चलन बढ़ चुका है, जिससे इस क्षेत्र में उत्पादन इकाइयों की मांग अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है।
ग्रीन लोन की रियायती दरें और अनुकूल वित्तीय शर्तें
पर्यावरण को लाभ पहुंचाने वाली व्यावसायिक परियोजनाओं को गति देने के लिए वित्तीय क्षेत्र में विशेष ग्रीन फाइनेंसिंग की व्यवस्था की गई है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) जैसे प्रमुख सार्वजनिक बैंक और सिडबी जैसी विकास वित्तीय संस्थाएं ग्रीन बिजनेस के लिए विशेष लोन योजनाएं चला रही हैं। इन पहलों के अंतर्गत सामान्य व्यावसायिक ऋणों की तुलना में 1% से 2% तक कम ब्याज दर पर पूंजी उपलब्ध कराई जाती है। सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट यानी सीजीटीएमएसई के तहत बिना कोई जमीन या संपत्ति गिरवी रखे संपार्श्विक मुक्त ऋण स्वीकृत किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों द्वारा प्रारंभिक चरण में कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त मोहलत यानी मॉरेटोरियम अवधि भी प्रदान की जाती है, ताकि नियमित आय शुरू होने से पहले उद्यमी पर कर्ज की मासिक किस्तों का वित्तीय दबाव न बने।
























