छुट्टियों के दौरान अपने परिवार के साथ घूमना-फिरना हर किसी को पसंद होता है। अगर आपकी कंपनी आपको मिलने वाली सैलरी में लीव ट्रैवल अलाउंस यानी LTA देती है, तो यही ट्रिप आपके लिए टैक्स बचाने का एक बेहतरीन जरिया बन सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप यात्रा पर जितना भी पैसा खर्च करेंगे, उस पूरी रकम पर आपको टैक्स छूट मिल जाएगी। इनकम टैक्स विभाग ने LTA पर टैक्स छूट देने के लिए कुछ खास और सख्त नियम तय किए हैं। टैक्स छूट का दावा करने से पहले इन शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना बेहद जरूरी है ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।
LTA क्या है और किसे मिलता है इसका फायदा
LTA वास्तव में एक ऐसा भत्ता है जो कई कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को छुट्टी के दौरान यात्रा करने के लिए दिया जाता है। अगर यह भत्ता आपकी सैलरी के ढांचे का हिस्सा है, तभी आप इस पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस टैक्स छूट का लाभ केवल वही कर्मचारी उठा सकते हैं जिन्होंने पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुना है। नई टैक्स व्यवस्था के तहत इस भत्ते पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है। साथ ही, केवल कागजी कार्रवाई या झूठे दावों से काम नहीं चलेगा। कर्मचारी को वास्तव में अपने दफ्तर से छुट्टी लेनी होगी और सचमुच यात्रा करनी होगी, तभी वे इस कटौती के हकदार माने जाएंगे।
किन खर्चों पर मिलती है छूट और क्या होते हैं बाहर
अक्सर लोग यह गलती कर बैठते हैं कि वे अपनी पूरी यात्रा के खर्च पर टैक्स छूट की उम्मीद करने लगते हैं। आयकर नियमों के अनुसार, LTA के तहत होटल के कमरे का किराया, खाना-पीना, लोकल टैक्सी, शॉपिंग या किसी भी अन्य तरह के मनोरंजन पर होने वाले खर्चों पर टैक्स छूट नहीं दी जाती है। टैक्स विभाग केवल यात्रा के मुख्य साधनों जैसे हवाई जहाज, ट्रेन या सार्वजनिक बस के किराये को ही कर मुक्त मानता है। उदाहरण के लिए, अगर आप कुल्लू-मनाली की यात्रा पर जाते हैं और वहां रहने-खाने यानी होटल पर 40,000 रुपये खर्च करते हैं और वहां आने-जाने के टिकट पर 12,000 रुपये खर्च होते हैं, तो आपको टैक्स छूट केवल टिकट के 12,000 रुपये पर ही मिलेगी। बाकी के 40,000 रुपये पर आपको अपनी जेब से टैक्स देना होगा।
विदेश यात्रा पर पाबंदी और चार साल का ब्लॉक सिस्टम
LTA के तहत टैक्स छूट का दावा करने के लिए एक और बड़ी शर्त यह है कि आपकी यात्रा केवल भारत की सीमाओं के भीतर होनी चाहिए। अगर आप विदेश घूमने की योजना बनाते हैं, तो उस यात्रा पर आपको LTA का कोई लाभ नहीं मिलेगा। सरकार ने इसके लिए चार कैलेंडर वर्षों का एक विशेष ब्लॉक तय किया हुआ है। इस पूरे चार साल के ब्लॉक के दौरान एक कर्मचारी अधिकतम दो बार की यात्राओं के लिए ही LTA टैक्स छूट का दावा कर सकता है। यदि आप किसी ब्लॉक के दौरान केवल एक ही बार इस छूट का उपयोग कर पाए हैं, तो बचे हुए एक क्लेम को अगले ब्लॉक के पहले साल में ट्रांसफर किया जा सकता है, जिसे कुछ तय शर्तों के साथ क्लेम किया जा सकता है।
ITR दाखिल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
यदि आपने यात्रा पूरी करने के बाद अपने नियोक्ता यानी कंपनी को समय पर टिकट, बोर्डिंग पास और अन्य जरूरी दस्तावेज सौंप दिए हैं, तो आमतौर पर यह छूट आपके Form 16 में दर्ज हो जाती है। अपना ITR दाखिल करने से पहले Form 16 को ध्यान से जरूर चेक कर लें। वहीं, अगर आप सीधे अपने ITR में इस छूट का दावा कर रहे हैं, तो यात्रा से जुड़े सभी हवाई या रेल टिकट, बोर्डिंग पास और भुगतान की रसीदों को बहुत संभालकर रखें। आयकर विभाग भविष्य में स्क्रूटनी या किसी पूछताछ के दौरान आपसे इन दस्तावेजों को सबूत के तौर पर मांग सकता है। दस्तावेज न होने पर आपका टैक्स दावा खारिज किया जा सकता है।




















