राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद में स्थित मालासेरी डूंगरी को भगवान देवनारायण की पावन जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। इस स्थान पर हर साल भादवी छठ के पावन अवसर पर भगवान देवनारायण के वाहन नीलाघर यानी नीले घोड़े का अवतरण दिवस अत्यंत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस विशेष आयोजन में भाग लेने के लिए न केवल राजस्थान से, बल्कि देश के विभिन्न कोनों से भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और अपनी गहरी आस्था प्रकट करते हैं।
विशेष पूजा और भक्तों की अटूट आस्था
मालासेरी डूंगरी के इस मंदिर में भगवान देवनारायण के साथ-साथ उनके वाहन नीले घोड़े की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी गहरी मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि हर साल पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन पैदल यात्रा करके मंदिर तक पहुंचते हैं। यात्रा के पूरे मार्ग में डीजे, पारंपरिक ढोल और नगाड़ों की गूंज के साथ भक्त भगवान देवनारायण के जयकारे लगाते हुए मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं।
भजन संध्या और भव्य मेले का आयोजन
इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में एक विशाल भजन संध्या और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद रहती है। मालासेरी डूंगरी की प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण यह स्थल देश भर के आस्थावानों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां की प्राकृतिक बनावट और भौगोलिक संरचना आज भी प्राचीन काल की यादों को ताजा कर देती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।
पौराणिक मान्यता और नीलाघर घोड़े का इतिहास
मालासेरी मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल ने इस स्थान के इतिहास के बारे में विस्तार से बताया है। उनके अनुसार, माता साडू की परीक्षा लेने के लिए स्वयं भगवान विष्णु उनके पास आए थे। उन्होंने माता को आशीर्वाद देते हुए यह वचन दिया था कि बगड़ावतों का युद्ध समाप्त होने के पश्चात वह मालासेरी डूंगरी जाकर तपस्या करें। तपस्या पूर्ण होने के बाद भगवान विष्णु उनके पुत्र के रूप में इस धरती पर अवतार लेंगे। जब माता साडू ने इस बात का अकाट्य प्रमाण मांगा, तो भगवान विष्णु ने उन्हें निर्देश दिया कि भादवी छठ के दिन मालासेरी डूंगरी पर जाकर पत्थर को चीरकर देखना, जहां उनका वाहन नीले घोड़े के रूप में प्रकट हो जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं दर्शन
भगवान देवनारायण की इस पावन जन्मस्थली मालासेरी डूंगरी की प्रसिद्धि केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी ख्याति पूरे देश में फैली हुई है। वर्ष 2023 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक साधारण भक्त के रूप में भगवान देवनारायण के दर्शन करने के लिए इसी स्थान पर पहुंचे थे। हर साल आयोजित होने वाले इस धार्मिक पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिलता है और दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग गहरी आस्था के साथ यहां पहुंचकर भगवान देवनारायण और उनके वाहन नीले घोड़े की पूजा-अर्चना करते हैं।


















