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टैक्स राहत के एक साल बाद बदला टर्म इंश्योरेंस का गणित, बड़े कवर और राइडर्स पर बढ़ा भरोसामनी
19 सित॰ 2026, 12:46 pm (23 मिनट पहले)· 0

टैक्स राहत के एक साल बाद बदला टर्म इंश्योरेंस का गणित, बड़े कवर और राइडर्स पर बढ़ा भरोसा

व्यक्तिगत टर्म लाइफ पॉलिसियों पर जीएसटी छूट के एक वर्ष बाद सुरक्षा योजनाओं को अपनाने में 1.5 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पॉलिसीधारक केवल प्रीमियम बचाने के बजाय ऊंचे सम एश्योर्ड और वैकल्पिक राइडर्स चुनकर परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत कर रहे हैं।

व्यक्तिगत टर्म लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) हटने के एक साल पूरे होने के बाद भारतीय जीवन बीमा बाजार में ग्राहकों के व्यवहार में एक बुनियादी बदलाव नजर आने लगा है। बीमा लेने वाले अब केवल सबसे सस्ती या न्यूनतम प्रीमियम वाली बुनियादी योजना खोजने तक सीमित नहीं हैं। कर छूट के जरिए मिलने वाली वित्तीय राहत का इस्तेमाल लोग अपने परिवार के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच तैयार करने, बड़े बीमा कवर चुनने और व्यापक सुरक्षा देने वाले अतिरिक्त प्रावधानों यानी राइडर्स को शामिल करने में कर रहे हैं। इस बदलाव ने टर्म कवर को केवल सांकेतिक कर बचत साधन के दायरे से बाहर निकालकर घरेलू वित्तीय योजना की मुख्य धुरी बना दिया है।

बीमा सुरक्षा योजनाओं को अपनाने की रफ्तार कर छूट लागू होने के बाद से लगभग 1.5 गुना बढ़ी है। पहले पॉलिसीधारकों के अंतिम प्रीमियम बिल में जीएसटी जुड़ता था, जिससे अग्रिम वित्तीय भार बढ़ जाता था। भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजार में प्रीमियम की लागत में थोड़ी सी भी कमी आने पर खरीदार बीमा राशि के आकार, पॉलिसी की अवधि और वैकल्पिक लाभों पर नए सिरे से विचार करने लगते हैं। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि लोग केवल कम खर्च में पुरानी व्यवस्था बनाए रखने के बजाय उसी बचत का इस्तेमाल सुरक्षा का दायरा बढ़ाने में कर रहे हैं। भारत के उन परिवारों के लिए यह सुधार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो केवल एक मुख्य कमाऊ सदस्य की आय पर निर्भर हैं और जहां कम बीमा राशि की समस्या लंबे समय से बनी रही है।

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उच्च आय वर्ग और प्रवासी भारतीयों का बड़ा रुझान

बड़ी बीमा राशि की ओर बढ़ने का सबसे स्पष्ट रुझान प्रवासी भारतीयों और उच्च निवल मूल्य वाले यानी एचएनआई ग्राहकों में देखा गया है। कर छूट की व्यवस्था प्रभावी होने के बाद 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक के सुरक्षा कवर में एनआरआई वर्ग की हिस्सेदारी में 35 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसी तरह एचएनआई श्रेणी के भीतर ऐसे बड़े आकार की पॉलिसियों की हिस्सेदारी में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इस वर्ग में सुरक्षा की मांग बढ़ने के पीछे दो प्रमुख कारण मौजूद हैं। पहली बात यह कि संपन्न ग्राहकों के सिर पर बड़े गृह ऋण, व्यावसायिक दायित्व, विदेशी खर्च और जीवनशैली से जुड़े दीर्घकालिक पारिवारिक वित्तीय दायित्व होते हैं।

दूसरी बात यह है कि जब बड़े वार्षिक प्रीमियम पर कर संरचना अधिक कुशल और किफायती हो जाती है, तो उच्च आय वर्ग अपनी संपूर्ण सुरक्षा जरूरतों का तुरंत पुनर्मूल्यांकन करता है। बड़े आकार की पॉलिसियों पर लगने वाले भारी प्रीमियम में जीएसटी हटने से सालाना आधार पर एक ठोस बचत होती है। इस वर्ग ने अतिरिक्त सुरक्षा जोड़ने में भी तेजी दिखाई है। प्रवासी भारतीयों के बीच पॉलिसी राइडर्स अपनाने की दर में 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जबकि एचएनआई ग्राहकों में यह वृद्धि 9 प्रतिशत दर्ज की गई। राइडर्स ऐसे वैकल्पिक विकल्प हैं जो संकट की घड़ी में पॉलिसी के दायरे का विस्तार करते हैं। हालांकि इनसे कुल प्रीमियम मामूली बढ़ जाता है, लेकिन समझदारी से चुनने पर ये परिवारों के बड़े जोखिम को टाल सकते हैं।

महिलाओं और गृहिणियों की भागीदारी में उल्लेखनीय उछाल

कर सुधार के बाद के आंकड़ों में सबसे दिलचस्प पहलू यह सामने आया है कि टर्म इंश्योरेंस खरीदने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। इस अवधि में महिलाओं द्वारा पॉलिसी खरीदने की दर पुरुषों की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक तेज रही। यह बदलाव इंगित करता है कि अधिक कामकाजी महिलाएं अब स्वयं की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र नीतियां ले रही हैं, साथ ही परिवारों में उनके आर्थिक योगदान को भी औपचारिक सुरक्षा के दायरे में मान्यता मिलने लगी है।

गृहिणियों के वर्ग में तो और भी तीव्र उछाल दर्ज किया गया, जहां अन्य ग्राहक श्रेणियों की तुलना में 60 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि देखी गई। भारतीय पारिवारिक ढांचे में यह एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक संकेत है। यद्यपि गृहिणियां प्रत्यक्ष वेतन अर्जित नहीं करतीं, लेकिन बच्चों के लालन-पालन, बुजुर्गों की देखभाल, घर के प्रबंधन और दैनिक जिम्मेदारियों जैसे अवैतनिक कार्यों का आर्थिक मूल्य बहुत व्यापक होता है। परिवार के किसी प्रमुख देखभालकर्ता की अनुपस्थिति में उन सभी सेवाओं को बहाल रखने के लिए जरूरी प्रतिस्थापन लागत काफी ऊंची हो सकती है, जिसे अब परिवार वित्तीय सुरक्षा देकर कवर कर रहे हैं।

स्वरोजगार वर्ग और शुरुआती उम्र में खरीदारी का नया दौर

स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के बीच भी बीमा सुरक्षा लेने की गति अन्य ग्राहक वर्गों के मुकाबले 12 प्रतिशत अधिक रही है। आमतौर पर स्वतंत्र काम करने वाले पेशेवरों, छोटे व्यापारियों और कारोबारियों के पास कॉरपोरेट कंपनियों की तरह नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला समूह जीवन बीमा या अन्य संगठित लाभ उपलब्ध नहीं होते। व्यवसाय से जुड़े वित्तीय दायित्वों और आश्रितों के भविष्य के लिए व्यक्तिगत टर्म पॉलिसी उनके लिए सबसे भरोसेमंद सुरक्षा कवच साबित हो रही है।

उम्र के लिहाज से भी युवा पीढ़ी अब जीवन बीमा के प्रति अधिक सतर्क दिखाई दे रही है। 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के ग्राहकों में टर्म कवर अपनाने की दर अन्य आयु वर्गों की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक रही, जिसके बाद 36 से 45 वर्ष आयु वर्ग का स्थान रहा। शुरुआती उम्र में पॉलिसी लेने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि प्रीमियम की दरें बहुत कम तय होती हैं, क्योंकि टर्म प्लान की कीमतें उम्र, स्वास्थ्य और पॉलिसी की समय सीमा से सीधे जुड़ी होती हैं।

पॉलिसी के आकार का संतुलन और राइडर्स की भूमिका

भले ही बड़े कवर लेने वालों की संख्या में तेजी आई हो, लेकिन 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि अब भी आम खरीदारों की पहली पसंद बनी हुई है। कुल खरीदारी में आधे से अधिक हिस्सा इसी 1 करोड़ रुपये वाले स्लैब का है, जिसे शहरी और अर्ध-शहरी मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए जरूरी वित्तीय आधार माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, 2 करोड़ रुपये और उससे अधिक की पॉलिसियों की हिस्सेदारी बाजार में 15 प्रतिशत के स्तर पर पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार अंधाधुंध बड़े आकार की ओर नहीं भाग रहा, बल्कि लोग अपनी देनदारियों, बच्चों की शिक्षा के लक्ष्यों और घरेलू आय के आधार पर संतुलित निर्णय ले रहे हैं।

समग्र स्तर पर राइडर्स को अपनाने में 13 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इस बढ़ोतरी में सबसे आगे एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट यानी दुर्घटना में मृत्यु होने पर अतिरिक्त लाभ और वेवर ऑफ प्रीमियम यानी प्रीमियम माफी वाले राइडर्स रहे। दुर्घटना लाभ से किसी हादसे के समय आश्रितों को मूल राशि के ऊपर अतिरिक्त भुगतान मिलता है, जबकि प्रीमियम माफी का विकल्प गंभीर बीमारी या दिव्यांगता की स्थिति में बिना अगला प्रीमियम भरे भी पॉलिसी को निर्बाध रूप से चालू रखने में मदद करता है।

भौगोलिक विस्तार और वित्तीय जागरूकता का प्रसार

टर्म इंश्योरेंस की बढ़ती मांग केवल देश के शीर्ष महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों के स्तर पर भी व्यापक विस्तार दर्ज हुआ है। भौगोलिक दृष्टिकोण से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने 39 प्रतिशत की सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की। इसके बाद केरल में 11 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह आंकड़े साबित करते हैं कि दक्षिण भारत और पश्चिमी भारत के बाजारों में विशुद्ध जीवन सुरक्षा योजनाओं के लाभों को लेकर जागरूकता तेजी से जमीनी स्तर पर पहुंच रही है।

इस पूरे बदलाव का मुख्य निष्कर्ष यह है कि हर परिवार को बिना सोचे-समझे सबसे बड़ा कवर लेने की जरूरत नहीं होती। असली समझदारी इस बात में है कि चुनी गई बीमा राशि अचानक आय बंद होने की स्थिति में देनदारियों को चुकाने, बच्चों के भविष्य के लक्ष्यों को सुरक्षित रखने और परिवार का जीवन स्तर बनाए रखने के लिए पर्याप्त है या नहीं। कर छूट ने इस योजना को सस्ता जरूर बना दिया है, लेकिन सुरक्षा का वास्तविक लाभ सही सम एश्योर्ड, उचित अवधि और आवश्यक राइडर्स के सही संयोजन पर ही निर्भर करता है।

सवाल-जवाब

टर्म इंश्योरेंस पर जीएसटी छूट से ग्राहकों को क्या फायदा हुआ है?
टर्म इंश्योरेंस से टैक्स हटने से प्रीमियम की अंतिम लागत घट गई है, जिससे ग्राहक उसी बजट में बड़ा सम एश्योर्ड और उपयोगी राइडर्स चुन पा रहे हैं।
टैक्स छूट के बाद टर्म कवर अपनाने में कितनी वृद्धि दर्ज की गई?
व्यक्तिगत टर्म लाइफ इंश्योरेंस नीतियों पर जीएसटी हटने के बाद इसके अपनाने की दर में करीब 1.5 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रवासी भारतीयों और एचएनआई खरीदारों ने किस आकार की पॉलिसी ज्यादा चुनी?
एनआरआई वर्ग में 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक के कवर में 35 प्रतिशत और एचएनआई खरीदारों में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई।
महिलाओं और गृहिणियों की भागीदारी में क्या बदलाव आया है?
महिलाओं की पॉलिसी खरीद पुरुषों की तुलना में 27 प्रतिशत तेज रही, जबकि गृहिणियों के सेगमेंट में 60 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई।
बाजार में सबसे लोकप्रिय बीमा राशि कौन सी बनी हुई है?
कुल खरीदारी में 1 करोड़ रुपये का सम एश्योर्ड अब भी सबसे लोकप्रिय है और यह आधे से अधिक खरीद का प्रतिनिधित्व करता है।
किन दो राज्यों में टर्म इंश्योरेंस अपनाने में सबसे ज्यादा उछाल आया?
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने संयुक्त रूप से 39 प्रतिशत की सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की, जिसके बाद केरल 11 प्रतिशत के साथ रहा।
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