त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले बेंगलुरु के सर्राफा बाजार में 9 सितंबर को सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। 24K, 22K और 18K तीनों ही श्रेणियों के सोने के दामों में नरमी आई है। घरेलू बाजार में यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय रुझानों के असर से हुआ है, जहां वैश्विक बाजार में लगातार दो कारोबारी सत्रों में बिकवाली के बाद सोना $4,400 प्रति आउंस के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है।
दस दिनों की उठापटक और अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल
बीते दस दिनों के दौरान सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है और इस अवधि में कुल मिलाकर 1.5% की गिरावट आ चुकी है। वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के दामों में आई तेजी के कारण महंगाई की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं। ऊर्जा की बढ़ती लागत ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को मजबूत कर दिया है। जब भी ब्याज दरें बढ़ने की आशंका मजबूत होती है, तो बिना ब्याज वाली संपत्ति होने के कारण सोने जैसी धातुओं की मांग पर दबाव बन जाता है।
मध्य पूर्व में सैन्य तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया तेजी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में पैदा हुआ नया सैन्य संकट है। अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले के प्रयास के जवाब में अमेरिकी बलों ने कार्रवाई करते हुए खार्ग द्वीप के पास ईरान के पांच क्रूड ऑयल टैंकरों को तबाह कर दिया। खार्ग द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र माना जाता है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई, जिससे कच्चे तेल के दाम चढ़ गए और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुद्रास्फीति की चिंता गहरी हो गई।
फेडरल रिजर्व की नीति और महंगाई के आंकड़ों पर नजर
वित्तीय बाजार के कारोबारी अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले नीतिगत फैसले को लेकर सतर्क हैं। CME FedWatch टूल के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अगले हफ्ते फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 60% संभावना बनी हुई है। निवेशक अब मुद्रास्फीति की दिशा समझने के लिए आने वाले PPI और CPI आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। ब्याज दरें बढ़ने से गैर-उपज परिसंपत्ति होने के नाते सोने की आकर्षण क्षमता प्रभावित होती है।
घरेलू फ्यूचर्स बाजार और डॉलर का रुख
हाजिर बाजार में सुस्ती के बावजूद घरेलू फ्यूचर्स ट्रेडिंग में हल्की बढ़त दर्ज की गई, क्योंकि अमेरिकी डॉलर में आई मामूली कमजोरी से बाजार को सहारा मिला। 5 अक्टूबर की एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स 0.12% चढ़कर Rs. 152,769 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, 4 दिसंबर की एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 0.18% की तेजी के साथ Rs. 239,849 प्रति किग्रा पर पहुंच गया। फ्यूचर्स मार्केट में यह मामूली रिकवरी खरीदारों और बिकवालों के बीच बने संतुलन को दर्शाती है।
विशेषज्ञों की राय और तकनीकी स्तर
बाजार की मौजूदा स्थिति पर रिद्धिसिद्धि बुलियंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड के अध्यक्ष और जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि खरीदारों और बिकवालों की समान मौजूदगी के कारण सोने के दाम सीमित दायरे में बने हुए हैं। पृथ्वीराज कोठारी ने कहा, "बाजार अब कल आने वाले PPI और CPI आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान द्वारा आर्थिक युद्ध की धमकी देने और अमेरिकी युद्धपोतों पर गोलीबारी के दावों से नया भू-राजनीतिक तनाव पैदा हुआ है। तकनीकी दृष्टिकोण से, पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार सोने के लिए $4,300 से $4,500 प्रति आउंस और चांदी के लिए $65 से $67 प्रति आउंस के स्तर बेहद महत्वपूर्ण हैं।



















