अमेरिकी न्याय व्यवस्था के इतिहास में नागरिक संगठनों और प्रदर्शनकारियों पर संघीय एजेंसियों की निगरानी का एक ऐसा खाका सामने आया है, जिसकी व्यापकता ने कानूनी जानकारों को हैरान कर दिया है। मिनेसोटा 15 मामले की अदालती प्रक्रिया के दौरान पेश किए गए आधिकारिक दस्तावेजों से पता चलता है कि गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने आव्रजन नीतियों का विरोध करने वाले स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामुदायिक निगरानी समूहों को निशाने पर लेने के लिए अपने सबसे कठोर अधिकार क्षेत्रों का इस्तेमाल किया है। प्रशासन ने इन नेटवर्कों की गतिविधियों पर रोक लगाने के मकसद से 119 से अधिक विशेष एजेंटों, आधुनिक निगरानी तकनीकों, वित्तीय विश्लेषण और यहां तक कि बिना हथियार वाले रीपर ड्रोनों की तैनाती की। यह जांच सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें देश के अन्य राज्यों के संगठित अपराध और आतंकवाद रोधी विंग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया।
राष्ट्रपति के गोपनीय निर्देश से शुरू हुआ निगरानी तंत्र
अदालती दस्तावेजों में सामने आए विवरणों के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में चार्ली किर्क की हत्या के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम 7 (एनएसपीएम 7) जारी किया था। इस निर्देश में संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे समूहों, गैर-लाभकारी संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ अपनी पूरी ताकत लगाने का अधिकार दिया गया, जो प्रशासनिक नीतियों का कड़ा विरोध करते हैं या पारंपरिक व्यवस्था के खिलाफ विचार व्यक्त करते हैं। इस गुप्त आदेश के तहत घरेलू आतंकवाद की धाराओं में दो प्रमुख अभियान चलाए गए, जिन्हें 'प्रोजेक्ट व्हिपल शील्ड' और 'ऑपरेशन पपेट मास्टर' का नाम दिया गया।
इन दोनों अभियानों के जरिए उन कार्यकर्ताओं को लक्षित किया गया जिन्होंने 'ऑपरेशन मेट्रो सर्ज' के दौरान आव्रजन प्रवर्तन की कार्रवाई पर नजर रखने के लिए जमीनी नेटवर्क तैयार किया था। ट्विन सिटीज के कार्यकर्ताओं ने डीएचएस के एजेंटों और उनकी गाड़ियों की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए एन्क्रिप्टेड सिग्नल ग्रुप, गाड़ियों के स्थानीय डेटाबेस और एक केंद्रीय डिस्पैच व्यवस्था बना रखी थी। सरकारी वकीलों का तर्क है कि यह गतिविधि संघीय अधिकारियों के काम में रुकावट डालने, उनकी गोपनीयता भंग करने, पीछा करने और उन पर हमला करने की आपराधिक साजिश है। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं का कहना है कि यह शांतिपूर्ण नागरिक निगरानी थी जिसे संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है, लेकिन सरकार ने इसे घरेलू आतंकवाद का रूप दे दिया।
ऑपरेशन कीहोल और अंडरकवर एजेंटों की चर्च में घुसपैठ
दस्तावेजों की पड़ताल से पता चलता है कि आइस (आईसीई) की शाखा होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स (एचएसआई) ने अपने पुराने अंडरकवर फंड 'ऑपरेशन कीहोल' के पैसे को इस जांच में लगाया। ऑपरेशन कीहोल की शुरुआत दिसंबर 2008 में मिनियापोलिस-सेंट पॉल कार्यालय द्वारा की गई थी, जिसका मूल उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी, बाल यौन शोषण, हथियारों के प्रसार और जटिल वित्तीय घोटालों की जांच के लिए उपकरण और संसाधन जुटाना था। जून 2026 तक यह कोष इस क्षेत्र में छह सक्रिय अंडरकवर अभियानों को वित्तपोषित कर रहा था, जिसमें प्रोजेक्ट व्हिपल शील्ड भी शामिल था। इस प्रमाणित अंडरकवर ऑपरेशन (सीयूसी) की समीक्षा हर छह महीने में न्याय विभाग और डीएचएस के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त समिति द्वारा की जाती है।
इस फंड का उपयोग करते हुए एचएसआई के कम से कम 11 अंडरकवर एजेंटों ने ट्विन सिटीज के कार्यकर्ता समूहों में गहरी घुसपैठ की। ये गुप्तचर मार्शल आर्ट सत्रों, अपने अधिकारों को जानने से जुड़ी बैठकों, आम हड़तालों और नागरिक सम्मेलनों में सामान्य प्रतिभागियों के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा, एजेंटों ने अदालती आदेश की स्पष्ट अनदेखी करते हुए चर्चों के भीतर भी घुसपैठ की। इन अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के एन्क्रिप्टेड सिग्नल ग्रुपों में प्रवेश हासिल किया और वहां साझा की जा रही गाड़ियों की जानकारी, संदेशों और रणनीतिक चर्चाओं को कॉपी करके अपने मुख्यालय भेजा, जिन्हें बाद में आरोप पत्र का आधार बनाया गया।
15 टेराबाइट डेटा और पैट्रियट एक्ट का सहारा
अभियोजन पक्ष की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों में ऑडियो ट्रांसक्रिप्ट, ईमेल, तस्वीरें, डेटाबेस रिकॉर्ड और 15 टेराबाइट से अधिक का एन्क्रिप्टेड सिग्नल चैट डेटा शामिल है। डिजिटल ट्रैकिंग के लिए एचएसआई ने क्लाउड प्लेटफॉर्म और निजी डेटा दलालों की मदद ली। जब एक स्थानीय कार्यकर्ता ने फ्लाई.आईओ (Fly.io) प्लेटफॉर्म पर बना व्हीकल लुकअप टूल सिग्नल ग्रुप में साझा किया, तो जांचकर्ताओं ने डोमेन नेम सिस्टम (डीएनएस) लॉग, एसएसएच सेशन डेटा और स्ट्राइप कार्ड फिंगरप्रिंट की पड़ताल की। इस खाते से कोई भुगतान पूरा नहीं हुआ था, फिर भी डिजिटल पदचिह्नों को निजी डेटा ब्रोकर थॉमसन-रॉयटर्स क्लियर (CLEAR) और मिनेसोटा राज्य के वाहन रिकॉर्ड (डीवीएस) से जोड़ा गया।
इस तकनीकी मिलान से जांचकर्ताओं ने संदिग्धों के ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, सामाजिक सुरक्षा नंबर (एसएसएन), पते का पूरा इतिहास, फोन नंबर, संपत्ति रिकॉर्ड और उनके परिवार के नाम पर दर्ज वाहनों की पूरी कुंडली तैयार कर ली। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के उस विशेष नियम 314(ए) का इस्तेमाल किया गया जिसे पैट्रियट एक्ट के तहत आतंकवादियों और हवाला कारोबारियों की संपत्ति ट्रैक करने के लिए बनाया गया था। 31 मार्च 2026 को इस नियम का उपयोग करके 29 व्यक्तियों के बैंक लेनदेन, वायर ट्रांसफर और पेपैल (PayPal) प्रतिपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड हासिल किए गए। लॉस एंजिल्स और एरिजोना में तैनात एजेंटों के बीच साझा किए गए ईमेल से संकेत मिलता है कि मजदूर संघ एसईआईयू (SEIU) से जुड़े वित्तीय विवरण भी मंगवाए गए थे।
पत्रकारों के फोन रिकॉर्ड और राष्ट्रव्यापी दायरा
जांच का दायरा सिर्फ मिनेसोटा तक सीमित नहीं था, बल्कि सिएटल, मिशिगन, शिकागो और न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलनों पर भी निगरानी रखी गई। बैठकों के बाहर खड़े वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन की गईं और सीमा सुरक्षा बल (सीबीपी) के बिना हथियार वाले रीपर ड्रोनों से कार्यकर्ताओं की आवाजाही को रिकॉर्ड किया गया। इतना ही नहीं, मामले की कवरेज करने वाले कई पत्रकारों के फोन रिकॉर्ड खंगालने के लिए सीमा शुल्क और कराधान संबंधी नियमों के तहत जारी होने वाले प्रशासनिक समन का उपयोग किया गया, ताकि ग्रैंड जूरी या अदालती वारंट की औपचारिक प्रक्रिया से बचा जा सके। इन्हीं प्रक्रियाओं के तहत पूर्व सीएनएन एंकर डॉन लेमन के खिलाफ भी जांच केंद्रित की गई थी, जिन्होंने उस चर्च के बाहर के प्रदर्शन को कवर किया था जहां एक आव्रजन अधिकारी पादरी के रूप में कार्यरत था।
इस बड़े मामले में तैनात कई जांच अधिकारी पहले भी विवादों में रहे हैं। लॉस एंजिल्स के एचएसआई एजेंट रयान रिब्नर पर जून 2025 में आव्रजन विरोधी प्रदर्शन के दौरान एसईआईयू कैलिफोर्निया के 58 वर्षीय अध्यक्ष डेविड हुएर्ता पर हमला करने और उन पर झूठा आरोप लगाने की बात सामने आई थी, जिसके वीडियो सामने आने के बाद जुलाई में हुएर्ता पर लगे आरोप वापस ले लिए गए थे। इसी तरह एचएसआई स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के एजेंट टिम गेरबर और यू हर जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को स्थानीय कार्यकर्ताओं के नेटवर्क की छानबीन में लगाया गया। कानूनी जानकारों और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक राज्य का मामला नहीं है, बल्कि देश भर में नागरिक असंतोष की निगरानी के लिए तैयार किए गए एक विशाल ढांचे का हिस्सा है, जिसकी तुलना 1960 के दशक के चर्चित कोइंटेलप्रो (COINTELPRO) और सीआईए के ऑपरेशन एमएच/चाओस से की जा रही है।



















