सुरक्षित निवेश के विकल्प तलाश रहे लोगों के लिए डाकघर की बचत योजनाएं हमेशा से पहली पसंद रही हैं। देश भर में डाक सेवाओं के संचालन के साथ-साथ पोस्ट ऑफिस नागरिकों को बैंकिंग सुविधाएं भी प्रदान करता है। यही कारण है कि सरकारी गारंटी और बेहतर सुरक्षा के कारण देश के करोड़ों जमाकर्ता पोस्ट ऑफिस की योजनाओं पर भरोसा जताते हैं। कई बचत योजनाओं में पोस्ट ऑफिस सामान्य व्यावसायिक बैंकों के मुकाबले अधिक आकर्षक रिटर्न भी देता है। यदि आप 1 साल की अवधि के लिए अपना पैसा जमा करने की योजना बना रहे हैं, तो पोस्ट ऑफिस की 12 महीने की टाइम डिपॉजिट स्कीम एक प्रमुख विकल्प के रूप में सामने आती है।
जानिए कैसे काम करती है पोस्ट ऑफिस की 12 महीने की टीडी योजना
पोस्ट ऑफिस की बैंकिंग व्यवस्था में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी खातों को टाइम डिपॉजिट (TD) के नाम से जाना जाता है। यह योजना पूरी तरह से बैंकों की एफडी स्कीम की तरह ही संचालित होती है। इसमें खाता खोलते समय निवेशक को एकमुश्त राशि जमा करनी होती है। इसके बाद जमा की गई रकम पूरे 12 महीने की निर्धारित अवधि के लिए लॉक हो जाती है। इस 1 साल की अवधि के दौरान आपकी जमा राशि पर निश्चित दर से ब्याज जुड़ता रहता है। मैच्योरिटी की अवधि पूरी होने पर निवेशक को उसका मूलधन और तय किया गया ब्याज एक साथ वापस मिल जाता है।
1 साल की एफडी पर ब्याज दर और वरिष्ठ नागरिकों के नियम
वर्तमान समय में पोस्ट ऑफिस अपनी 12 महीने यानी 1 साल की टाइम डिपॉजिट योजना पर 6.9 प्रतिशत का वार्षिक ब्याज दे रहा है। पोस्ट ऑफिस की इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यहां सभी आयु वर्ग के ग्राहकों के लिए ब्याज की दरें एक समान रखी गई हैं। आमतौर पर व्यावसायिक बैंकों में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में 0.50 प्रतिशत तक का अतिरिक्त ब्याज दिया जाता है। इतना ही नहीं, कई बैंक 80 साल या उससे अधिक उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन्स को वरिष्ठ नागरिकों से भी ज्यादा रिटर्न की पेशकश करते हैं। लेकिन पोस्ट ऑफिस में वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी कोई अलग विशेष दर लागू नहीं होती है। पोस्ट ऑफिस 12 महीने की टीडी पर वरिष्ठ नागरिकों को भी उतना ही 6.9 फीसदी ब्याज देता है, जितना सामान्य वर्ग के जमाकर्ताओं को मिलता है।
वित्त मंत्रालय तय करता है ब्याज दरें, जानिए बैंकों से कैसे है अलग
पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों का निर्धारण व्यावसायिक बैंकों से अलग तरीके से होता है। पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट सहित सभी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें भारत सरकार का वित्त मंत्रालय तय करता है। वित्त मंत्रालय हर 3 महीने यानी हर तिमाही पर इन ब्याज दरों की समीक्षा करता है और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर इनमें आवश्यक बदलाव करता है। दूसरी ओर, देश के व्यावसायिक बैंक अपनी एफडी दरों का निर्धारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा तय की जाने वाली रेपो रेट के आधार पर करते हैं। केंद्र सरकार द्वारा तय किए जाने के कारण पोस्ट ऑफिस की ब्याज दरों में सरकारी सुरक्षा की पूरी गारंटी बनी रहती है।



















