मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद राहत की सांस लेने वाले कर्जधारकों के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। ठीक दो दिन पहले जब RBI गवर्नर ने रेपो रेट को स्थिर रखने के फैसले की घोषणा की थी, तब आम जनता को बड़ी राहत महसूस हुई थी। हालांकि, अब जो आर्थिक संकेत सामने आ रहे हैं, वे स्थिति के कठिन होने का इशारा कर रहे हैं। ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने के लिए खुदरा महंगाई का नियंत्रण में रहना बेहद जरूरी होता है, लेकिन जुलाई महीने में खुदरा महंगाई दर केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य 4% से ऊपर रहने का अनुमान जताया गया है। RBI गवर्नर ने इस चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई दर का औसत अनुमान लगभग 5% रहने की बात कही है, जो पहले के 5.10% के अनुमान से थोड़ा कम है। यदि खुदरा महंगाई का दबाव इसी प्रकार बढ़ता रहा, तो भविष्य में बैंक लोन महंगे होना तय माना जा रहा है।
खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों का दोहरा झटका
महंगाई दर में बढ़ोतरी का मुख्य कारण इस साल हुई असंतुलित बारिश है, जिसने खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं। भारतीय परिवार अपने कुल बजट का 40% से अधिक हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं, इसलिए खाद्य कीमतों में उछाल सीधे उनके घरेलू बजट को प्रभावित करता है। यद्यपि अब तक खुदरा महंगाई RBI के 2% से 6% के दायरे के भीतर बनी हुई है, लेकिन इसका 4% के मध्यवर्ती लक्ष्य से ऊपर जाना नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा रहा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य आर्थिक सलाहकार कनिका पसरीचा के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में तेजी जारी है। इसके साथ ही ईंधन की बढ़ती कीमतों ने भी खुदरा महंगाई पर दबाव बनाया है। तेल कंपनियों ने मई महीने के दौरान पेट्रोल और डीजल की दरों में चार बार बढ़ोतरी की थी, जिससे परिवहन और आपूर्ति लागत में इजाफा हुआ।
40 अर्थशास्त्रियों के सर्वे के आंकड़े और थोक महंगाई का दबाव
लगभग 40 अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि जुलाई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.50% तक पहुंच सकती है, जो जून के महीने में 4.38% दर्ज की गई थी। केंद्र सरकार इन खुदरा आंकड़ों को आधिकारिक तौर पर 12 अगस्त को जारी करने वाली है। खुदरा महंगाई के साथ-साथ थोक महंगाई दर के आंकड़े भी चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। सर्वे के अनुमान के मुताबिक, जुलाई में थोक महंगाई दर 9.95% पर रहने की आशंका है। थोक और खुदरा दोनों मोर्चों पर कीमतों का यह दबाव अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर रहा है।
कर्ज की EMI और ब्याज दरों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
आरंभ में RBI ने खुदरा महंगाई 5.10% रहने का अनुमान लगाया था, जिसे बाद में संशोधित करके 5% के आसपास रखा गया है। हालांकि, अगर महंगाई दर लगातार 4% के लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक के पास रेपो रेट में बढ़ोतरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। यदि मानसून और वैश्विक कारणों से भोजन और ईंधन की लागत में नरमी नहीं आती, तो आने वाले समय में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ना स्वाभाविक है, जिससे आम जनता पर EMI का बोझ और बढ़ जाएगा।



















