अगर आप सिनेमाघरों में एक मनोरंजक गेमिंग अनुभव तलाश रहे हैं, तो यह स्ट्रीट फाइटर रिव्यू आपके लिए यह समझना आसान बना देगा कि नई फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है। साल 1994 के असफल सिनेमाई रूपांतरण और प्रतिद्वंद्वी फ्रेंचाइजी मॉर्टल कॉम्बैट की हालिया प्रस्तुतियों के बाद शायद ही कोई दूसरी स्ट्रीट फाइटर फिल्म का इंतजार कर रहा था। इसके बावजूद पर्दे पर आग के गोले बरसाती और ताकतवर किरदारों से सजी यह फिल्म अप्रत्याशित रूप से काफी मजेदार साबित होती है।
कॉमेडी के साथ वीडियो गेम की दुनिया को नया अंदाज
इस रूपांतरण में वीडियो गेम के सभी जाने-पहचाने चेहरे, उनके खास मूव्स, छोटे कपड़े और अनोखे हेयरस्टाइल पूरी तरह मौजूद हैं। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी निर्देशक किताओ साकुराई की समझ है, जो इस गेम के प्रति गहरा लगाव रखते हुए भी कहानी को जरूरत से ज्यादा गंभीर नहीं बनाते। कॉमेडी पृष्ठभूमि से आने का फायदा निर्देशक को बखूबी मिला है। उन्होंने दुनिया खत्म होने जैसे बड़े खतरे के बीच बेहद अजीबोगरीब किरदारों और चतुराई भरी कॉमिक टाइमिंग को पिरोकर पारंपरिक एक्शन के सांचे को तोड़ा है।
रयू और केन की वापसी से बंधी कहानी
कहानी का मुख्य केंद्र दर्शकों के पसंदीदा पात्र रयू और केन बनते हैं, जिनकी भूमिका क्रमशः एंड्रयू कोजी और नूह सेंटीनेओ ने निभाई है। एनीमे शैली वाले फ्लैशबैक में दिखाया गया है कि रयू ने 1987 का पिछला स्ट्रीट फाइटर टूर्नामेंट जीता था, मगर इसके लिए उसे अपने भीतर के असल राक्षसों के आगे झुकना पड़ा था। इस घटना के बाद से वह आत्म-निर्वासन में जी रहा है, जबकि केन अब असली लड़ाई छोड़कर महज दिखावे का फाइटर बन चुका है। लगभग एक घंटे की शुरुआती पृष्ठभूमि के बाद दोनों को 1993 के नए टूर्नामेंट के लिए बुलाया जाता है, जिसका आयोजन बेहद कुटिल खलनायक लॉर्ड एम बाइसन कर रहा है। बाइसन के रूप में डेविड डस्टमाल्चियन ने गजब का तीखा और व्यंग्यात्मक अभिनय पेश किया है।
शानदार सहायक कलाकार और सटीक एक्शन सीन
बाकी लड़ाकों को भी कहानी में भरपूर जगह मिली है। कैलीना लियांग ने एक अंडरकवर एजेंट चुन ली का किरदार निभाया है, जो रयू की तरह ही गुप्त मिशन पर काम करती है। प्रसिद्ध रैपर 50 सेंट मुक्केबाज बालरोग की भूमिका में दिखते हैं। जेसन मोमोआ द्वारा निभाया गया ब्लांका कानूनी अड़चनों के कारण हल्क तो नहीं बन सका, लेकिन उसकी शारीरिक बनावट उसी स्तर की नजर आती है। कोडी रोड्स ने गाइल की भूमिका में अपने अजीब हेयरस्टाइल के साथ-साथ बेहद मजेदार संवाद अदायगी की है। साकुराई ने लड़ाइयों को संक्षिप्त और प्रभावशाली रखा है, जहां हर फाइट अपनी अलग पहचान बनाती है। भारी-भरकम सीजीआई की जगह कलाकारों के बीच असली शारीरिक संपर्क दिखता है, जिससे फाइट सीन वास्तविक मार्शल आर्ट्स जैसे महसूस होते हैं।
कहानी की उलझनें और अंतिम फैसला
फिल्म में जरूरत से ज्यादा उप-कथानक जोड़े गए हैं और अंत में सीक्वल के लिए खुला इशारा थोड़ा अखरता है। वैकल्पिक दुनिया में समय की कुछ गलतियां भी साफ नजर आती हैं, जैसे 4 नॉन ब्लोंड्स का जो गाना 1987 के दृश्य में सुनाई देता है, वह असल में 1993 तक रिलीज ही नहीं हुआ था। इसके बावजूद फिल्म लगातार होने वाले धमाकों के बीच हंसी के छोटे-छोटे पलों से ताजगी बनाए रखती है। कम उम्मीदों के साथ थिएटर जाने पर दर्शकों को बेहतरीन एक्शन और जोरदार हंसी का शानदार तोहफा मिलता है।



















