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इन द हैंड ऑफ डांटे रिव्यू (2026): जूलियन श्नैबल की दिखावटी और थकाऊ चूकमूवी रिव्यू
26 जून 2026, 4:24 am (33 दिन पहले)· 3

इन द हैंड ऑफ डांटे रिव्यू (2026): जूलियन श्नैबल की दिखावटी और थकाऊ चूक

जूलियन श्नैबल की नई फिल्म 'इन द हैंड ऑफ डांटे' दो टाइमलाइन और बड़े सितारों के बावजूद ढाई घंटे की उबाऊ और दिखावटी कोशिश बनकर रह जाती है, जिसमें ऑस्कर आइजैक दोहरी भूमिका में हैं।

कुछ फिल्में महान कला की ऊंचाई छूने का सपना देखती हैं और मुंह के बल गिर जाती हैं। एक लाइन में इन द हैंड ऑफ डांटे रिव्यू यही है, यह डायरेक्टर जूलियन श्नैबल की एक अजीब और खुद को ही हराने वाली कोशिश है। यही वो फिल्मकार हैं जो पहले असली भावनात्मक गहराई तक पहुंच चुके हैं। लॉक्ड इन सिंड्रोम पर बनी उनकी फिल्म 'द डाइविंग बेल एंड द बटरफ्लाई' और विन्सेंट वैन गॉग पर बनी 'एट इटर्निटीज़ गेट', दोनों ने कुछ सचमुच गहरा छुआ था। यह फिल्म उल्टा करती है, और लगभग हर मोड़ पर दिखावटी और गलत अंदाज़े वाली साबित होती है।

दो दौर, एक खिंची हुई सोच

कहानी दो समानांतर टाइमलाइन में चलती है। ऑस्कर आइजैक केंद्र में दो किरदार निभाते हैं, 14वीं सदी के कवि डांटे अलीघिएरी, जो 'डिवाइन कॉमेडी' के लिए मशहूर हैं, और न्यूयॉर्क के असल जीवन के 'साहित्यिक बागी' निक टॉश्स। आज के दौर वाला हिस्सा साफ-सुथरे ब्लैक एंड व्हाइट में फिल्माया गया है, जबकि अतीत के फ्लैशबैक चटक और लगभग कार्टून जैसे रंगों में रंगे हैं। फिल्म टॉश्स के 2002 के उसी नाम के विशाल और महत्वाकांक्षी उपन्यास पर आधारित है, जिसमें टॉश्स ने खुद को एक अर्ध-काल्पनिक नायक के रूप में पेश किया था।

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आधुनिक धागे में, टॉश्स अपने एक पुराने दोस्त से एक काम लेते हैं, डांटे की 'द डिवाइन कॉमेडी' की एक दुर्लभ प्रति चुराना, और यही काम उन्हें माफिया की दुनिया तक खींच ले जाता है। उधर 1300 के दशक में डांटे अपनी आध्यात्मिक और रचनात्मक जिंदगी से जूझते दिखते हैं, लेकिन फिल्म इसे इतने भारी आडंबर के साथ पेश करती है कि यह अनजाने में ही हास्यास्पद बन जाता है।

सितारों से भरी कास्ट, फिर भी ज्यादातर बेमेल

'क्लाउड एटलस' वाला नुस्खा अपनाते हुए, यानी एक कलाकार और कई चेहरे, कई अदाकार दोनों दौर में दोहरी भूमिकाएं निभाते हैं। गैल गैडोट, लुई कैंसेलमी और जेरार्ड बटलर सभी दो-दो किरदारों में हैं, और बटलर तो एक बेहद क्रूर माफिया गुर्गे और साथ ही पोप, दोनों के रूप में नज़र आते हैं। मार्टिन स्कॉर्सेसे भी एक विशाल दाढ़ी के साथ डांटे के गुरु की एक उलझन भरी छोटी भूमिका में आ टपकते हैं। पर सच यह है कि यह सब सुनने में जितना मज़ेदार लगता है, परदे पर उसका आधा भी नहीं है। लगभग हर कलाकार बुरी तरह बेमेल लगता है।

श्नैबल का अंदाज़ और रवैया एक तरफ हद से ज्यादा खुद को बड़ा समझने वाला है, और दूसरी तरफ इस बात को लेकर बुरी तरह उलझा हुआ कि आखिर वह कहना क्या चाहता है।

कहीं-कहीं खूबसूरत, पर पूरी तरह नीरस

इरादा साफ दिखता है, पुनर्जागरण काल की महाकाव्य कविता जैसी कोई भव्य चीज़ गढ़ना, कला पर बनी एक आडंबरपूर्ण और मेटा-फिक्शनल कलाकृति। हां, बीच-बीच में फिल्म देखने में सुंदर ज़रूर लगती है। लेकिन ज्यादातर वक्त यह बस बहुत लंबी और बहुत उबाऊ है। 'मेरी किताबों को उतना ही एडिट किया जा सकता है जितना किसी तेंदुए का मैनीक्योर,' निक फिल्म की शुरुआत में ही ऐलान करते हैं। इस बात का व्यंग्य छिपा नहीं रहता, क्योंकि एडिटिंग टेबल पर थोड़ी सख्ती बरती जाती तो इस ढाई घंटे की दिखावटी कोशिश को कम से कम देखने लायक कुछ बनाया जा सकता था।

सवाल-जवाब

इन द हैंड ऑफ डांटे के डायरेक्टर कौन हैं?
इस फिल्म का निर्देशन जूलियन श्नैबल ने किया है, जो पहले 'द डाइविंग बेल एंड द बटरफ्लाई' और 'एट इटर्निटीज़ गेट' बना चुके हैं।
क्या इन द हैंड ऑफ डांटे देखने लायक है?
इस रिव्यू के मुताबिक नहीं, क्योंकि बीच-बीच में सुंदर दिखने के बावजूद फिल्म ज्यादातर बहुत लंबी और उबाऊ है।
फिल्म में मुख्य कलाकार कौन हैं?
ऑस्कर आइजैक डांटे अलीघिएरी और निक टॉश्स दोनों की भूमिका में हैं, और इसके साथ गैल गैडोट, लुई कैंसेलमी, जेरार्ड बटलर तथा मार्टिन स्कॉर्सेसे का कैमियो भी है।
फिल्म किस पर आधारित है?
यह निक टॉश्स के 2002 के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है, जिसमें टॉश्स खुद एक अर्ध-काल्पनिक नायक के रूप में मौजूद हैं।
जेरार्ड बटलर कौन-सा किरदार निभाते हैं?
वह दोहरी भूमिका में हैं, एक क्रूर और हत्यारे माफिया गुर्गे के रूप में और साथ ही पोप के रूप में।
फिल्म कितनी लंबी है?
फिल्म की लंबाई करीब ढाई घंटे है।
इन द हैंड ऑफ डांटे जैसी और कौन-सी फिल्में हैं?
यह 'क्लाउड एटलस' वाला तरीका अपनाती है, जहां एक ही कलाकार दो टाइमलाइन में कई किरदार निभाता है।
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