यदि आप एक नई स्पोर्ट्स कॉमेडी की तलाश में हैं, तो यह टेड लासो सीजन 4 रिव्यू आपको यह समझने में मदद करेगा कि यह नया सीजन पुराने जादू को वापस लाने में क्यों संघर्ष कर रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की शुरुआती होड़ के समय एप्पल टीवी को अपनी पहचान बनाने के लिए एक बड़े हिट शो की सख्त जरूरत थी। उस दौर में शुरू हुए सर्वेंट और कारपूल कराओके: द सीरीज जैसे भारी-भरकम बजट वाले प्रोजेक्ट्स आम दर्शकों के बीच वो हलचल नहीं मचा सके जिसकी उम्मीद की जा रही थी। ऐसे समय में रिचमंड एफसी नाम के एक काल्पनिक फुटबॉल क्लब और उसके प्रेरक अमेरिकी कोच की कहानी लेकर आए टेड लासो शो ने एप्पल प्लेटफॉर्म की किस्मत बदल दी और दुनिया भर के दर्शकों का दिल जीत लिया।
सफलता के शिखर से अचानक विदाई और फिर वापसी का फैसला
इस शो ने न केवल बेहतरीन समीक्षाएं और व्यापारिक सफलता हासिल की, बल्कि हन्ना वडिंगहैम और ब्रेट गोल्डस्टीन जैसे कलाकारों को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। डैड जोक्स यानी सीधी-सादी पारिवारिक कॉमेडी को इस सीरीज ने एक नए कलात्मक स्तर पर पहुंचाया था। हालांकि, तीसरे सीजन में इसकी चमक थोड़ी फीकी पड़ने लगी थी। नेट्स के किरदार के बदलाव को जिस तरह सुलझाया गया और क्रिसमस स्पेशल एपिसोड में जिस तरह की अत्यधिक मिठास घोलने की कोशिश हुई, उससे कहानी की कसावट ढीली पड़ी। इसके बावजूद, 34 एपिसोड के बाद अचानक शो को बंद कर देने का फैसला हर किसी को हैरान कर गया था, जहां मुख्य किरदार टेड अपने बेटे के साथ समय बिताने के लिए अमेरिका के मिसौरी लौट गया था। अब तीन साल बाद चौथे सीजन में कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां टेड मिसौरी के एक स्टोर में सामान सजा रहा है। लेकिन रिचमंड वापस लौटने की उसकी राह इतनी आसानी से साफ हो जाती है कि पुरानी विदाई का निर्णय बेहद कमजोर लगने लगता है।
महिला फुटबॉल के चित्रण में चूक और कमजोर किरदार
चौथे सीजन में टेड को रिचमंड की नई महिला फुटबॉल टीम का कोच बनाकर भेजा जाता है। इस मोड़ पर सीरीज के पास महिला खेलों से जुड़े सामाजिक भेदभाव और चुनौतियों को गहराई से दिखाने का बेहतरीन मौका था, लेकिन शो खुद उसी गलती का शिकार हो जाता है। आज के दौर में जब ब्रिटेन की महिला फुटबॉल टीम लायनेसेस यूरोपीय चैंपियन बन चुकी है और देश की नायक मानी जाती है, तब शो में महिला फुटबॉल पर किए गए मजाक पुराने और गैर-जरूरी लगते हैं। टेड द्वारा प्रशिक्षित की जा रही नई महिला टीम को बेहद बचकाने और नौसिखिए खिलाड़ियों के रूप में दिखाया गया है, जो पहले सीजन की पुरुष टीम की प्रतिभा के सामने बिल्कुल टिकती नहीं है। वहीं पुरुष टीम के कोच बने रॉय केन्ट यानी ब्रेट गोल्डस्टीन को अधिकतर समय स्क्रीन से दूर रखा गया है, जो कलाकारों की उपलब्धता से जुड़ी सीमाओं की ओर इशारा करता है। नई सह-कोच एलिस चिल्टन के रूप में तान्या रेनॉल्ड्स की एंट्री होती है, लेकिन उनके किरदार को सिर्फ एक सनकी व्यक्ति के रूप में ही पेश किया गया है।
सुस्त सब-प्लॉट्स और नॉस्टैल्जिया का जबरन सहारा
शो के बाकी मुख्य पात्रों की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है। हन्ना वडिंगहैम का रेबेका वाला दमदार किरदार एक पायलट के साथ बिना किसी खास रोमांच के प्रेम कहानी में उलझकर रह गया है। वहीं कीली का किरदार मार्केटिंग की समस्याओं को बेहद बचकाने तरीके से सुलझाता दिखता है और रॉय के साथ उसका ऑन-ऑफ रिश्ता पुराने ब्रेकअप की कमजोरियों को ही उजागर करता है। किसी भी लाइट-हार्टेड कॉमेडी शो की राजनीतिक या नाटकीय कमियों को दर्शक तब तक नजरअंदाज कर सकते हैं जब तक कि हंसी का सिलसिला बना रहे। लेकिन चौथे सीजन में पुरानी सफलता को भुनाने की जल्दबाजी इतनी साफ झलकती है कि हास्य का असर खत्म हो जाता है। जो शो कभी अपनी स्वाभाविकता और गर्मजोशी के लिए जाना जाता था, वह अब सिर्फ पुराने दिनों की याद दिलाकर चलने की कोशिश करता दिखता है।


















