नागालैंड के स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की क्षमता और गुणवत्ता को परखने के लिए एक नई पायलट योजना की शुरुआत की है। इस योजना का मकसद केवल परीक्षा नतीजों के आधार पर प्रदर्शन का आकलन करने की पुरानी व्यवस्था को बदलना है। इसके तहत कोहिमा जिले के 114 सरकारी स्कूलों को शामिल किया गया है। विधायक और स्कूल शिक्षा सलाहकार डॉ केख्रिएलहोली योम ने कोहिमा स्थित कैपिटल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस विशेष पहल का औपचारिक शुभारंभ किया।
मिशन सोअर और स्टेला फ्रेमवर्क का खाका
यह आंकलन पहल नागालैंड शिक्षा विभाग के प्रमुख सुधार कार्यक्रम 'मिशन सोअर' के तहत एलिवेट फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जा रही है। इस पूरी मूल्यांकन व्यवस्था को 'स्कूल ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू एक्सीलेंस इन लर्निंग एंड लीडरशिप असेसमेंट' (स्टेला) का नाम दिया गया है। स्टेला के माध्यम से स्कूलों को सटीक डेटा उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे अपनी कमियों की पहचान कर सकेंगे और सुधार के लिए जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दे सकेंगे।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान भाग ले रहे स्कूलों के प्राचार्यों और निगरानी अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। मुंबई स्थित शैक्षणिक संस्थान 'शिखा अकादमी' ने इस प्रशिक्षण सत्र का संचालन किया। अकादमी के विशेषज्ञों ने स्कूल प्रमुखों को मूल्यांकन ढांचे, विभिन्न पैमानों, डेटा संग्रह प्रक्रिया और मिलने वाले आंकड़ों के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से समझाया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शैक्षणिक बदलाव
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ केख्रिएलहोली योम ने कहा कि किसी भी स्कूल की गुणवत्ता का फैसला सिर्फ परीक्षा परिणामों से नहीं होना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल के कामकाज के तमाम पहलुओं को मूल्यांकन प्रक्रिया में जगह मिलना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने गूगल के साथ 100 मिलियन रुपये का एक समझौता (MoU) किया है। राज्य की योजना कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से वैश्विक आईटी कंपनियों को नागालैंड के शिक्षा क्षेत्र से जोड़ने की है।
डिजिटल प्रणाली और राष्ट्रीय मानकों से जुड़ाव
स्टेला प्रणाली के तहत सभी 114 स्कूल एक विशेष डिजिटल माध्यम के जरिए अपना विवरण और आंकड़े जमा करेंगे। इसके बाद एल्गोरिदम की मदद से इस डेटा का विश्लेषण और स्कोरिंग की जाएगी। तैयार नतीजों को एक केंद्रीय वेब पोर्टल पर साझा किया जाएगा, जहां से स्कूल प्रशासन और राज्य के शिक्षा अधिकारी आसानी से रिपोर्ट देख सकेंगे।
यह मूल्यांकन ढांचा राष्ट्रीय स्तर के 'परख' स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एश्योरेंस फ्रेमवर्क (एसक्यूएएएफ) के मानकों के अनुकूल तैयार किया गया है। इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के मानकों से जोड़ना आसान हो जाएगा। कोहिमा में शुरू हुआ यह प्रयोग न केवल स्कूलों का शुरुआती स्कोर तय करेगा, बल्कि अधिकारियों की कार्यकुशलता की जांच करने और भविष्य में पूरे राज्य में इसे लागू करने से पहले व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद करेगा।



















