नगालैंड में उग्रवाद से जुड़ी हिंसा के आंकड़े अब पहले जैसे नहीं रहे, यह बात मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने शुक्रवार को विधानसभा में कही। उन्होंने कहा कि राज्य अब देश के बाकी हिस्सों और दुनिया से पहले से कहीं बेहतर तरीके से जुड़ चुका है।
1963 से अब तक का सफर
कोहिमा में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान एक चर्चा में बोलते हुए रियो ने बताया कि 1963 में राज्य बनने के बाद से नगालैंड ने शांति, संपर्क और विकास के मोर्चे पर धीरे-धीरे मगर लगातार तरक्की की है।
257 घटनाओं से घटकर सिर्फ आठ
मुख्यमंत्री ने दो अलग-अलग दौर के आंकड़े रखे। 2021 से 2026 के बीच हथियारबंद भूमिगत गुटों से जुड़ी सिर्फ आठ घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें चार कैडर और आम नागरिकों की जान गई, जबकि एक सुरक्षाकर्मी भी शहीद हुआ। इसके उलट 2004 से 2009 के बीच ऐसी 257 से ज्यादा घटनाएं हुई थीं, जिनकी बड़ी वजह प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच आपसी झड़पें थीं। इस दौर में 120 से ज्यादा कैडर और आम लोग मारे गए थे, वहीं छह सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हुई थी। रियो के मुताबिक ये आंकड़े बताते हैं कि नगालैंड ने हिंसा और अस्थिरता के लंबे दौर से निकलकर शांति की तरफ कितना मुश्किल सफर तय किया है।
अपराध के आंकड़े भी गवाही देते हैं
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2024 के आंकड़ों का हवाला दिया। इस साल नगालैंड में संज्ञेय अपराध दर प्रति लाख आबादी पर 61.6 मामले रही, जो दादरा और नगर हवेली के बाद देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दूसरी सबसे कम दर है। इसकी तुलना में पूरे देश की औसत दर 418.8 मामले प्रति लाख आबादी रही, यानी नगालैंड से करीब सात गुना ज्यादा। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में भी यही तस्वीर दिखी, नगालैंड में यह दर 5.1 प्रति लाख आबादी रही जबकि राष्ट्रीय दर 64.6 है।
क्या कहते हैं ये नंबर
रियो का कहना था कि भूमिगत गुटों से जुड़ी घटनाओं में गिरावट और अपेक्षाकृत कम अपराध दर दोनों मिलकर बताते हैं कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है, जिससे नगालैंड में विकास के लिए ज्यादा अनुकूल माहौल बन रहा है।



















