नागालैंड अब देश का तीसरा सबसे साक्षर राज्य बन गया है और राज्य की साक्षरता दर 95.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह जानकारी शिक्षा एवं एससीईआरटी सलाहकार डॉ. केखरीलहौली येहोमे ने शनिवार को कोहिमा के लोकल ग्राउंड में आयोजित राज्य-स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह में दी।
राज्य बनने के बाद जबरदस्त बदलाव
येहोमे ने बताया कि 1963 में जब नागालैंड को राज्य का दर्जा मिला था, तब यहां की साक्षरता दर महज 21.95 प्रतिशत थी, जो उस समय इसे देश के सबसे कम साक्षर इलाकों में शामिल करती थी। छह दशक से ज्यादा वक्त बीतने के बाद अब राज्य की साक्षरता दर 95.7 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जिससे यह देश में केरल और मिजोरम के बाद तीसरे स्थान पर आ गया है। उन्होंने इसे एक अपेक्षाकृत युवा समाज के लिए बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि यह शिक्षकों की लगातार कई पीढ़ियों की मेहनत के बिना संभव नहीं होता।
शिक्षकों को दिया श्रेय
येहोमे ने शिक्षकों का आभार जताया कि उन्होंने छात्रों की ज़िंदगी संवारने के साथ-साथ ऐसे मूल्य और सीख दी जो स्कूली जीवन के बाद भी उनके साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि नागालैंड में फिलहाल सरकारी और निजी स्कूलों में कुल 32,714 शिक्षक कार्यरत हैं, और कहा कि राज्य की मुश्किल भौगोलिक बनावट और चुनौतीपूर्ण कामकाजी हालात को देखते हुए उनका योगदान खासतौर पर उल्लेखनीय है। शिक्षण को सबसे नेक पेशों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक अक्सर अपने छात्रों के प्रति वही स्नेह, चिंता और प्रतिबद्धता दिखाते हैं जो वे अपने बच्चों के लिए दिखाते हैं।
आगे की राह के लिए तीन प्राथमिकताएं
येहोमे ने बताया कि राज्य सरकार अब समूची स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए तीन मुख्य क्षेत्रों, इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन और पाठ्यक्रम पर काम कर रही है। उन्होंने माना कि नागालैंड के सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों में अब भी बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कुछ स्कूलों में तो शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं, जिससे खासकर छात्राओं को दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग विकास परियोजनाओं के जरिए इन कमियों को धीरे-धीरे दूर करने की योजना बना रही है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण और बेहतर प्रबंधन पर जोर
येहोमे के मुताबिक दूसरा फोकस क्षेत्र मानव संसाधन को मजबूत करना होगा, जिसके तहत शिक्षकों का बेहतर प्रशिक्षण, कर्मचारियों का बेहतर प्रबंधन और स्कूलों तथा फील्ड दफ्तरों के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जाएगा। इसके साथ ही सरकार प्रशासन और गवर्नेंस को भी बेहतर बनाने की योजना बना रही है, और एक मजबूत स्कूल फीडर सिस्टम के जरिए छात्रों के लिए शिक्षा को और व्यक्तिगत बनाने पर भी काम करेगी।
अगली पीढ़ी के लिए नया पाठ्यक्रम
तीसरा और, येहोमे के मुताबिक शायद सबसे अहम, पहलू पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार करना और पढ़ाई के नए-नए तरीके अपनाना है, ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम एक विश्व स्तरीय शिक्षा व्यवस्था खड़ी की जा सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को लगातार खुद को बदलते रहना होगा ताकि जेनरेशन ज़ेड, जेनरेशन अल्फा और आने वाली पीढ़ियों को तेज़ी से बदलती दुनिया के लिए तैयार किया जा सके, और छात्रों को 21वीं सदी में जरूरी कौशल सिखाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा सके।



















