विश्व सिनेमा के सबसे बड़े मंचों में शुमार टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 में भारतीय सिनेमा ने एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड के फिल्मकार थेजा रियो के निर्देशन में तैयार पहली पूर्ण लंबाई वाली फीचर फिल्म 'आंग' ने उत्सव की सबसे प्रतिष्ठित प्रतिस्पर्धी श्रेणी प्लेटफॉर्म प्रतियोगिता में शीर्ष पुरस्कार जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। इस महत्वपूर्ण जीत के साथ ही इस रचना ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले 99वें अकादमी पुरस्कारों के अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म वर्ग में सीधे विचार किए जाने की पात्रता भी हासिल कर ली है।
टोरंटो में स्वतंत्र और विशिष्ट सिनेमा का परचम
टोरंटो फिल्म उत्सव का प्लेटफॉर्म वर्ग वैश्विक स्तर पर अपने मुखर और मौलिक सिनेमाई दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। यह खंड विशेष रूप से ऐसे निर्देशकों के काम को रेखांकित करता है जिनकी शैली साहसिक, स्वतंत्र और पारंपरिक ढांचे से अलग होती है। इस वर्ष के पूरे आयोजन में भारत की तरफ से प्लेटफॉर्म प्रतियोगिता के आधिकारिक चयन में जगह बनाने वाली 'आंग' एकमात्र प्रविष्टि थी। जब इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर उत्सव के विशाल पर्दे पर हुआ, तब दर्शकों ने इसके शांत शिल्प, आत्मिक गहराई और विलुप्त होती जीवनशैली के मार्मिक चित्रण की जमकर सराहना की।
निदेशक का अनुभव और भावनात्मक जुड़ाव
अपनी पहली ही फीचर फिल्म के इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुरस्कृत होने के बाद निर्देशक थेजा रियो ने अपनी गहरी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि किसी नवागंतुक निर्देशक के पहले प्रयास को दुनिया के इतने बड़े मंच पर स्वीकार्यता मिलना अत्यंत दुर्लभ क्षण है। थेजा रियो ने कहा,
“हमने आंग को अपने मूल स्थान, अपने लोगों और अपनी अनूठी संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम के साथ रचा है।”
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भले ही फिल्म का धरातल नागा पहाड़ियों में रचा गया हो, मगर इसके केंद्र में एक पिता और उसके बेटे का संवेदनशील रिश्ता है। यह कहानी बिछोह, पैतृक आवास से मनुष्य के गहरे जुड़ाव और नश्वर जीवन के क्षणभंगुर स्वभाव को सामने लाती है। निर्देशक के अनुसार, ये ऐसे सार्वभौमिक मानवीय भाव हैं जो किसी भी सीमा या भाषा के पार हर व्यक्ति के दिल को छूते हैं। उन्होंने जूरी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि टोरंटो से लेकर ऑस्कर के गलियारों तक अपने देश और मूल संस्कृति का प्रतिनिधित्व करना बेहद गर्व का विषय है।
लंबे संघर्ष और सहभागिता की जीत
फिल्म का निर्माण नैन्सी निसा बेसो और थेजा रियो ने मिलकर किया है। इस यात्रा के पीछे एक लंबी रचनात्मक तपस्या जुड़ी हुई है। निर्माता नैन्सी निसा बेसो ने याद किया कि उन्होंने और थेजा ने पहले इस विचार को एक लघु फिल्म के रूप में गढ़ा था, जिसे कई वर्षों की अनथक मेहनत के बाद एक मुकम्मल फीचर फिल्म का रूप दिया गया। उनका दृढ़ संकल्प था कि इस लोकगाथा को बिना किसी समझौते के अपने मौलिक स्वरूप में ही वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाए।
नैन्सी निसा बेसो ने बताया कि इस लंबी प्रक्रिया के दौरान अनगिनत ऐसे कठिन मोड़ आए जब संसाधनों की कमी और अन्य बाधाओं के कारण परियोजना का पूरा होना लगभग असंभव नजर आता था। उस अनिश्चित दौर में भी उन तमाम शुभचिंतकों, तकनीशियनों और कलाकारों ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी जिन्होंने इस कहानी की सच्चाई पर अटूट भरोसा जताया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस अंतरराष्ट्रीय सफलता से दूरदराज के अंचलों और स्थानीय भाषाओं में अपनी माटी की दास्तान कहने वाले स्वतंत्र रचनाकारों को एक नया हौसला मिलेगा।
वैश्विक वितरण और स्वतंत्र सिनेमा को नई ताकत
फिल्म के अंतरराष्ट्रीय और घरेलू वितरण की जिम्मेदारी जंगल बुक स्टूडियो संभाल रहा है, जिसने टोरंटो प्रीमियर से पूर्व ही इसके अंतरराष्ट्रीय बिक्री अधिकार सुरक्षित कर लिए थे। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर गौरव ढींगरा ने कहा कि यह पल केवल एक सामान्य फिल्म की जीत से कहीं बढ़कर है। गौरव ढींगरा ने कहा,
“नागालैंड की धरती पर वहां के स्थानीय कलाकारों द्वारा अपनी शर्तों पर बनाई गई ऐसी दुर्लभ कहानी को वैश्विक मान्यता मिलना स्वतंत्र सिनेमा के लिए गर्व की बात है।”
पेडलर्स, फेथ कनेक्शंस, एंग्री इंडियन गॉडेसेज और स्टोलन जैसी मौलिक कृतियों के निर्माण में पच्चीस वर्षों का अनुभव रखने वाले गौरव ढींगरा ने रेखांकित किया कि सबसे प्रभावशाली सिनेमा हमेशा वास्तविक जड़ों से जन्म लेता है। उन्होंने कहा कि जंगल बुक स्टूडियो के वैश्विक वितरण अभियान की शुरुआत के लिए 'आंग' से बेहतर कोई माध्यम नहीं हो सकता था। यदि इस यात्रा से किसी नए फिल्मकार को अपनी स्थानीय आवाज को खुलकर व्यक्त करने की प्रेरणा मिलती है, तो इसका असल प्रभाव इस पुरस्कार की सीमाओं से भी कहीं आगे जाएगा।
कथानक, 16एमएम फॉर्मेट और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
फिल्म की कथाभूमि 1960 के दशक के नागालैंड के अत्यंत संवेदनशील और उथल-पुथल भरे सामाजिक परिवेश पर आधारित है। यह कहानी कोन्याक समुदाय के एक बुजुर्ग ग्राम मुखिया और उनके युवा बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है। यह वह दौर था जब पूरा क्षेत्र व्यापक बदलावों से गुजर रहा था और यह पिता-पुत्र उन गिने-चुने लोगों में बचे थे जो अपने पूर्वजों की सदियों पुरानी आस्था, जीवन दर्शन और रीति-रिवाजों को थामे हुए थे।
सिनेमाई बनावट की दृष्टि से 'आंग' को डिजिटल कैमरों की जगह 16एमएम सेल्यूलॉयड रील पर शूट किया गया है, जो दृश्य-पटल पर उस बीते युग की वास्तविक बनावट और गहरा देहाती अहसास उतारती है। फिल्म में स्थानीय नागा कलाकारों के साथ-साथ बाफ्टा विजेता ब्रिटिश अभिनेता डगलस हेनशॉल ने भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपनी इस अनोखी संरचना के जरिए यह रचना परंपरा, आस्था, परिवार, स्मृति और सांस्कृतिक संक्रमण के अंतर्द्वंद्व को अत्यंत संजीदगी से पर्दे पर जीवंत करती है।



















