उदयपुर शहर की पुरानी गलियों और इमारतों के बीच इतिहास का एक ऐसा अध्याय मौजूद है, जिसके बारे में स्थानीय आबादी का भी एक बड़ा तबका अनजान है। महाराणा सज्जन सिंह राजकीय मुद्रणालय एक ऐसा ही ऐतिहासिक केंद्र है, जो कभी मेवाड़ रियासत के संपूर्ण प्रशासनिक संचार और लिखित व्यवस्था की रीढ़ माना जाता था। करीब डेढ़ सौ साल पुराना यह मुद्रणालय आज भी अपने गौरवशाली अतीत को सहेजे खड़ा है। इसी मुद्रणालय में मेवाड़ रियासत का सबसे पहला कैलेंडर मुद्रित किया गया था, जिसने उस दौर में तारीखों के साथ पंचांग और राजकीय व्यवस्था को आम लोगों तक पहुंचाया था।
1881 में महाराणा सज्जन सिंह ने रखी थी मुद्रणालय की नींव
इस ऐतिहासिक राजकीय मुद्रणालय की स्थापना साल 1881 में तत्कालीन शासक महाराणा सज्जन सिंह के शासनकाल के दौरान की गई थी। उस जमाने में आज की भांति कंप्यूटर, डिजिटल स्क्रीन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का कोई अस्तित्व नहीं था। सरकारी आदेशों, गजट, घोषणाओं, सार्वजनिक सूचनाओं और जरूरी पत्राचार को तैयार करने का एकमात्र विश्वसनीय माध्यम प्रिंटिंग प्रेस ही हुआ करता था। इसी जरूरत को समझते हुए मेवाड़ के शासन तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए इस मुद्रणालय को स्थापित किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर लिखित व्यवस्था को मजबूती देने में इस संस्थान का योगदान बेहद ऐतिहासिक रहा।
मेवाड़ का पहला कैलेंडर और प्रशासनिक दस्तावेजों की छपाई
इतिहासविद् कौशल मूंदड़ा के अनुसार, महाराणा सज्जन सिंह के दौर में उदयपुर में प्रशासनिक तंत्र को आधुनिक और संगठित रूप देने के व्यापक प्रयास चल रहे थे। उसी प्रशासनिक सुधार की कड़ी के तौर पर इस राजकीय मुद्रणालय ने काम करना शुरू किया। यहां मेवाड़ राज्य के सभी जरूरी दस्तावेज, फरमान, नीतियां और राजकीय सामग्री मुद्रित होती थी। इसी परिसर में रियासत का पहला औपचारिक कैलेंडर छापा गया था। उस समय का कैलेंडर सिर्फ दिन या महीना देखने की सामान्य तालिका नहीं था, बल्कि उसमें पंचांग, खगोलीय गणनाएं, महत्वपूर्ण धार्मिक और राजकीय तिथियां और अन्य उपयोगी जानकारियां दर्ज होती थीं। राजदरबार और प्रशासन से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने का यह सबसे सशक्त जरिया था।
डिजिटल युग में हाथ से छपाई की मेहनत का प्रतीक
उस दौर में किसी भी प्रशासनिक फैसले को लिखित दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने और प्रसारित करने के लिए प्रिंटिंग प्रेस का होना अनिवार्य था। इसलिए यह मुद्रणालय केवल कागजों की छपाई की जगह नहीं, बल्कि मेवाड़ के शासन संचालन का एक अभिन्न अंग बन चुका था। आज जब छपाई का सारा काम अत्यधिक आधुनिक मशीनों, कंप्यूटरों और डिजिटल तकनीकों से चुटकियों में हो जाता है, तब यह ऐतिहासिक इमारत उस कालखंड की याद दिलाती है जब एक-एक पन्ने के ब्लॉक जमाने और छपाई में घंटों की कड़ी मेहनत और समय लगता था।
उदयपुर की प्रशासनिक और तकनीकी धरोहर
उदयपुर की इस ऐतिहासिक धरोहर को मात्र एक पुरानी प्रिंटिंग प्रेस समझना सही नहीं होगा। यह इमारत मेवाड़ के तत्कालीन प्रशासनिक प्रबंधन, मुद्रण कला के आरंभिक दौर और 19वीं सदी के अंत की व्यवस्था का जीवंत दस्तावेज है। 1881 से शुरू हुई इस मुद्रणालय की यात्रा उदयपुर के उस स्वर्णिम प्रशासनिक काल की गवाही देती है, जब यहीं से निकले दस्तावेज पूरे मेवाड़ राज्य की व्यवस्था को संचालित करते थे।



















