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2027 की जनगणना में बड़ा बदलाव, अब भिखारियों का अलग से नहीं मिलेगा डेटा और जुड़ेगा नया नियमबिहार
25 अग॰ 2026, 10:41 am (31 दिन पहले)· 2

2027 की जनगणना में बड़ा बदलाव, अब भिखारियों का अलग से नहीं मिलेगा डेटा और जुड़ेगा नया नियम

आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 के नियमों में केंद्र सरकार ने बड़े बदलाव किए हैं। अब भिखारियों और खानाबदोशों का डेटा अलग श्रेणी में दर्ज नहीं होगा, जबकि माइग्रेशन के कारणों में प्राकृतिक आपदा का नया विकल्प शामिल किया गया है।

आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 के संचालन के तौर-तरीकों और नियमों में केंद्र सरकार ने कई बड़े संशोधन किए हैं, जिससे देश की जनसांख्यिकीय रिपोर्टिंग का स्वरूप काफी हद तक बदल जाएगा। इन बदलावों के तहत अब भीख मांगने वाले लोगों और खानाबदोश समुदायों का डेटा अलग से दर्ज करने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। सरकार ने ‘गैर-आर्थिक गतिविधियों’ की सूची में शामिल ‘भिखारी और घुमंतू’ की स्वतंत्र और विशिष्ट श्रेणी को पूरी तरह से हटा दिया है। पूर्व की जनगणनाओं के अनुभवों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, क्योंकि 2011 की पिछली जनगणना में इस श्रेणी के तहत बेहद कम संख्या में लोगों ने खुद को पंजीकृत कराया था, जो महज़ 3.8 लाख के करीब था। इस बार के संशोधन के बाद इन्हें किसी अलग और विशिष्ट वर्ग में रखने के बजाय सीधे तौर पर ‘अन्य’ की सामान्य श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप अब देश भर में भिखारियों की कुल संख्या, उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि, आयु वर्ग, शैक्षिक योग्यता या फिर राज्यवार आंकड़े अलग तालिकाओं के रूप में देखने को नहीं मिलेंगे।

जनसंख्या के विस्थापन और पलायन के रुझानों को अधिक सूक्ष्मता और सटीकता से समझने के लिए इस बार एक और अत्यंत महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है, जिसके तहत माइग्रेशन के कारणों की सूची में पहली बार ‘प्राकृतिक आपदा’ का एक नया विकल्प जोड़ा गया है। अब तक देश में लोगों द्वारा अपने मूल निवास स्थान, घर या शहर को छोड़ने के मुख्य कारणों में केवल काम धंधा, कारोबार, उच्च शिक्षा, विवाह, जन्म के बाद होने वाला स्थानांतरण या फिर परिवार के साथ जाने जैसे पारंपरिक विकल्प ही शामिल हुआ करते थे। लेकिन अब बाढ़, सूखा, भयानक लैंडस्लाइड और चक्रवातीय तूफानों जैसी प्राकृतिक विभीषिकाओं और आपदाओं के कारण अपना घरबार छोड़कर पलायन करने वाले नागरिकों का बिल्कुल सटीक और अलग से डेटा दर्ज किया जा सकेगा। नीति निर्माताओं का मानना है कि यह बदलाव भविष्य की आपदा प्रबंधन रणनीतियों और पुनर्वास नीतियों को और अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने में बहुत मददगार साबित होगा।

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वर्ष 2011 की जनगणना और उससे पहले के तमाम जनगणना अभियानों में ‘भीख मांगने वालों और खानाबदोश लोगों’ को विद्यार्थियों, घरेलू कामकाज संभालने वालों, आश्रितों, पेंशनभोगियों, किराया वसूलने वालों और अन्य समूहों के साथ मिलाकर ‘गैर-आर्थिक गतिविधियों’ में संलग्न रहने वाले सीमांत और गैर-कामकाजी नागरिकों की श्रेणी में रखा जाता था। हालांकि, अब इन्हें किसी विशिष्ट पहचान के दायरे से बाहर निकालकर सीधे ‘अन्य’ श्रेणी के हिस्से के रूप में गिना जाएगा। इस प्रशासनिक बदलाव का सीधा नतीजा यह होगा कि देश के भीतर भीख मांगने वालों की कुल संख्या, उनकी आयु, धर्म, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के हिसाब से स्थिति, और उनके शिक्षा के स्तर का जो विस्तृत वर्गीकरण पहले मिलता था, वह अब आगामी जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों का हिस्सा नहीं बनेगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछली जनगणनाओं के दौरान ‘भीख मांगने वालों और खानाबदोश लोगों’ की जो गिनती की गई थी, उसे पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं माना जा रहा था, क्योंकि इस विशेष श्रेणी के अंतर्गत आने वाले अधिकांश लोग सामाजिक बदनामी, डर और संकोच के कारण खुद को इस रूप में बताने से कतराते थे और हिचकिचाते थे। एक जिम्मेदार अधिकारी ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि जनगणना के निर्धारित नियमों और प्रावधानों के अनुसार, घर-घर जाकर गणना करने वाले सरकारी कर्मचारी को वही पेशा या गैर-आर्थिक गतिविधि दर्ज करनी होती है, जो संबंधित नागरिक खुद अपनी इच्छा से बताता है। यही कारण था कि जनगणना 2011 के दौरान गैर-कामकाजी भीख मांगने वालों और आवारा लोगों की कुल संख्या लगभग 3.8 लाख दर्ज की गई थी, जबकि इससे पहले जनगणना 2001 में यह आंकड़ा 6.3 लाख और जनगणना 1991 में लगभग 5.4 लाख दर्ज किया गया था, जिसे अब नए प्रारूप में सामान्यीकृत कर दिया गया है।

सवाल-जवाब

2027 की जनगणना में भिखारियों को किस श्रेणी में रखा जाएगा?
अब भिखारियों और खानाबदोशों को अलग श्रेणी के बजाय 'अन्य' की सामान्य श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
पिछली जनगणनाओं में कितने भिखारियों ने खुद को दर्ज कराया था?
वर्ष 2011 की जनगणना में लगभग 3.8 लाख, 2001 में 6.3 लाख और 1991 में लगभग 5.4 लाख लोगों ने खुद को इस श्रेणी में दर्ज कराया था।
माइग्रेशन के कारणों में नया कौन सा विकल्प जोड़ा गया है?
माइग्रेशन के कारणों में पहली बार 'प्राकृतिक आपदा' का विकल्प जोड़ा गया है।
भिखारियों की अलग श्रेणी हटाने का मुख्य कारण क्या था?
पिछली गणनाओं में सामाजिक बदनामी के डर से लोग खुद को इस श्रेणी में बताने से हिचकिचाते थे, जिससे आंकड़े अविश्वसनीय माने गए।
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