4 अगस्त 2026 को फुकेट से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान AI-2379 में आसमान में एक बड़ा तकनीकी संकट खड़ा हो गया था। जमीन से लगभग 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे एयरबस A320-251N विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम अचानक एक के बाद एक जवाब दे गए। इस गंभीर परिस्थिति के बीच विमान की ऊंचाई में झटके से बड़ा बदलाव आया, जिससे कॉकपिट ऑटोमेशन बंद हो गया और केबिन में अफरातफरी मच गई। इस घटना में कई यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोटें आई हैं। इस बीच, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती जांच में विमान की तकनीकी खराबी के साथ-साथ पायलट-इन-कमांड के साइको-एक्टिव सब्सटेंस टेस्ट के नॉन-नेगेटिव आने का मामला भी सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
36 हजार फीट पर घटी घटना और क्रू की स्थिति
एयर इंडिया का यह विमान 145 लोगों को लेकर फुकेट से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। इनमें 137 यात्री, 6 केबिन क्रू सदस्य और 2 पायलट सवार थे। विमान जब एफएल360 (लगभग 36 हजार फीट) की सामान्य ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था, तभी अचानक कॉकपिट में चेतावनी वाले संकेत बजने लगे। सबसे पहले ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम का दबाव खत्म हुआ। इसके महज कुछ ही सेकेंड के भीतर ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम में भी प्रेशर लॉस की समस्या दर्ज की गई। विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम उड़ान नियंत्रण और मोशन के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं, इसलिए तीनों प्रणालियों में एक साथ आई इस खराबी ने गंभीर खतरा पैदा कर दिया।
तीनों प्रणालियों में दबाव गिरते ही ऑटोपायलट सिस्टम अपने आप डिसएंगेज हो गया। इसी दौरान कॉकपिट में कुछ सेकेंड के लिए स्टॉल वॉर्निंग की आवाज भी सुनाई दी। नियंत्रण प्रणालियों पर असर पड़ने के कारण विमान की ऊंचाई में अप्रत्याशित फेरबदल हुआ। डेटा के अनुसार विमान अचानक 372 फीट ऊपर की ओर उछला और फिर झटके के साथ करीब 292 फीट नीचे की तरफ आया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि महज कुछ ही सेकेंड के अंदर तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम ने अपने आप रिकवर कर लिया और उड़ान नियंत्रण फिर से सामान्य हो गया। इसके बाद कॉकपिट क्रू ने सफर जारी रखते हुए विमान को सुरक्षित दिल्ली में लैंड कराने का फैसला लिया।
केबिन में अफरातफरी और 24 लोगों का इलाज
जिस समय यह हादसा हुआ, उस दौरान केबिन में सीट बेल्ट का साइन बंद था। अचानक विमान में आए तीव्र झटकों और ऊंचाई में हुए बदलाव की वजह से कई यात्री और क्रू मेंबर्स अपनी सीटों से उछल गए या केबिन के हिस्सों से टकरा गए। 4 अगस्त को दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने के तुरंत बाद कुल 24 लोगों को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई। इन प्रभावित लोगों में 20 यात्री और 4 केबिन क्रू के सदस्य शामिल थे। प्राथमिक चिकित्सा और स्वास्थ्य जांच के बाद 20 लोगों को मामूली चोटों के इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि 4 गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
विमान के अंदरूनी हिस्से को भी झटके के कारण अच्छा-खासा नुकसान पहुंचा है। जांच के दौरान पाया गया कि केबिन के ओवरहेड बिन्स, सीलिंग पैनल्स, हैंडरेल्स और इमरजेंसी एग्जिट हैंडल क्षतिग्रस्त हो गए थे। झटके का असर इतना तेज था कि केबिन इंटीरियर के कई हिस्से अपनी जगह से उखड़ गए थे।
पायलट का ड्रग टेस्ट और नियामक संस्था की चिंता
घटना के बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत जांच एजेंसी ने फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड का साइको-एक्टिव सब्सटेंस टेस्ट कराया। जांच में आए नतीजों के कन्फर्मेटरी टेस्ट में रिपोर्ट नॉन-नेगेटिव पाई गई। जांच एजेंसी AAIB ने इस जांच परिणाम को बेहद गंभीर चिंता का विषय माना है। इसके बाद जांच एजेंसी ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से अंतरिम सिफारिश की है कि एयरलाइंस में साइको-एक्टिव पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं और उचित कार्रवाई की जाए।
हालांकि, AAIB ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि पायलट के इस टेस्ट रिजल्ट को फिलहाल हादसे की सीधी या एकमात्र वजह नहीं माना गया है। विमान में आई तकनीकी गड़बड़ी और कॉकपिट के अन्य पहलुओं की निष्पक्ष जांच अलग से जारी है।
तकनीकी खामियों और उपकरणों की विस्तृत जांच
जांच रिपोर्ट से यह बात भी सामने आई है कि यह विमान अपनी उड़ान से पहले मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट (MEL) के तहत पावर ट्रांसफर यूनिट (PTU) से जुड़े एक विशिष्ट आइटम के साथ संचालित हो रहा था। उड़ान के दौरान ग्रीन, ब्लू और येलो हाइड्रोलिक प्रणालियों में एक साथ दबाव कम होने की मुख्य तकनीकी वजह क्या थी, इसका सटीक कारण अभी AAIB द्वारा तय नहीं किया गया है।
मौसम के संदर्भ में की गई पड़ताल में यह पाया गया कि घटना के वक्त इलाके में किसी भी प्रकार के खराब मौसम का कोई संकेत नहीं था। न तो पायलटों की ओर से और न ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की तरफ से किसी खराब मौसम या टर्बुलेंस की पहले से जानकारी दी गई थी। इसलिए शुरुआती तौर पर खराब मौसम को इस घटना का कारण नहीं माना जा रहा है।
ब्लैक बॉक्स डेटा और एयरबस विशेषज्ञों का विश्लेषण
हादसे के कारणों की तह तक पहुंचने के लिए AAIB ने विमान के दोनों मुख्य रिकॉर्डर, यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) का डेटा सुरक्षित निकाल लिया है। इन दोनों उपकरणों से मिले डेटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। इसके साथ ही विमान निर्माता कंपनी एयरबस के तकनीकी विशेषज्ञों ने भी दिल्ली पहुंचकर विमान का बारीकी से निरीक्षण किया है।
विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़े विभिन्न कंपोनेंट्स और हाइड्रोलिक फ्लूइड के सैंपल्स को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। इन कंपोनेंट्स की जांच से यह समझने में मदद मिलेगी कि 36 हजार फीट की ऊंचाई पर अचानक तीनों प्रणालियों में प्रेशर लॉस क्यों हुआ। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए हैं, लेकिन घटना के अंतिम कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो पाएगी।



















