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श्रीनाथजी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर दगेंगी नर और मादा तोपें, 300 साल पुरानी परंपरा में दी जाएगी 21 तोपों की सलामीराजस्थान
4 सित॰ 2026, 1:05 pm (25 मिनट पहले)· 1

श्रीनाथजी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर दगेंगी नर और मादा तोपें, 300 साल पुरानी परंपरा में दी जाएगी 21 तोपों की सलामी

राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथजी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 21 तोपों की सलामी देने की 300 वर्ष पुरानी अनूठी परंपरा निभाई जाएगी। इस दौरान आम श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दो दिनों तक सभी प्रकार के वीआईपी पास रद्द रहेंगे।

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित प्रसिद्ध श्रीनाथजी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव अपनी अनोखी परंपराओं के लिए देशभर में जाना जाता है। मध्यरात्रि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का स्वागत करने के लिए मंदिर परिसर में 21 तोपों की सलामी दी जाती है। लगभग तीन शताब्दियों से चली आ रही यह ऐतिहासिक परंपरा आस्था, उत्साह और सख्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ मनाई जाती है। देश भर में नाथद्वारा का यह मंदिर संभवतः एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ भगवान के जन्मोत्सव की घोषणा तोपों की गर्जना से की जाती है। इस अलौकिक आयोजन का हिस्सा बनने और प्रभु के दर्शन करने के लिए जन्माष्टमी पर दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं।

300 साल पुरानी तोप सलामी की ऐतिहासिक परंपरा

जैसे ही आधी रात को श्रीकृष्ण जन्म का समय होता है, पूरा नाथद्वारा शहर तोपों की गूंज से गूंज उठता है। मंदिर के रिसाला चौक में रखी ऐतिहासिक 'नर' और 'मादा' नामक तोपों से 21 बार फायर करके सलामी दी जाती है। इस तीन सौ साल पुरानी परंपरा को पूरी सुरक्षा के साथ संपन्न कराने के लिए मंदिर प्रशासन के 20 से अधिक प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी विशेष रूप से तैनात रहते हैं। सुरक्षा के कड़े मानकों और निर्धारित नियमों का पालन करते हुए ही तोपों को दागा जाता है। जन्माष्टमी के उत्सव में यह तोप सलामी सबसे प्रमुख और रोमांचक आकर्षण का केंद्र होती है।

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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 15 दिन पहले से तैयारियां और वीआईपी पास पर रोक

श्रीनाथजी मंदिर में इस महापर्व की तैयारियाँ लगभग 15 दिन पहले से ही शुरू कर दी जाती हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर जुटने वाली अपार भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाते हैं। आम भक्तों को बिना किसी बाधा के सुगम दर्शन मिल सकें, इसके लिए जन्माष्टमी पर्व के दो दिनों तक सभी तरह के वीआईपी पास और प्रोटोकॉल पास पूरी तरह से बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इससे सभी पंक्तियों में केवल सामान्य व्यवस्था लागू रहती है और हर भक्त आसानी से भगवान के दर्शन कर पाता है।

पंचामृत स्नान से लेकर नंदोत्सव और माखन की होली तक की समय-सारणी

धार्मिक समय-सारणी के अनुसार, 4 सितंबर को श्रीनाथजी मंदिर में मंगला दर्शन और पंचामृत स्नान से लेकर मध्यरात्रि जागरण तक कुल पांच विशेष झांकियां आयोजित की जाएंगी। वहीं अगले दिन, 5 सितंबर को मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक नंदोत्सव अत्यंत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर दही-माखन की होली खेली जाएगी, जिससे संपूर्ण नाथद्वारा नगरी कृष्ण भक्ति के रंग में सराबोर दिखेगी।

सवाल-जवाब

श्रीनाथजी मंदिर कहां स्थित है?
श्रीनाथजी मंदिर राजस्थान के राजसमंद जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल नाथद्वारा में स्थित है।
जन्माष्टमी पर श्रीनाथजी मंदिर में तोप सलामी क्यों दी जाती है?
यह लगभग 300 साल पुरानी परंपरा है, जिसके तहत भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का स्वागत राजसी सम्मान के रूप में 21 बार तोप चलाकर किया जाता है।
तोप सलामी के लिए किन तोपों का इस्तेमाल किया जाता है?
यह सलामी मंदिर के रिसाला चौक में स्थित प्रसिद्ध 'नर' और 'मादा' नामक ऐतिहासिक तोपों से दी जाती है।
जन्माष्टमी पर वीआईपी पास की क्या स्थिति रहेगी?
आम श्रद्धालुओं को सुचारू दर्शन उपलब्ध कराने के लिए जन्माष्टमी के दो दिनों तक सभी प्रकार के वीआईपी और प्रोटोकॉल पास पूरी तरह बंद रहेंगे।
4 और 5 सितंबर को कौन से मुख्य कार्यक्रम आयोजित होंगे?
4 सितंबर को मंगला और पंचामृत स्नान से लेकर मध्यरात्रि तक 5 विशेष दर्शन होंगे, जबकि 5 सितंबर को नंदोत्सव और माखन की होली मनाई जाएगी।
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