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713 किलोमीटर के नए हाईवे से इंदौर-हैदराबाद की दूरी घटकर आधी हो जाएगी, सफर सिमटकर 10 घंटे का रह जाएगाभारत
6 सित॰ 2026, 11:43 pm (24 दिन पहले)· 3

713 किलोमीटर के नए हाईवे से इंदौर-हैदराबाद की दूरी घटकर आधी हो जाएगी, सफर सिमटकर 10 घंटे का रह जाएगा

इंदौर और हैदराबाद के बीच बन रहे 713 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे से दोनों शहरों के बीच का सफर 21 घंटे से घटकर सिर्फ 10 घंटे का रह जाएगा, प्रोजेक्ट के दिसंबर तक तैयार होने की उम्मीद है।

देशभर में जिस रफ्तार से एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं, उससे शहरों के बीच सड़क यात्रा का पूरा गणित बदल रहा है। ऐसा ही एक बड़ा बदलाव इंदौर और हैदराबाद के बीच होने जा रहा है, जहां नया हाई-स्पीड कॉरिडोर तैयार होते ही दोनों शहरों के बीच का सफर लगभग आधे समय में सिमट जाएगा। यानी जो दूरी अभी 21 घंटे में तय होती है, वह आगे चलकर सिर्फ 10 घंटे में पूरी हो सकेगी।

713 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर, तीन राज्यों को जोड़ेगा

एनएचएआई यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इंदौर और हैदराबाद के दरमियान लगभग 713 किलोमीटर का यह हाई-स्पीड कॉरिडोर बना रहा है। यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना, इन तीन राज्यों से गुजरेगा और रास्ते में खंडवा, जलगांव, नांदेड़, वाशिम और हिंगोली जैसे शहरों को आपस में जोड़ते हुए हैदराबाद पहुंचेगा। महाराष्ट्र और तेलंगाना वाले हिस्सों में निर्माण का बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि मध्य प्रदेश वाले हिस्से पर अभी भी काम जारी है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि पूरा प्रोजेक्ट दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा, जिसके बाद तीनों राज्यों को इसका सीधा फायदा मिलना शुरू हो जाएगा।

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अभी 21 घंटे का सफर, ट्रेन से भी ज्यादा वक्त

इंदौर और हैदराबाद के बीच फिलहाल सड़क के रास्ते करीब 850 किलोमीटर का फासला तय करना पड़ता है, जिसमें 20 से 21 घंटे का वक्त लग जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इतनी दूरी ट्रेन से तय करने में सड़क मार्ग से भी ज्यादा वक्त लगता है, यानी करीब 25 घंटे। नया एक्सप्रेसवे सिर्फ 713 किलोमीटर का होगा, जिससे दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग 150 किलोमीटर तक घट जाएगी। इस चार लेन वाली सड़क पर गाड़ियां 100 की रफ्तार से दौड़ सकेंगी, जिससे पूरा सफर महज 10 घंटे में सिमट जाएगा। यानी दूरी भी कम होगी और रफ्तार भी बढ़ेगी, इसलिए समय की बचत लगभग दोगुनी हो जाएगी।

मध्य प्रदेश से निकलकर तेलंगाना तक का रास्ता

यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से निकलेगा और खंडवा-बुरहानपुर के इलाकों को पार करते हुए महाराष्ट्र में दाखिल होगा। महाराष्ट्र में इसकी एंट्री अकोला शहर से होगी, जिसके बाद यह वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ होते हुए तेलंगाना पहुंचेगा। तेलंगाना में हैदराबाद तक पहुंचने से पहले यह कामारेड्डी, मेडक और संगारेड्डी जैसे शहरों से भी होकर गुजरेगा। इस तरह इस कॉरिडोर से तीनों राज्यों के लगभग 10 शहरों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे इन इलाकों में आवाजाही के साथ व्यापार और उद्योग को भी रफ्तार मिल सकती है।

पहाड़ी हिस्से को पार करने के लिए तीन सुरंगें

इस पूरे प्रोजेक्ट में सबसे मुश्किल काम इंदौर के आसपास का इलाका माना जा रहा है। तेजाजी नगर से आगे खरगोन ज़िले और बलवाड़ा के दरमियान तकरीबन 33 किलोमीटर का पहाड़ी व घाटों वाला हिस्सा पड़ता है, जहां सामान्य तरीके से सड़क बनाना बेहद मुश्किल है। इस चुनौती से निपटने के लिए एनएचएआई ने भेरूघाट और चोरलघाट के पास तीन आधुनिक सुरंगें बनाने का फैसला किया है। इन सुरंगों के तैयार होने के बाद घाट वाले हिस्से का खतरनाक सफर पूरी तरह खत्म हो जाएगा, और यात्री महज आधे घंटे में ही इस पूरे पहाड़ी हिस्से को सुरक्षित तरीके से पार कर सकेंगे। इससे न सिर्फ वक्त बचेगा, बल्कि हादसों का खतरा भी काफी कम हो जाएगा।

सवाल-जवाब

इंदौर से हैदराबाद के बीच नया एक्सप्रेसवे कितना लंबा है?
यह एक्सप्रेसवे लगभग 713 किलोमीटर लंबा है।
अभी इंदौर से हैदराबाद जाने में कितना समय लगता है?
अभी सड़क मार्ग से इस सफर में 20-21 घंटे लगते हैं, जबकि ट्रेन से करीब 25 घंटे लगते हैं।
एक्सप्रेसवे बनने के बाद कितना समय लगेगा?
एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यह सफर सिर्फ 10 घंटे में पूरा हो सकेगा।
यह एक्सप्रेसवे किन राज्यों से गुजरेगा?
यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना, तीन राज्यों से गुजरेगा।
एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की स्पीड लिमिट क्या होगी?
यह चार लेन का एक्सप्रेसवे है, जिस पर वाहन 100 की रफ्तार से चल सकेंगे।
एक्सप्रेसवे के बनने के बाद दूरी में कितनी कमी आएगी?
मौजूदा 850 किलोमीटर की तुलना में नई दूरी घटकर लगभग 150 किलोमीटर कम हो जाएगी।
इस प्रोजेक्ट में सुरंगें क्यों बनाई जा रही हैं?
इंदौर के पास तेजाजी नगर से खरगोन और बलवाड़ा के बीच 33 किलोमीटर का पहाड़ी इलाका है, जहां सड़क बनाना मुश्किल है, इसलिए भेरूघाट और चोरलघाट के पास तीन सुरंगें बनाई जा रही हैं।
यह प्रोजेक्ट कब तक पूरा होने की उम्मीद है?
प्रोजेक्ट के दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·24 दिन पहले

यह बुनियादी ढांचा सिर्फ समय और दूरी कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के इस बेल्ट में स्मार्ट लॉजिस्टिक्स, ईवी चार्जिंग नेटवर्क और आधुनिक डिजिटल सप्लाई चेन के विकास को भी तेजी से बढ़ावा देगा।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेसवे महज़ परिवहन का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच व्यापारिक गतिशीलता को नया आयाम देने वाला रणनीतिक कदम है। इस नए हाई-स्पीड कॉरिडोर से न सिर्फ 10 शहरों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, बल्कि कृषि और औद्योगिक उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला भी तेज़ होगी। यदि यह दिसंबर तक पूरा हो जाता है, तो इन तीनों राज्यों के टियर-2 और टियर-3 शहरों में लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को तीव्र गति मिलेगी।

Vikram Yadav@vikram-yadav·24 दिन पहले

रविकाश का विश्लेषण बिल्कुल सटीक है। इस 713 किलोमीटर लंबे गलियारे से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के लगभग 10 शहरों को जो सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, वह स्थानीय व्यापार के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। खासतौर पर भेरूघाट और चोरलघाट के कठिन पहाड़ी हिस्से में बन रही तीन आधुनिक सुरंगें इस बात का प्रमाण हैं कि इंजीनियरिंग की चुनौतियों पर पार पाकर बुनियादी ढांचे का यह विकास कैसे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

यह एक्सप्रेसवे केवल परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों को अभूतपूर्व गति देगा। हालांकि, तीन राज्यों से गुजरने वाले इस 713 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 100 किमी/घंटा की रफ्तार से वाहनों का संचालन सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती होगा। तीव्र गति से हादसों की आशंका बढ़ने के कारण, कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन एजेंसियों को अभी से सख्त निगरानी तंत्र, आधुनिक सर्विलांस और त्वरित सहायता प्रणालियों का ब्लूप्रिंट तैयार करना होगा, ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

यह उच्च गति गलियारा न केवल मध्य भारत को दक्षिणी राज्यों से जोड़ेगा, बल्कि खंडवा, नांदेड़ और वाशिम जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों में निवेश के नए द्वार खोलेगा। चूंकि यह मार्ग मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के आदिवासी व कृषि प्रधान क्षेत्रों से गुजरता है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अंतर-राज्यीय समन्वय इस विशाल परियोजना की आर्थिक सफलता की मुख्य धुरी बनेगा।

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