भारत 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस ऐतिहासिक उत्साह के साथ मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित करेंगे। पूर्व के आयोजनों की कड़ी में यह समारोह कई अभूतपूर्व विशेषताओं का गवाह बनने जा रहा है। इस वर्ष का मुख्य आकर्षण ऐतिहासिक राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का सामूहिक गायन होगा, जिसे लाल किले के औपचारिक कार्यक्रम में पहली बार शामिल किया गया है। पूरे देश में देशभक्ति का वातावरण निर्मित है और लाल किला परिसर में अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इस बार के आयोजन की मूल थीम 'विकसित भारत' के संकल्प और 'युवा शक्ति' की ऊर्जा पर केंद्रित रखी गई है, जहां से प्रधानमंत्री देश के भविष्य के लिए नए विजन और विकास परियोजनाओं की घोषणा कर सकते हैं।
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के 150 साल का ऐतिहासिक जश्न
इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक ऐतिहासिक क्षण को शामिल किया गया है, जो देश के सांस्कृतिक इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। लाल किले के प्राचीर पर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का सस्वर गायन किया जाएगा। यह विशेष प्रस्तुति इस महान गीत की 150 साल पुरानी समृद्ध विरासत और राष्ट्रीय चेतना में इसके अमूल्य योगदान को सम्मानित करने का एक अनूठा प्रयास है। इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा, "यह कार्यक्रम वंदे मातरम की ऐतिहासिक विरासत और देश की युवा शक्ति को पूरी तरह समर्पित है।"
समारोह की तय रूपरेखा के अनुसार, जैसे ही ध्वजारोहण की प्रक्रिया संपन्न होगी, भारतीय सेना का बैंड राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की मधुर धुन बजाएगा। धुन के बजते ही वहां उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथि और नागरिक एक स्वर में 'वंदे मातरम' का गायन करेंगे। इसके तुरंत बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' का गायन होगा। इस अभूतपूर्व क्षण को जीवंत बनाने के लिए समाज के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे कृषि, खेल, शिक्षा, विज्ञान और समाज सेवा से जुड़े 5000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। ये सभी अतिथि राष्ट्र निर्माण में विभिन्न वर्गों के योगदान का प्रतिनिधित्व करेंगे।
प्रधानमंत्री का 13वां ऐतिहासिक संबोधन और रिकॉर्ड की बराबरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में पहली बार सत्ता संभालने के बाद से लगातार लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहराते आ रहे हैं। इस वर्ष 15 अगस्त को उनका 13वां निरंतर भाषण होगा। अपनी इस यात्रा में वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा बनाए गए लगातार 11 बार देश को संबोधित करने के रिकॉर्ड को पहले ही पीछे छोड़ चुके हैं। वर्तमान में लगातार संबोधन के मामले में केवल देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ही उनसे आगे हैं, जिन्होंने 1947 से 1963 तक लगातार 17 बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया था।
संबोधन की समयावधि के दृष्टिकोण से भी पीएम मोदी के भाषण हमेशा चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने लाल किले से 103 मिनट तक लंबा भाषण दिया था, जो स्वतंत्रता दिवस के इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया अब तक का सबसे लंबा संबोधन बन गया। देशवासियों को इस 80वें स्वतंत्रता दिवस पर भी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन के दौरान देश के बुनियादी ढांचे, तकनीकी प्रगति और सामाजिक कल्याण से जुड़े कुछ बड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स की घोषणा कर सकते हैं।
ध्वजारोहण, तोपों की सलामी और हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा
समारोह के दिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले के परिसर में पहुंचेंगे, तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उनका औपचारिक स्वागत करेंगे। इसके उपरांत रक्षा मंत्री उन्हें सलामी मंच तक ले जाएंगे, जहां भारतीय सेना के तीनों अंगों थल सेना, नौसेना और वायु सेना तथा दिल्ली पुलिस की एक संयुक्त टीम प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय सलामी प्रदान करेगी। इस पूरे आधिकारिक कार्यक्रम के समन्वय और संचालन की मुख्य जिम्मेदारी भारतीय सेना को सौंपी गई है।
प्रधानमंत्री जैसे ही राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे, उसी क्षण 21 तोपों की पारंपरिक और भव्य सेरेमोनियल सलामी दी जाएगी। यह सलामी पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित 105 मिमी लाइट फील्ड गन के जरिए दी जाएगी। ध्वजारोहण के इस पावन कार्य में कैप्टन सोनिया सिंह चौहान प्रधानमंत्री की सहायता करेंगी। जैसे ही तिरंगा आसमान में लहराएगा, सेना की टुकड़ियां राष्ट्रीय सलामी देंगी। ध्वजारोहण के ठीक साथ आसमान में भारतीय वायु सेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टर आयोजन स्थल के ऊपर से उड़ान भरते हुए फूलों की वर्षा करेंगे। इनमें से एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर उड़ान भरेगा, जबकि दूसरे हेलीकॉप्टर पर 'वंदे मातरम' प्रदर्शित होगा। इन दोनों हेलीकॉप्टर्स की कमान वायु सेना के विंग कमांडर रजत और स्क्वाड्रन लीडर अंकित वार्ष्णेय के हाथों में होगी।
त्रिसेवा गार्ड ऑफ ऑनर और सुरक्षा की कमान
समारोह के मुख्य चरण में प्रधानमंत्री के संबोधन के समाप्त होने के पश्चात, NCC कैडेट्स और 'मेरा भारत' संगठन के स्वयंसेवक एक साथ मिलकर 'वंदे मातरम' का भव्य सामूहिक गान प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही लाल किले का यह ऐतिहासिक आयोजन अपनी पूर्णता को प्राप्त करेगा। इसी तर्ज पर देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी स्वतंत्रता दिवस के रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
लाल किले और संपूर्ण दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत कड़ा और अभेद्य बनाया गया है। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर तैनात हैं। प्रधानमंत्री को दिए जाने वाले गार्ड ऑफ ऑनर में सेना के तीनों अंगों और पुलिस के कुल 24 जवान तथा एक मुख्य अधिकारी शामिल रहेंगे। इस त्रिसेवा गार्ड ऑफ ऑनर की समग्र कमान लेफ्टिनेंट कर्नल अर्जुन सिंह संभालेंगे। थल सेना की टुकड़ी का नेतृत्व मेजर आदित्य शर्मा करेंगे, नौसेना दल का प्रतिनिधित्व लेफ्टिनेंट कमांडर नीलम राणा करेंगी, वायु सेना दल की कमान स्क्वाड्रन लीडर विपिन कुमार संभालेंगे, जबकि दिल्ली पुलिस की टुकड़ी का नेतृत्व एडीसीपी विनीत कुमार करेंगे।
























