कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक संदिग्ध चरमपंथी को हिरासत में लेकर उसकी बड़ी साजिश का भंडाफोड़ किया है। गिरफ्तार किए गए 25 वर्षीय युवक की पहचान आसफ़ूल मल्लिक के रूप में हुई है, जो प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से सहानुभूति रखता था। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पड़ोसी देश की सेना से बदला लेने के उद्देश्य से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहा था। वह बेंगलुरु के औद्योगिक इलाके में सुरक्षा गार्ड की आड़ में रहकर अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहा था।
औद्योगिक क्षेत्र से हुई गिरफ्तारी और संदिग्ध की पृष्ठभूमि
पुलिस द्वारा जारी बयान के मुताबिक, 11 अगस्त को बोम्मसंद्रा इंडस्ट्रियल एरिया में कार्रवाई करते हुए आसफ़ूल मल्लिक को दबोचा गया। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के नौपारा गांव का निवासी है। जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी दिसंबर 2025 से बेंगलुरु के पास जिगनी इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक निजी प्रतिष्ठान में सुरक्षा गार्ड के पद पर काम कर रहा था। वहां रहते हुए उसने इंटरनेट पर कई संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसके बाद वह सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में आ गया।
पाकिस्तानी सेना के प्रति आक्रोश और साजिश की वजह
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने खुलासा किया है कि आरोपी के मन में पाकिस्तानी सेना को लेकर गहरा गुस्सा था। उसका मानना था कि पाकिस्तान की सेना वहां के आम नागरिकों और मस्जिदों पर लगातार अत्याचार कर रही है। इसी आक्रोश के कारण उसने चरमपंथी विचारधारा को अपनाया और प्रतिबंधित संगठन TTP के विचारकों के संपर्क में आया। उसने सोशल मीडिया के जरिए अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाना शुरू किया।
अफगान नागरिक से संपर्क और पासपोर्ट-वीजा का खेल
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आसफ़ूल की पहचान फेसबुक पर इमरान अहिंदर नाम के एक अफगानी नागरिक से हुई थी। अहिंदर के संपर्क में आने के बाद उसने अफगानिस्तान की यात्रा करने की योजना बनाई। अफगान नागरिक ने उसे पासपोर्ट बनवाने में सहायता की। इसके बाद आरोपी ने पाकिस्तानी सेना से बदला लेने के इरादे से वीजा के लिए भी आवेदन प्रस्तुत कर दिया। हालांकि, अज्ञात कारणों से अंतिम समय में उसे अपना वीजा आवेदन रद्द करना पड़ा था।
डिजिटल सबूत और आगे की कानूनी कार्रवाई
बेंगलुरु पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जिसमें से कई संवेदनशील डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। जांचकर्ताओं को फोन से ऑडियो रिकॉर्डिंग और ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और कर्मियों पर हमले की साजिश की पुष्टि करते हैं। फिलहाल पुलिस की विशेष टीम आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की पड़ताल में जुटी हुई है।



















