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आबकारी सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर सरकारी खजाने को लगाई 21.30 करोड़ की चपत, यमुनानगर में शराब फर्मों की धांधली उजागरहरियाणा
25 सित॰ 2026, 11:54 am (42 दिन पहले)· 0

आबकारी सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर सरकारी खजाने को लगाई 21.30 करोड़ की चपत, यमुनानगर में शराब फर्मों की धांधली उजागर

यमुनानगर में एक्साइज विभाग के सॉफ्टवेयर से फर्जी ई-GRN तैयार कर 21.30 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ है, जिसमें विभाग ने 5 करोड़ रुपये वसूलने और कमेटी गठित करने की बात कही है।

हरियाणा के यमुनानगर में शराब के कारोबार से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें सरकारी राजस्व को करीब 21.30 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है। इस पूरे प्रकरण में शराब से जुड़ी दो प्रमुख व्यापारिक फर्मों पर सीधे तौर पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने एक्साइज एवं टैक्सेशन विभाग के आधिकारिक सॉफ्टवेयर की प्रणाली में तकनीकी हेरफेर किया और तय कर चुकाए बिना सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई। सरकारी सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर इतने बड़े पैमाने पर की गई यह अनियमितता अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

सॉफ्टवेयर में हेरफेर और फर्जी ई-GRN का खेल

इस पूरे मामले को उजागर करने वाले शिकायतकर्ता अभिनव कोहली ने प्रणाली में की गई गड़बड़ियों की विस्तृत जानकारी सामने रखी है। उनके अनुसार, दोनों आरोपी फर्मों ने कथित तौर पर 100 से भी अधिक बार फर्जी ई-GRN नंबर तैयार किए। इन जाली नंबरों के जरिए उत्पाद शुल्क और जरूरी करों से बचते हुए व्यापार किया गया, जिससे सरकारी खाते में जाने वाली एक बड़ी रकम सीधे तौर पर दबा ली गई। इस डिजिटल हेरफेर के जरिए विभाग को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा है।

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गोदाम सील होने और दो दिन में खुलने पर खड़े हुए सवाल

शिकायतकर्ता ने विभाग द्वारा की गई शुरुआती कार्रवाई के तरीके पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। जब यह अनियमितता पहली बार संज्ञान में आई थी, तब आबकारी विभाग ने तत्काल कदम उठाते हुए दोनों फर्मों के गोदामों को सील कर दिया था। हालांकि, अभिनव कोहली का दावा है कि इस सख्त कार्रवाई के महज दो दिन के भीतर ही उन गोदामों की सील खोल दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी भारी भरकम रकम की धोखाधड़ी पकड़े जाने के बावजूद दोनों फर्मों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द क्यों नहीं किए गए और उनके संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों बरती जा रही है।

विभागीय जांच और 5 करोड़ की रिकवरी का दावा

इस पूरे विवाद और आरोपों के जवाब में एक्साइज विभाग के DETC जितेंद्र कुमार ने आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने जानकारी दी कि विभाग ने अब तक 5 करोड़ रुपये की रिकवरी सफलतापूर्वक कर ली है। इसके अतिरिक्त, विभाग के पास सुरक्षा और देनदारी के तौर पर लगभग 31 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों के दस्तावेज पहले से मौजूद हैं। DETC जितेंद्र कुमार के अनुसार, पूरे मामले की गहन पड़ताल के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित कर दी गई है और बाकी बची रकम को जल्द से जल्द वसूलने की प्रक्रिया जारी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गठित कमेटी की जांच में राजस्व क्षति का अंतिम आंकड़ा क्या तय होता है।

सवाल-जवाब

यमुनानगर में कितने रुपये के शराब घोटाले का मामला सामने आया है?
यमुनानगर में शराब कारोबार से जुड़ा लगभग 21.30 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व के नुकसान का मामला सामने आया है।
इस घोटाले में किन पर गड़बड़ी का आरोप है?
इस पूरे मामले में शराब की दो बड़ी व्यापारिक फर्मों पर आबकारी विभाग के सॉफ्टवेयर में हेरफेर करने के आरोप लगे हैं।
शिकायतकर्ता अभिनव कोहली ने क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया है कि 100 से ज्यादा फर्जी ई-GRN नंबर तैयार किए गए और सील होने के महज दो दिन बाद ही गोदामों को दोबारा खोल दिया गया।
आबकारी विभाग ने अब तक कितनी रिकवरी की है?
एक्साइज विभाग के DETC जितेंद्र कुमार के अनुसार, विभाग 5 करोड़ रुपये की रिकवरी कर चुका है और करीब 31 करोड़ रुपये की संपत्ति के दस्तावेज उसके पास हैं।
मामले की जांच के लिए विभाग ने क्या कदम उठाया है?
विभागीय अधिकारियों ने पूरी अनियमितता और राजस्व हानि की पड़ताल के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·41 दिन पहले

यमुनानगर वाले इस शराब घोटाले को पढ़कर मुझे पिछले साल चंडीगढ़ में एक इवेंट के दौरान एक्साइज विभाग के एक अधिकारी से हुई वो अनौपचारिक बातचीत याद आ गई, जब वे खुद बता रहे थे कि कैसे डिजिटल सिस्टम को बाईपास करने के नए-नए तरीके निकाले जा रहे हैं। जब गोदाम सील होने के दो दिन बाद ही खुल जाएं, तो फिर सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजिमी है।

Ravikash Gupta@ravikash·41 दिन पहले

सॉफ्टवेयर में इस तरह की सेंधमारी बिना अंदरूनी मदद के नामुमकिन लगती है। सिर्फ पांच करोड़ वसूलकर गोदाम खोल देना ढिलाई की इंतहा है, जब तक लाइसेंस रद्द कर आपराधिक मामला दर्ज नहीं होगा, ऐसे घपले रुकेंगे नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 दिन पहले

रविकाश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या कोई अधिकारी भी इस खेल में शामिल है, यह जांच कभी बाहर आएगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 दिन पहले

सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर करोड़ों डकार लेना और दो दिन में गोदाम खुल जाना, विभाग की मिलीभगत साफ दिखाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·42 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही पकड़े हैं। दो दिन में गोदाम खुल जाना और एफआईआर न होना दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है।

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