राजस्थान के वाणिज्यिक कर विभाग ने राजस्व संग्रहण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए अक्टूबर 2026 में अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है। प्रदेश के खजाने में इस एक महीने के भीतर माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी और मूल्य संवर्धित कर यानी वैट के जरिए कुल 7,047.27 करोड़ रुपये का भारी भरकम राजस्व जमा हुआ है। जुलाई 2017 में देश भर में एकल कर प्रणाली के रूप में जीएसटी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद से यह राजस्थान में किसी भी एकल माह में प्राप्त हुई सर्वाधिक टैक्स राशि का नया कीर्तिमान बन गया है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ राज्य ने अपने ही पिछले सभी वित्तीय रिकॉर्डों को काफी पीछे छोड़ दिया है।
कर विभाग के वित्तीय आंकड़ों के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि अक्टूबर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने इसी साल मार्च के उच्च स्तर को भी ध्वस्त कर दिया है। इससे पहले मार्च 2026 के दौरान राज्य को जीएसटी और वैट दोनों स्रोतों से 6,826.60 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई थी, जो उस समय तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा था। चालू वर्ष के अक्टूबर महीने में उस पिछले रिकॉर्ड की तुलना में 220.67 करोड़ रुपये अधिक राजस्व की उगाही हुई है। राज्य प्रशासन के लिए यह छलांग वित्तीय अनुशासन और बेहतर अनुपालन की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
सालाना आधार पर 743.39 करोड़ रुपये का बड़ा उछाल
यदि इस संग्रहण की तुलना पिछले वित्तीय वर्ष के इसी समान महीने से की जाए, तो राजस्व वृद्धि की रफ्तार बेहद उत्साहजनक दिखाई देती है। अक्टूबर 2025 में राजस्थान को जीएसटी और वैट से सम्मिलित रूप से 6,303.88 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। वहीं ठीक एक साल बाद, यानी अक्टूबर 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 7,047.27 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस प्रकार एक वर्ष के अंतराल में अक्टूबर माह के कर संग्रह में 743.39 करोड़ रुपये की सीधी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
प्रतिशत के पैमाने पर यह वार्षिक उछाल लगभग 11.79 प्रतिशत बैठता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार राज्य सरकार की कर आमदनी में करीब 12 फीसदी की ठोस वृद्धि देखने को मिली है। आर्थिक विशेषज्ञों और विभागीय विश्लेषकों का मानना है कि कर आधार में यह दोहरे अंकों की बढ़त दर्शाती है कि प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों में तेजी बनी हुई है और करदाता समय पर अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
सात महीनों में 44,034 करोड़ रुपये के पार पहुंचा राजस्व
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के समग्र प्रदर्शन पर नजर डालें तो शुरुआती सात महीनों में ही राजस्थान सरकार की वित्तीय स्थिति काफी सुदृढ़ नजर आ रही है। अप्रैल 2026 से लेकर अक्टूबर 2026 तक की अवधि में प्रदेश को कुल मिलाकर 44,034.09 करोड़ रुपये का टैक्स राजस्व प्राप्त हो चुका है। वित्तीय वर्ष की पहली दो तिमाहियों और तीसरी तिमाही के पहले महीने के भीतर ही 44 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लेना राज्य की राजकोषीय मजबूती का स्पष्ट संकेत देता है।
वाणिज्यिक कर विभाग के अनुसार, यह उपलब्धि किसी एक कदम का परिणाम नहीं है बल्कि कर प्रशासन को कई मोर्चों पर एक साथ चाक-चौबंद करने से संभव हुई है। विभाग ने जहां एक ओर कर चोरी के संभावित रास्तों की पहचान कर उन पर कड़ा अंकुश लगाया है, वहीं दूसरी तरफ ईमानदार करदाताओं को सुगम और तकनीकी रूप से सक्षम वातावरण उपलब्ध कराया है ताकि वे बिना किसी परेशानी के समय पर अपना टैक्स जमा कर सकें।
मुख्यमंत्री की निरंतर समीक्षा और प्रशासनिक कड़ाई
इस ऐतिहासिक कर वसूली की मुख्य वजह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता और विभागीय कामकाज की नियमित मॉनिटरिंग को बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के तहत वाणिज्यिक कर विभाग में कर संग्रहण की प्रगति की हर स्तर पर सघन समीक्षा की जा रही है। शीर्ष स्तर पर प्रमुख शासन सचिव (टैक्स) द्वारा विभागीय अधिकारियों के कामकाज, फील्ड स्तर पर निरीक्षण और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति का निरंतर मूल्यांकन किया जा रहा है।
फील्ड में तैनात अधिकारियों को स्पष्ट और मापने योग्य राजस्व लक्ष्य सौंपे गए हैं, जिनकी पाक्षिक व मासिक प्रगति पर लगातार नजर रखी जाती है। प्रशासनिक रणनीति का मुख्य जोर केवल डंडे के बल पर वसूली करने पर नहीं, बल्कि कर प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सरल और उत्तरदायी बनाने पर केंद्रित रहा है। करदाताओं की शिकायतों का त्वरित निस्तारण, प्रक्रियागत बाधाओं को दूर करना और कर नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना इस नई कार्यसंस्कृति के प्रमुख हिस्से रहे हैं। इसके साथ ही कृत्रिम बिलिंग और अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए होने वाली टैक्स चोरी पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है।
विकास योजनाओं और जनहित के कार्यों को मिलेगा संबल
अक्टूबर महीने में कर संग्रहण में हुई इस अप्रत्याशित वृद्धि से राजस्थान के समूचे वित्तीय आधार को बड़ा संबल मिला है। किसी भी राज्य के लिए आंतरिक कर राजस्व का मजबूत होना उसकी विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की रीढ़ होता है। जब राजकोषीय प्रवाह निर्बाध और लक्ष्य से बेहतर रहता है, तो सरकार को विभिन्न अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए धनराशि आवंटित करने में आसानी होती है।
वाणिज्यिक कर विभाग का मानना है कि कर प्रशासन के आधुनिकीकरण, बेहतर निगरानी प्रणाली और करदाता सेवाओं के विस्तार से आने वाले महीनों में भी राजस्व संग्रह का यह सकारात्मक रुख बरकरार रहेगा। विभाग की योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों में भी इसी गति को बनाए रखने की है ताकि वर्ष के अंत तक राज्य का कर संग्रह एक नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच सके।
















