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आईआईटी बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला निलंबित, जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गईमहाराष्ट्र
21 सित॰ 2026, 1:07 pm (36 दिन पहले)· 4

आईआईटी बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला निलंबित, जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई

छात्रों के तीन दिनों के भारी विरोध प्रदर्शन और परिजनों की शिकायत के बाद संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को निलंबित कर दिया है, जबकि मामले की पूरी जांच अब मुंबई पुलिस की अपराध शाखा करेगी।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे परिसर में एक छात्र की आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद प्रशासन को कड़ा कदम उठाना पड़ा है। परिसर में पिछले तीन दिनों से लगातार धरने पर डटे विद्यार्थियों के भारी दबाव के चलते संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मृत छात्र को मानसिक व शैक्षणिक स्तर पर प्रताड़ित करने के गंभीर आरोपों के घेरे में आने के बाद प्रोफेसर के खिलाफ यह निलंबन की कार्रवाई की गई है।

छात्रों के तीन दिवसीय धरने के बाद झुका प्रशासन

परिसर में छात्र की असमय मौत के बाद से ही साथी विद्यार्थी बेहद आक्रोशित थे और लगातार तीन दिनों से शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी छात्रों की स्पष्ट मांग थी कि आरोपित शिक्षक पर त्वरित प्रशासनिक कदम उठाया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। छात्रों के बढ़ते आंदोलन और दबाव को देखते हुए संस्थान प्रबंधन ने उनकी मांगों को स्वीकार करते हुए आरोपी प्राध्यापक को पद से निलंबित करने का आधिकारिक फैसला सुनाया।

परिजनों की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज

इस पूरे घटनाक्रम में कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है। मृत छात्र के पिता द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। छात्र के माता-पिता का आरोप है कि शिक्षक के उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के कारण ही उनके बेटे को यह आत्मघाती कदम उठाने पर विवश होना पड़ा। पुलिस ने परिजनों की तहरीर को संज्ञान में लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मुंबई अपराध शाखा को सौंपी गई जांच की कमान

मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए मुंबई पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस द्वारा साझा किए गए आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस पूरे आत्महत्या प्रकरण की जांच अब मुंबई क्राइम ब्रांच को हस्तांतरित कर दी गई है। अब अपराध शाखा के विशेष जांच अधिकारी घटना से जुड़े सभी पहलुओं, शैक्षणिक तनाव और उत्पीड़न के आरोपों की विस्तृत व गहन पड़ताल करेंगे।

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सवाल-जवाब

आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को क्यों निलंबित किया?
एक छात्र की आत्महत्या के बाद तीन दिनों से धरने पर बैठे छात्रों की मांग और उत्पीड़न के आरोपों के चलते संस्थान ने प्रोफेसर को निलंबित किया है।
प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस ने किस आधार पर मामला दर्ज किया है?
मृतक छात्र के पिता द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर डूल्ला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
इस मामले की जांच अब कौन सी एजेंसी कर रही है?
मुंबई पुलिस ने इस पूरे आत्महत्या प्रकरण की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी है।
संस्थान में छात्र कितने दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे?
संस्थान के विद्यार्थी प्रोफेसर पर कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार तीन दिनों से धरने पर बैठे हुए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

बड़े संस्थानों में ऐसा मानसिक दबाव जानलेवा बनता जा रहा है। क्राइम ब्रांच की जांच से ही सही सच सामने आ पाएगा।

Nyra Kaif@nyra-kaif·35 दिन पहले

रविकेश, क्राइम ब्रांच की जांच से सब साफ़ हो जाएगा, ये सोचना थोड़ा भोलापन है। क्या पुलिस के आने से बड़े संस्थानों का माहौल रातों-रात बदल जाएगा?

Kavya Nair@kavya-nair·35 दिन पहले

एक छात्र की जान चली गई, उम्मीद है क्राइम ब्रांच इस मामले में सच सामने लाएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

इस घटना ने देश के शीर्ष तकनीकी शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रोफेसर का निलंबन और मुंबई क्राइम ब्रांच को जांच सौंपे जाने से यह स्पष्ट है कि दबाव अब केवल परिसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी शिकंजा भी कस चुका है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस उच्चस्तरीय जांच से संस्थानों के भीतर छात्रों के उत्पीड़न को रोकने के लिए कोई दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव आ पाता है या नहीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच का शामिल होना एक कड़ा कानूनी संदेश देता है। चूंकि जांच अब स्थानीय थाने से हटकर अपराध शाखा के पास जा चुकी है, इसलिए तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल कम्युनिकेशंस और अकादमिक रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक जांच बेहद अहम होगी। आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत यह तय किया जाएगा कि क्या प्रताड़ना आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में आती है या नहीं। यह जांच इस बात की भी परीक्षा होगी कि प्रतिष्ठित परिसरों में जवाबदेही और कानून का शिकंजा किस हद तक प्रभावी हो सकता है।

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