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आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत पर भड़का आक्रोश, परिजनों ने शुरू किया अनशन और जांच के लिए पहुंची एनसीएससीभारत
24 सित॰ 2026, 9:35 pm (6 दिन पहले)· 0

आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत पर भड़का आक्रोश, परिजनों ने शुरू किया अनशन और जांच के लिए पहुंची एनसीएससी

आईआईटी बॉम्बे में सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद परिजनों ने जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जबकि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कैंपस पहुंचकर मामले की पड़ताल की है।

आईआईटी बॉम्बे के पवई परिसर में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उपजा विवाद गहराता जा रहा है। मामले की तहकीकात और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए मृतक छात्र के परिजनों ने मुंबई के आज़ाद मैदान में आमरण अनशन शुरू कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि संस्थान में गंभीर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना की वजह से उनके बेटे की जान गई। विवाद के व्यापक रूप लेने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने खुद परिसर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और पुलिस अधिकारियों से जांच से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी ली।

हॉस्टल के कमरे में मिला था छात्र का शव

यह घटनाक्रम 18 सितंबर 2026 को सामने आया था, जब संस्थान के पवई स्थित हॉस्टल के कमरे में 22 वर्षीय साहिल वाकोडे का शव पंखे से लटका पाया गया। साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था और मूल रूप से महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का निवासी था। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि साहिल ने खुद से यह कदम नहीं उठाया, बल्कि उसे ऐसे हालात में धकेल दिया गया जहां उसके सामने कोई रास्ता नहीं बचा था। परिजनों के अनुसार उसे लगातार जातिसूचक टिप्पणियों और प्रताड़ना का शिकार बनाया जा रहा था। मामले पर छात्रों और कई राजनीतिक संगठनों के कड़े विरोध के बाद इसकी विवेचना मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

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आज़ाद मैदान में परिजनों का अनशन और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग

बेटे को खोने के बाद न्याय की गुहार लगाते हुए पिता रवींद्र वाकोडे और मां सोनाली वाकोडे ने सार्वजनिक आंदोलन का रास्ता चुना है। उनके वकील सिद्धार्थ इंगले ने पुष्टि की है कि परिजनों ने आज़ाद मैदान में अपनी भूख हड़ताल शुरू कर दी है। साहिल की मां सोनाली वाकोडे का कहना है कि उनका बेटा शैक्षणिक और तकनीकी गतिविधियों में बेहद आगे था। वह रोबोटिक्स और एआई से जुड़े कार्यक्रमों में 50 लोगों के दल का नेतृत्व करने वाला था और उसका चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में भी हुआ था। उनका तर्क है कि इतना प्रतिभाशाली युवा कभी बिना किसी बाहरी दबाव के ऐसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकता।

परिजनों ने आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे और प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला की तत्काल गिरफ्तारी के साथ-साथ उनके खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई करने की मांग उठाई है। बढ़ते असंतोष के बीच संस्थान प्रशासन ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के डीन पद से हटा दिया है। इसके अलावा छात्रों के आक्रोश और मौजूदा माहौल को देखते हुए 26 और 27 सितंबर को प्रस्तावित मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को आगे बढ़ाकर 10 और 11 अक्टूबर के लिए तय किया गया है।

कैंपस में एनसीएससी की जांच और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने आईआईटी बॉम्बे परिसर का दौरा किया और घटनास्थल की विस्तृत पड़ताल की। आयोग के अध्यक्ष ने शोक संतप्त माता-पिता से मुलाकात कर उनकी बात सुनी और निष्पक्ष न्याय का भरोसा दिया। इसके अतिरिक्त आयोग ने मुंबई के पुलिस आयुक्त और क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर अब तक की कानूनी कार्रवाई की समीक्षा की।

आरोपी प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पीड़ित परिवार तथा छात्र संगठन अब मांग कर रहे हैं कि इस संवेदनशील मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में कराई जाए ताकि साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को बिना देरी सजा दिलाई जा सके और भविष्य में किसी अन्य विद्यार्थी को ऐसे उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।

सवाल-जवाब

साहिल वाकोडे कौन थे और वह किस विभाग में पढ़ाई कर रहे थे?
साहिल वाकोडे 22 वर्ष के छात्र थे, जो आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहे थे और मूल रूप से महाराष्ट्र के यवतमाल के रहने वाले थे।
साहिल के परिजनों ने क्या आरोप लगाए हैं?
परिजनों ने आरोप लगाया है कि साहिल को संस्थान के भीतर जातिगत भेदभाव, गालियों और गंभीर मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाकर जान देने के लिए मजबूर किया गया।
परिजनों ने आंदोलन के रूप में क्या कदम उठाया है?
साहिल के माता-पिता रवींद्र और सोनाली वाकोडे ने न्याय की मांग को लेकर मुंबई के आज़ाद मैदान में आमरण अनशन शुरू किया है।
संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
बढ़ते विरोध के बाद आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के डीन पद से हटा दिया है।
आईआईटी बॉम्बे की मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं पर इसका क्या असर पड़ा है?
संस्थान ने 26 और 27 सितंबर को होने वाली मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को स्थगित कर 10 और 11 अक्टूबर के लिए पुनर्निर्धारित किया है।
इस मामले की जांच वर्तमान में कौन सी एजेंसी कर रही है?
छात्रों और संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बाद मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·6 दिन पहले

साहिल के जाने का दुख बहुत गहरा है और माता-पिता का यूं अनशन पर बैठना देखकर कलेजा कांप जाता है। फिल्मों या सीरीज में तो हम बड़े-बड़े ड्रामा देख लेते हैं, पर असली जिंदगी का यह दर्द किसी फिल्मी कहानी से कहीं ज्यादा भयानक और झकझोर देने वाला है। उम्मीद है इस बार सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों में इस तरह की घटनाएं क्यों रुक नहीं रही हैं? क्या सच में दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

Rohan Gupta@rohan-gupta·6 दिन पहले

अर्जुन भाई, सवाल बिल्कुल सही है आपका। जब तक डी निदेशक जैसे बड़े पदों पर बैठे लोगों पर सीधी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे मामलों में इंसाफ की उम्मीद करना बहुत मुश्किल है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

आईआईटी जैसे संस्थानों में इस तरह की घटनाएं डराती हैं। एक होनहार छात्र का यूं चले जाना और माता-पिता का अनशन पर बैठना झकझोर देने वाला है, क्राइम ब्रांच को निष्पक्ष जांच करके सच सामने लाना चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। ऐसे होनहार बच्चों का जाना देश का भी नुकसान है, उम्मीद है क्राइम ब्रांच और एन.सी.एस.सी की जांच से सच सामने आएगा और माता-पिता को न्याय मिलेगा।

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