अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे ब्रिटिश पाउंड दबाव में, 1.3200 के स्तर पर टिकापीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालवित्त राशिफल 25 सितंबर: 12 राशियों के लिए धन, निवेश और बजट की पूरी स्थितिसंयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू के आरोपों पर जोहरान ममदानी का कड़ा पलटवार, याद दिलाया आईसीसी का वारंटकन्या राशिफल 25 सितंबर 2026: साझेदारी से चमकेगा कारोबार और रिश्तों में घुलेगी मिठासहाफिज सईद पर सवाल सुनते ही संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से कन्नी काट गए शहबाज शरीफसंयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल ने रखी हिमालयी सुरक्षा तंत्र की रूपरेखा, भारत और चीन के सहयोग को सराहासंघर्षों को मात देकर सिनेमा में बनाई मुकाम, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्या दत्ता की अनूठी दास्तानम्यांमार ड्रोन मामले में अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को कोर्ट से मिली वतन वापसी की अस्थायी छूटतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यान
अजमेर के पुष्कर में सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने रेत पर उकेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरराजस्थान
18 सित॰ 2026, 11:54 am (7 दिन पहले)· 1

अजमेर के पुष्कर में सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने रेत पर उकेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अजमेर के पुष्कर में जाने-माने सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने रेत की मदद से एक शानदार कलाकृति तैयार की है। इस आर्ट वर्क के जरिए देश के विभिन्न प्रमुख अभियानों और विकास कार्यों को भी दर्शाया गया है।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के खास अवसर पर राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित धार्मिक नगरी पुष्कर में एक अनोखा नजारा देखने को मिला। पुष्कर की पहचान केवल यहाँ के धार्मिक आयोजनों और पर्यटन स्थलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ के स्थानीय कलाकार अपनी अद्भुत कला के दम पर वैश्विक पटल पर अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं। इसी कड़ी में जाने-माने सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने रेत के कणों को पिरोते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक भव्य और आकर्षक तस्वीर उकेरी है। इस नायाब कलाकृति के माध्यम से उन्होंने देश के सर्वोच्च नेता को उनके जन्मदिन की अनूठी शैली में शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।

राष्ट्रीय अभियानों और विकास यात्रा का अनूठा संगम

अजय रावत द्वारा तैयार की गई इस विशेष रेत कलाकृति का दायरा केवल प्रधानमंत्री के चित्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आकृति को प्रमुखता से रखा गया है। इसके साथ ही कला के विभिन्न पहलुओं के जरिए भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियानों और देश की समग्र विकास यात्रा से जुड़े प्रेरणादायक संदेशों को भी बहुत ही बारीकी से उकेरा गया है। इस पूरी सैंड आर्ट में स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत, स्किल इंडिया और गुड गवर्नेंस जैसे बड़े विषयों को बेहद कलात्मक ढंग से प्रदर्शित किया गया है, जो देश की प्रगति को रेखांकित करते हैं।

ये भी पढ़ें

पुष्कर से निकलकर राष्ट्रीय फलक तक पहुँची कला

अजमेर जिले के पुष्कर के पास स्थित गनाहेड़ा गांव के रहने वाले अजय रावत पिछले काफी लंबे समय से सैंड आर्ट के इस मुश्किल क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। वे पुष्कर में स्थित नेशनल सैंड आर्ट पार्क से भी जुड़े हुए हैं और अपनी कला के माध्यम से राजस्थान की पारंपरिक रेत कला को देश और दुनिया भर में एक विस्तृत पहचान दिलाने में जुटे हैं। रावत ने इससे पहले भी कई खास मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल सैंड आर्ट तैयार की है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की 21 फीट लंबी और 25 फीट चौड़ी एक विशालकाय सैंड आर्ट बनाई थी, जिसकी काफी सराहना हुई थी।

सम्मान और उपलब्धियों से भरा रहा है सफर

कला के क्षेत्र में अजय रावत का योगदान काफी बड़ा रहा है और उन्हें अपनी बेहतरीन प्रतिभा के लिए कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें उनकी उत्कृष्ट कला के लिए देश के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें स्थानीय स्तर पर अजमेर जिले का यूथ आइकन अवॉर्ड भी मिल चुका है। उनकी कला की ख्याति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 में ललित कला के क्षेत्र में उन्हें प्रतिष्ठित महाराणा सज्जन सिंह सम्मान से भी नवाजा गया है।

सवाल-जवाब

अजय रावत ने यह सैंड आर्ट कहाँ बनाई है?
यह कलाकृति अजमेर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थल पुष्कर में बनाई गई है।
यह सैंड आर्ट किस अवसर पर बनाई गई थी?
यह सैंड आर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर तैयार की गई थी।
अजय रावत किस क्षेत्र के निवासी हैं?
अजय रावत पुष्कर के पास स्थित गनाहेड़ा गांव के रहने वाले हैं।
इससे पहले उन्होंने कौन सी बड़ी कलाकृति बनाई थी?
वर्ष 2024 में योग दिवस के अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की 21 फीट लंबी और 25 फीट चौड़ी सैंड आर्ट बनाई थी।
अजय रावत को कौन-से प्रमुख सम्मान मिल चुके हैं?
उन्हें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित किया जा चुका है, साथ ही अजमेर का यूथ आइकन अवॉर्ड और महाराणा सज्जन सिंह सम्मान भी मिला है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·6 दिन पहले

पुष्कर की पहचान परंपरागत रूप से धार्मिक तीर्थस्थल और सांस्कृतिक मेलों तक सीमित रही है, लेकिन अजय रावत जैसे कलाकारों की सैंड आर्ट इस गंतव्य को एक नया सांस्कृतिक और अनुभवात्मक आयाम देती है। नेशनल सैंड आर्ट पार्क जैसे स्थल राजस्थान के पर्यटन में विविधता लाते हैं। जब रेत शिल्प के ज़रिए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों को प्रदर्शित किया जाता है, तो यह केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं रह जाती, बल्कि पर्यटकों के लिए एक अनोखा आकर्षण बनकर पुष्कर के वैश्विक पर्यटन मूल्य को भी बढ़ाती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

लोक नीति और राजनीतिक संचार के दृष्टिकोण से यह खबर बेहद महत्वपूर्ण पहलू को रेखांकित करती है। जब 'आत्मनिर्भर भारत' या 'विकसित भारत' जैसे सरकारी अभियानों को कला के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, तो यह दर्शाता है कि प्रमुख नीतियाँ केवल प्रशासनिक कागज़ों तक सीमित न रहकर जन-सामान्य की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा बन चुकी हैं। पुष्कर जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र पर ऐसी कलाकृतियाँ न केवल शासन के संदेशों को जन-जन तक पहुँचाती हैं, बल्कि नीतियों और जनता के बीच सीधा भावनात्मक जुड़ाव भी बनाती हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

अर्जुन के नीतिगत विश्लेषण को आर्थिक और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से आगे बढ़ाएं तो यह स्पष्ट होता है कि पुष्कर जैसे वैश्विक पर्यटन स्थल पर सैंड आर्ट का प्रसार केवल कला प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्रीय सांस्कृतिक अर्थशास्त्र और पर्यटन-आधारित उद्यमिता को सशक्त बनाने का एक माध्यम है। जब 'डिजिटल इंडिया' या 'स्किल इंडिया' जैसे विकासात्मक विषयों को दृश्य कला में उकेरा जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के सामने भारत के आर्थिक बदलाव की तस्वीर पेश करता है। नेशनल सैंड आर्ट पार्क जैसी पहलों को बढ़ावा मिलना स्थानीय क्रिएटिव इकोनॉमी के लिए दूरगामी अवसर पैदा कर सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से देखा जाए तो पुष्कर जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर ऐसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ केवल कला तक सीमित नहीं रहतीं। गुड गवर्नेंस और नागरिक कर्तव्यों को दर्शाने वाली यह सैंड आर्ट जन-जागरूकता फैलाने में मदद करती है। जब युवा अजय रावत जैसे कलाकारों से प्रेरित होकर सकारात्मक अभियानों से जुड़ते हैं, तो इससे समाज में आपराधिक प्रवृत्तियों पर अंकुश लगता है और नागरिक अनुशासन बढ़ता है। इसके अलावा, ऐसे चर्चित आयोजनों के समय पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को दुरुस्त रखना भी स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

करण जी की बात को आगे बढ़ाते हुए, लोक नीति और शासन के धरातलीय अध्ययन के लिहाज़ से यह कलाकृति एक महत्वपूर्ण पहलू उजागर करती है। सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक-पर्यटन केंद्रों पर कला के जरिए जन-कल्याणकारी योजनाओं का संदेश पहुंचाना नीतिगत संचार (Policy Communication) का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है। जब स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को रेत कला जैसे सुलभ माध्यम से उभारा जाता है, तो यह आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित करता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे स्थानीय कलाकारों को सरकारी जन-जागरूकता अभियानों का स्थायी हिस्सा बनाए, जिससे न केवल क्षेत्रीय कला को संबल मिले, बल्कि सुशासन के संदेश भी अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुँच सकें।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp