अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे ब्रिटिश पाउंड दबाव में, 1.3200 के स्तर पर टिकाअमरूद की बागवानी में गड्ढा तैयार करने से लेकर कीट रोकथाम तक के वैज्ञानिक गुरमूलांक 1 राशिफल 25 सितंबर 2026: कागजी कार्रवाई और नियमों में न बरतें ढिलाई, अहंकार से बचेंजापानी येन में आई गिरावट थमी, 160 के स्तर पर टोक्यो के दखल की आहट से डॉलर फिसलारोजमर्रा के खाने में लाएं हरियाणवी स्वाद, मिनटों में बनाएं देसी आलू बैंगन की मसालेदार सब्जीपीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालहेयरफॉल पर ब्रेक लगाने और मजबूत जड़ों के लिए अपनी दिनचर्या में जोड़ें ये बुनियादी उपायमाता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा के लिए घर में रखें ये चार पवित्र वस्तुएं, वास्तु में माना जाता है कल्याणकारीमुंबई में माधुरी दीक्षित का आशियाना: डांस स्टूडियो, हरियाली और संगीत से सजा खूबसूरत घरवजन बढ़ने पर बच्चों को डाइटिंग कराने के बजाय बदलें दिनचर्या, डॉक्टर ने बताए बचाव के प्रभावी तरीके
अमरूद की बागवानी में गड्ढा तैयार करने से लेकर कीट रोकथाम तक के वैज्ञानिक गुरभारत
25 सित॰ 2026, 8:14 am (1 मिनट पहले)· 0

अमरूद की बागवानी में गड्ढा तैयार करने से लेकर कीट रोकथाम तक के वैज्ञानिक गुर

रेड डायमंड और ताइवानी पिंक जैसी किस्मों के साथ अमरूद की वैज्ञानिक बागवानी कर किसान बेहतर पैदावार और मुनाफा हासिल कर सकते हैं।

व्यावसायिक स्तर पर अमरूद की खेती करने वाले काश्तकारों के बीच रेड डायमंड तथा ताइवानी पिंक जैसी नई प्रजातियों का आकर्षण तेजी से बढ़ा है। जापानी रेड डायमंड के नाम से भी पहचानी जाने वाली यह खास किस्म रोपाई के सिर्फ 6 माह के भीतर फल देने की स्थिति में आ जाती है। इसके अलावा, इस पेड़ से साल भर में दो बार पैदावार प्राप्त की जा सकती है। दूसरी ओर, ताइवानी पिंक किस्म अपने आकर्षक स्वरूप, वजनदार आकार और मिठास के कारण मंडी में लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव पर बिक जाती है। पारंपरिक किस्मों में इलाहाबादी सफेदा तथा सरदार अमरूद यानी लखनऊ-49 भी अपने रसीलेपन और बेहतरीन स्वाद के चलते अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

पौधारोपण के लिए गड्ढों की सही तैयारी

सफल बागवानी की नींव रोपाई के समय गड्ढों की समुचित तैयारी पर टिकी होती है। रोपाई से पूर्व खेत में 1 से 2 फीट की लंबाई, चौड़ाई और गहराई के गड्ढे तैयार किए जाने चाहिए। गड्ढों को खुला छोड़कर उनमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना अनिवार्य है। इसके साथ ही, मिट्टी जनित बीमारियों और कीटों से सुरक्षा के लिए जैविक कीटनाशक ब्यूवेरिया बैसियाना तथा फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा का मिश्रण गड्ढे की भराई में डालना बेहद असरदार साबित होता है। इस प्रक्रिया से शुरुआती दौर में पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनका विकास बिना किसी अवरोध के तेजी से होता है।

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कीटों और रोगों से बचाव के रासायनिक उपाय

अमरूद के बागों में फल विकसित होते समय फल मक्खी का हमला सबसे नुकसानदेह माना जाता है। यह कीट कोमल फलों में सुराख बनाकर भीतर घुस जाता है, जिससे फल सड़ने लगते हैं। इसके अतिरिक्त कई बार सतह पर धब्बे या चकत्ते उभरने की समस्या भी सामने आती है। फल छेदक सुंडियों पर काबू पाने के लिए बागवान मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी अथवा इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी जैसे अनुमोदित रसायनों का छिड़काव अपना सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक दवाइयों के अत्यधिक उपयोग से फल की प्राकृतिक मिठास और स्वाद पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।

जैविक नुस्खे और बैगिंग से फलों की सुरक्षा

फलों की गुणवत्ता और स्वाद को सुरक्षित रखने के लिए जैविक तरीकों को प्राथमिकता देने की जरूरत होती है। कीटों को आकर्षित कर नष्ट करने के लिए बाग में मिथाइल यूजीनॉल ट्रैप स्थापित किए जा सकते हैं। पौधों पर नीम का तेल, लहसुन तथा पिसी मिर्च से तैयार काढ़े का स्प्रे करने से प्राकृतिक रूप से कीटों का प्रकोप नियंत्रित रहता है। नीचे जमीन पर गिरे सड़े-गले फलों को बाग से बाहर ले जाकर नष्ट करना चाहिए ताकि कीटों का जीवन चक्र टूट सके। इसके अलावा फलों के शुरुआती दौर में उन पर बैगिंग यानी आवरण चढ़ाने की तकनीक फल को चमकीला और बेदाग रखती है। किसी भी अप्रत्याशित समस्या के सामने आने पर विशेषज्ञों से परामर्श लेकर ही कदम उठाना चाहिए।

सवाल-जवाब

रेड डायमंड अमरूद कितने समय में फल देना शुरू करता है?
रेड डायमंड अमरूद रोपाई के सिर्फ 6 महीने बाद ही फल देना शुरू कर देता है और साल में दो बार पैदावार देता है।
ताइवानी पिंक किस्म की बाजार में क्या कीमत मिल सकती है?
अपने बड़े आकार और मीठे स्वाद के कारण ताइवानी पिंक अमरूद बाजार में 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव पर बिकता है।
अमरूद का पौधा लगाने के लिए गड्ढे का माप क्या होना चाहिए?
पौधे लगाने के लिए खेत में 1 से 2 फीट लंबा, चौड़ा और गहरा गड्ढा खोदना चाहिए।
गड्ढों की भराई के समय किन जैविक घटकों का उपयोग करना चाहिए?
गड्ढे में सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ ब्यूवेरिया बैसियाना कीटनाशक और ट्राइकोडर्मा फफूंदनाशक मिलाना जरूरी होता है।
फलों पर चमकदार और बेदाग रंगत लाने के लिए क्या किया जाता है?
शुरुआती अवस्था में फलों को बैगिंग तकनीक के जरिए ढक देने से वे कीटों से बचे रहते हैं और उनकी बनावट चमकदार रहती है।
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