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अनिल चौहान की दो टूक, सऊदी अरब और तुर्किये के समझौतों से पाकिस्तान न पाले कोई गलतफहमीभारत
5 सित॰ 2026, 11:56 pm (25 दिन पहले)· 3

अनिल चौहान की दो टूक, सऊदी अरब और तुर्किये के समझौतों से पाकिस्तान न पाले कोई गलतफहमी

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह तुर्किये और सऊदी अरब के साथ हुए नए रक्षा समझौतों के आधार पर किसी भी तरह के अति आत्मविश्वास में न रहे।

नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत की रक्षा तैयारियों और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को तुर्किये और सऊदी अरब के साथ हुए नए रक्षा समझौतों के बाद किसी भी तरह के भ्रम या अहंकार में नहीं रहना चाहिए। यदि पाकिस्तानी हुक्मरान खुद को जरूरत से ज्यादा ताकतवर मानकर भारत के खिलाफ किसी दुस्साहस की हिमाकत करते हैं, तो उन्हें इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

राजधानी के तीन मूर्ति भवन में ‘भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान आने वाले समय में भी भारत के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बना रहेगा। वैश्विक स्तर पर तेजी से बदल रहे राजनीतिक और रणनीतिक समीकरणों के बीच देश को अपनी रक्षात्मक चौकियों और सैन्य तैयारियों को हर वक्त चाक-चौबंद रखना होगा।

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हाल ही में सात अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस संधि के प्रावधानों के अनुसार, यदि इन तीनों देशों में से किसी पर भी बाहरी हमला होता है, तो इसे संयुक्त रूप से तीनों पर आक्रमण माना जाएगा। इस रणनीतिक समझौते के बाद से इस्लामाबाद में गैर-जरूरी आत्मविश्वास और अकड़ बढ़ने लगी है। इसी संदर्भ में बोलते हुए पूर्व सैन्य प्रमुख ने आगाह किया कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते अक्सर देशों में शक्ति का मिथ्या बोध पैदा कर देते हैं, जिससे गलत आकलन और गलत फैसले लेने की आशंका बढ़ जाती है और पूरे क्षेत्र की शांति खतरे में पड़ सकती है।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने याद दिलाया कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर हमेशा से आक्रामक और स्पष्ट रुख रखता है। ऑपरेशन सिंदूर, सिंधु जल संधि पर रोक जैसे फैसलों के माध्यम से भारत ने अपनी मंशा पहले ही साफ कर दी है। हालांकि देश केवल उम्मीदों के भरोसे नहीं बैठ सकता, बल्कि उसे हर संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे पूरी तरह तैयार रहना होगा।

पाकिस्तान की पुरानी रणनीतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से छद्म युद्ध और सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल करता आया है। परमाणु हथियारों की मौजूदगी के कारण भले ही प्रत्यक्ष और बड़े युद्ध की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं, लेकिन पाकिस्तान इसी आड़ में आतंकवाद को पोषित करता है। वह सीधे टकराव से बचकर आतंकियों के जरिए परोक्ष वार करने की फिराक में रहता है, जिसमें उसका पूरा ढांचा और वित्तीय सहयोग प्रणाली मुख्य भूमिका निभाती है।

आतंकवाद के इस पूरे तंत्र पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि केवल कुछ खास आतंकी संगठनों को कमजोर करने से सुरक्षा का यह संकट समाप्त नहीं होने वाला है। जब तक कट्टरता की सोच, आतंकवादियों की नई भर्ती, उनकी फंडिंग, ट्रेनिंग और दुष्प्रचार करने वाले संपूर्ण तंत्र को नेस्तनाबूद नहीं किया जाता, तब तक यह खतरा बार-बार सिर उठाता रहेगा। सीमाओं पर बढ़ते तनाव, साइबर अंतरिक्ष और समुद्री मार्गों की बदलती गतिविधियों के बीच भारत हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है और पड़ोसी देश की हरकतों पर पैनी निगाह रखी जा रही है।

सवाल-जवाब

जनरल अनिल चौहान किस पद पर रहे हैं?
जनरल अनिल चौहान भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) हैं।
मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट कब साइन हुआ?
यह समझौता 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच साइन हुआ था।
इस समझौते की मुख्य शर्त क्या है?
इस पैक्ट के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होने पर उसे सभी पर हमला माना जाएगा।
भारत ने पाकिस्तान को कौन से कड़े फैसले के जरिए संदेश दिया है?
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि को रोकने जैसे कदमों के जरिए कड़ा संदेश दिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·25 दिन पहले

गणितीय ज्योतिष और खगोलीय गणनाओं के परिप्रेक्ष्य में, ग्रहों की चाल और राजनीतिक संधियाँ दोनों ही क्षणिक भ्रम पैदा कर सकती हैं। मक्का संयुक्त रक्षा समझौते जैसे कूटनीतिक आयाम अक्सर राष्ट्रों में शक्ति का मिथ्या बोध जगाते हैं, जो गलत निर्णयों का कारण बनता है। भारत की सुरक्षा तैयारियों का यह आकलन केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के उस संवेदनशील गणित को भी दर्शाता है जहाँ तुर्किये और सऊदी अरब के साथ हुए समझौतों के कारण पाकिस्तान का अति आत्मविश्वास उसकी अपनी भूल-चुक और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर संकट बन सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·25 दिन पहले

जनरल चौहान की यह चेतावनी केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक और भू-राजनीतिक निहितार्थ हैं। मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट जैसे नए गठजोड़ पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था और राजकोषीय संकट के बीच एक आभासी सुरक्षा चक्र बनाने की कोशिश हैं। हालांकि, ऐसे रक्षा समझौतों से वित्तीय स्थिरता नहीं आती। यदि इस्लामाबाद कूटनीतिक भ्रम में आकर क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो इससे विदेशी निवेश और वैश्विक वित्तीय बाजारों का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है, जिससे पाकिस्तान का पहले से बदहाल वित्तीय ढांचा और अधिक गहरे संकट में चला जाएगा।

Michael Anderson@michael-anderson·25 दिन पहले

रविकेश के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, वाशिंगटन और वैश्विक वित्तीय संस्थानों का रुख इस संदर्भ में बहुत अहम हो जाता है। पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और भारी विदेशी कर्ज के बीच, तुर्किये और सऊदी अरब के साथ ऐसे रक्षा समझौते केवल अल्पकालिक राजनीतिक राहत दे सकते हैं, लेकिन इनसे आर्थिक बुनियादी ढांचे की कमजोरी दूर नहीं होती। यदि इस्लामाबाद इस कूटनीतिक कवच के भ्रम में कोई रणनीतिक दुस्साहस करता है, तो अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों के और कड़े होने का खतरा पैदा हो जाएगा, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

जनरल चौहान की यह चेतावनी रणनीतिक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुआ तथाकथित मक्का रक्षा समझौता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक नया खतरा बन सकता है, खासकर तब जब इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद और छद्म युद्ध का इस्तेमाल जारी रखे हुए है। कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से, ऐसे बहुपक्षीय सैन्य गठबंधन गलत आकलन को बढ़ावा देते हैं। भारत को अपनी सामरिक चौकियों को मजबूत रखने के साथ-साथ इस उभरते सुरक्षा समीकरण पर पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि आतंकवाद की फंडिंग और नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कानूनी और सैन्य कार्रवाई ही इस क्षेत्र की शांति की एकमात्र गारंटी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 दिन पहले

अर्जुन मेहता का राजनीतिक और भू-रणनीतिक विश्लेषण यह है कि मक्का रक्षा समझौते जैसे बहुपक्षीय गठबंधन दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। हालांकि पाकिस्तान ऐसे समझौतों के दम पर रणनीतिक बढ़त का भ्रम पालता है, लेकिन भारत का मुखर रुख और कड़े नीतिगत कदम इस दुस्साहस को नाकाम करने के लिए पर्याप्त हैं। छद्म युद्ध और आतंकवाद के वित्तीय तंत्र के खिलाफ निरंतर सतर्कता ही क्षेत्रीय सुरक्षा की कुंजी है।

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