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असम के इस जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, एक भी घर में नहीं हुआ बच्चाअसम
15 सित॰ 2026, 7:45 pm (15 दिन पहले)· 1

असम के इस जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, एक भी घर में नहीं हुआ बच्चा

असम के बजाली जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में सौ प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए हैं। इस दौरान क्षेत्र में एक भी घरेलू प्रसव का मामला सामने नहीं आया है।

असम का बजाली जिला मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभरा है। जिले के स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों के दौरान शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं, और अप्रैल से जुलाई के बीच एक भी घर में बच्चे के जन्म की घटना सामने नहीं आई है।

वर्ष-दर-वर्ष बेहतर होते आंकड़े

जिले में पिछले कुछ वर्षों से संस्थागत प्रसव के ग्राफ में लगातार सुधार देखा जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 99.65 प्रतिशत था, जो इसके अगले वर्ष 2025-26 में बढ़कर 99.81 प्रतिशत तक पहुंच गया। अब चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में यह आंकड़ा पूरे सौ प्रतिशत के मुकाम पर पहुंच गया है।

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समीक्षा अवधि के दौरान दर्ज मामलों की संख्या भी इस बदलाव की गवाही देती है। जिला आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 3,167 संस्थागत प्रसव हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 3,321 हो गई। इसके अलावा, चालू वर्ष के अप्रैल से जुलाई के चार महीनों के भीतर कुल 713 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं।

घरेलू प्रसव मामलों में आई भारी गिरावट

संस्थागत प्रसवों में आई इस तेजी के साथ-साथ जिले में घरेलू प्रसव के मामलों में भी भारी कमी दर्ज की गई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान जहां घर पर प्रसव के 11 मामले रिकॉर्ड किए गए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर केवल छह रह गई। इसके बाद, अप्रैल से जुलाई 2026 की अवधि के दौरान एक भी घरेलू प्रसव की सूचना नहीं मिली है।

चिकित्सकों का मानना है कि अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव होने से जच्चा और बच्चा दोनों को प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की देखरेख मिलती है। किसी भी प्रकार की जटिलता आने पर समय पर उचित इलाज मिल जाता है, जिससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह उपलब्धि बेहद अहम हो जाती है।

मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया

राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन आंकड़ों को सार्वजनिक करते हुए बजाली जिले में एक भी घर में प्रसव न होने की बात पर विशेष जोर दिया। कार्यालय की ओर से इस सफलता को असम की स्वास्थ्य सेवाओं की यात्रा में एक और बड़ी उपलब्धि बताया गया है, जो मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और संस्थागत प्रसव की पहुंच बढ़ाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

यह प्रगति राज्य भर में मां और नवजात शिशु के स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने तथा बिना चिकित्सीय निगरानी के होने वाले प्रसवों से जुड़े जोखिमों को कम करने के व्यापक प्रयासों को भी दर्शाती है।

सवाल-जवाब

बजाली जिले ने कितने प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए हैं?
बजाली जिले ने चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में सौ प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए हैं।
अप्रैल से जुलाई के बीच जिले में कितने घरेलू प्रसव हुए?
अप्रैल से जुलाई के बीच की अवधि में जिले में एक भी घरेलू प्रसव दर्ज नहीं किया गया।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले में कितने संस्थागत प्रसव हुए थे?
वर्ष 2024-25 के दौरान जिले में कुल 3,167 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए थे।
वर्ष 2025-26 में घर पर होने वाले प्रसवों की संख्या कितनी थी?
वर्ष 2025-26 के दौरान घर पर प्रसव के मामलों की संख्या घटकर छह रह गई थी।
इस उपलब्धि का मुख्य लाभ क्या है?
संस्थागत प्रसव होने से माताओं और नवजात शिशुओं को प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की देखरेख और जटिलताओं के समय समय पर उचित देखभाल मिलती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·15 दिन पहले

बजाली जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव का यह कीर्तिमान खगोलीय और भौतिक रूप से एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार का संकेत है। गणित ज्योतिष के दृष्टिकोण से, समय और स्थान का उचित समन्वय जच्चा और बच्चा दोनों की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है। जब चिकित्सा विज्ञान और प्रशासनिक योजनाएं सटीक तालमेल बिठाती हैं, तो जन्म के समय ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों को भी सुरक्षित चिकित्सा वातावरण के माध्यम से कम किया जा सकता है। यह प्रशासनिक सफलता आने वाले समय में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·15 दिन पहले

बजाली जिले में शून्य घरेलू प्रसव और शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव का यह आंकड़ा जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में यह प्रशासनिक और चिकित्सा महकमे की एक बड़ी सफलता है। यदि इस मॉडल को अन्य जिलों में भी पूरी कड़ाई से लागू किया जाए, तो राज्य के समग्र स्वास्थ्य संकेतकों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल सकता है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·15 दिन पहले

बजाली जिले का यह प्रशासनिक मील का पत्थर इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे लक्षित सरकारी प्रयासों और जमीनी जागरूकता से स्वास्थ्य व्यवस्था बदली जा सकती है। जब दूर-दराज के क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव सौ फीसदी हो जाते हैं, तो यह न सिर्फ मातृ-श शिशु मृत्यु दर में भारी कमी लाता है, बल्कि सामाजिक व्यवहार में आए सकारात्मक बदलाव को भी रेखांकित करता है। यदि पूर्वोत्तर के अन्य इलाके और राज्य इसी प्रशासनिक दृढ़ता को अपनाएं, तो यह उपलब्धि पूरे क्षेत्रीय स्वास्थ्य ढांचे को एक नया और मजबूत आधार दे सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 दिन पहले

बजाली जिले की यह उपलब्धि प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है, जिससे मातृ-शिशु मृत्यु दर पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। हालांकि, अपराध और कानून-व्यवस्था की बीट पर काम करते हुए हम अक्सर देखते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के समय पर अस्पताल न पहुँच पाने या अवैध झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में कानूनी और आपराधिक मामले बनते हैं। इस शत-प्रतिशत सफलता के बाद अब यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी व्यवस्था राज्य के अन्य दूरदराज के जिलों में भी सख्ती से लागू हो, ताकि किसी भी स्तर पर चिकित्सीय लापरवाही या अवैध प्रैक्टिस के लिए कोई जगह न बचे।

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

बजाली जिले का यह शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव का आंकड़ा न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मानव पूंजी के विकास के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करता है। जब सुरक्षित प्रसव के जरिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुदृढ़ होता है, तो परिवारों पर आने वाला चिकित्सा का वित्तीय बोझ कम होता है, जो अंततः क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता और उत्पादकता में सकारात्मक योगदान देता है। अब चुनौती यह है कि इस मॉडल की वित्तीय और ढांचागत सफलता को अन्य जिलों में भी दोहराया जाए, ताकि राज्य के दूरदराज के इलाकों में भी दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिल सके।

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