असम के कई हिस्सों में बाढ़ की विभीषिका से लोगों को आंशिक राहत मिलने लगी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) द्वारा जारी शाम की रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर घटने से स्थिति में सुधार देखा गया है और प्रभावित जिलों की संख्या घटकर पांच रह गई है। हालांकि पिछले 24 घंटे के दौरान दो और लोगों की जान चली जाने से इस साल बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 89 तक पहुंच गया है। अधिकारियों के मुताबिक हालिया मौतें शिवसागर और गोलाघाट जिलों में दर्ज की गई हैं।
प्रभावित जिलों की स्थिति और जनजीवन पर असर
आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, असम के पांच जिलों चराइदेव, धेमाजी, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर में अभी भी 1,22,100 से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। स्थिति में सोमवार की तुलना में कुछ सुधार हुआ है, जब छह जिलों की 1.28 लाख से अधिक आबादी इससे प्रभावित थी। वर्तमान में शिवसागर जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां लगभग 60,000 लोग जलभराव की समस्या का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा चराइदेव जिले में 31,000 और जोरहाट जिले में 20,000 नागरिक बाढ़ से जूझ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 365 गांव अभी भी पानी में डूबे हुए हैं।
राहत कार्य और खाद्य सामग्री का वितरण
बाढ़ पीड़ितों को सहायता पहुंचाने के लिए प्रशासन व्यापक स्तर पर राहत अभियान चला रहा है। राज्य के चार जिलों में 55 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इन शिविरों में वर्तमान में 17,857 बाढ़ प्रभावित लोगों को ठहराया गया है और उनकी देखभाल की जा रही है। पीड़ितों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए पिछले 24 घंटे में 99.63 क्विंटल चावल, 18.47 क्विंटल दाल, 6.24 क्विंटल नमक तथा 608.83 लीटर सरसों तेल वितरित किया गया है।
कृषि, बुनियादी ढांचे और मवेशियों को पहुंचा भारी नुकसान
बाढ़ के तेज बहाव ने राज्य की कृषि व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचाया है। एएसडीएमए की रिपोर्ट के अनुसार, 15,342.92 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। विभिन्न जिलों में सड़कों, पुलों और नदी तटबंधों को भारी क्षति पहुंची है। नदियों के जलस्तर की बात करें तो धानसिरी नदी नुमालीगढ़ में अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके साथ ही, पूरे राज्य में 26,575 घरेलू पशु और मुर्गियां भी इस आपदा की चपेट में आई हैं।



















