राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उत्तराखंड के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेते हुए खुफिया तंत्र से जुड़े गंभीर जोखिमों पर चर्चा की। इस संबोधन के दौरान उन्होंने सिक्किम में अंजाम दिए गए एक अत्यंत संवेदनशील ऑपरेशन के उस तनावपूर्ण क्षण को उजागर किया, जिसने खुफिया अधिकारियों के समक्ष पेश आने वाले अप्रत्याशित खतरों को रेखांकित कर दिया।
सिक्किम के ऐतिहासिक अभियान का अनुभव
भारतीय खुफिया अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण अक्सर विशेष पहचान रखने वाले अजीत डोभाल ने बताया कि सिक्किम के उस अहम मिशन के दौरान भारतीय एजेंट सक्रिय रूप से तैनात थे। रणनीतिक रूप से बेहद जटिल इस अभियान के दौरान एक ऐसा मोड़ आया जब अचानक स्थिति पूरी तरह बदल गई और मिशन से जुड़े कर्मियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया।
चीनी सेना की कार्रवाई और उत्पन्न हुआ संकट
अभियान के दौरान उस वक्त भारी अनिश्चितता फैल गई जब चीन की सेना ने भारतीय एजेंटों की पूरी टीम को अपनी गिरफ्त में ले लिया। इस आकस्मिक घटनाक्रम ने समूची सुरक्षा रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे और मौके पर मौजूद कर्मियों के लिए हर गुजरता पल अत्यंत तनावपूर्ण बन गया था।
मुश्किल मोड़ और मिशन का परिणाम
उस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति को याद करते हुए अजीत डोभाल ने स्पष्ट किया कि जब टीम को पकड़ा गया, तब उन्हें आंतरिक रूप से यह आशंका होने लगी थी कि उनका पेशेवर सफर वहीं समाप्त हो जाएगा। हालांकि, अप्रत्याशित परिस्थितियों और रणनीतिक मोड़ के चलते हालात बदले और उन्होंने माना कि भाग्य को कोई दूसरा परिणाम मंजूर था, जिससे संकट का समाधान संभव हो सका।


















