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असम में बाढ़ से राहत के बीच जान गंवाने वालों का आंकड़ा 105 पहुंचा, 31 हजार से ज्यादा लोग अब भी प्रभावितअसम
18 अग॰ 2026, 3:16 pm (44 दिन पहले)· 2

असम में बाढ़ से राहत के बीच जान गंवाने वालों का आंकड़ा 105 पहुंचा, 31 हजार से ज्यादा लोग अब भी प्रभावित

असम में बाढ़ के हालातों में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन एक और व्यक्ति की मौत के साथ इस साल जान गंवाने वालों की कुल संख्या 105 हो गई है। राज्य में अभी भी 31 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं।

असम में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है, हालांकि इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक और व्यक्ति की मौत होने से इस साल राज्य में बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 105 तक पहुंच गया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, ताजा मौत शिवसागर जिले में हुई है, जहां बाढ़ के पानी में डूबने से एक व्यक्ति की जान चली गई।

कितने लोग और कौन से जिले हैं सबसे ज्यादा प्रभावित

राज्य के चार प्रमुख जिलों—गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर में अभी भी लगभग 31,900 लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। इनमें नगांव जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित बना हुआ है, जहां करीब 20,000 लोग संकट में हैं। इसके बाद जोरहाट में 5,000 से अधिक और शिवसागर में 4,500 से ज्यादा प्रभावित निवासी इस आपदा का सामना कर रहे हैं। हालांकि, रविवार के आंकड़ों की तुलना में स्थिति में काफी सुधार हुआ है, जब पांच जिलों में लगभग 52,000 लोग प्रभावित थे।

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राहत शिविर और बुनियादी ढांचे को नुकसान

विस्थापित हुए लोगों की मदद के लिए प्रशासन की ओर से चार जिलों में कुल 15 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनके जरिए 2,782 प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाई जा रही है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन के मुताबिक, वर्तमान में राज्यभर में 147 गांव पानी में डूबे हुए हैं और 3,198.77 हेक्टेयर कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बाढ़ के पानी के कारण कई जिलों में तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी क्षति पहुंची है। बाढ़ के इस प्रकोप की वजह से राज्यभर में 16,323 पालतू पशुओं और मुर्गियों पर भी बुरा असर पड़ा है।

वित्तीय सहायता और सरकारी कदम

इस बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को जानकारी दी कि नुकसान का विस्तृत आकलन किए जाने के बाद अब तक 96,842 बाढ़ प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। सरकार ने अब तक इस सहायता के वितरण पर 146.26 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों की सूची तैयार करने का काम अभी जारी है और अगले चरण में लगभग 3,000 और परिवारों को इस दायरे में शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ओरुदोई योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 2,500 रुपये दिए गए हैं, और बाढ़ के बाद अपने घरों को लौट रहे परिवारों को सहारा देने के लिए सरकार सीधे वित्तीय सहायता का उपयोग कर रही है।

सवाल-जवाब

असम में इस साल बाढ़ से अब तक कुल कितने लोगों की मौत हुई है?
असम में बाढ़ के कारण इस साल मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 105 हो गई है।
वर्तमान में राज्य में कितने लोग बाढ़ से प्रभावित हैं?
असम के चार जिलों में अभी भी लगभग 31,900 लोग बाढ़ से प्रभावित बने हुए हैं।
कौन सा जिला सबसे अधिक प्रभावित है?
नगांव जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित है, जहां लगभग 20,000 लोग आपदा की चपेट में हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों को कितनी वित्तीय सहायता दी जा रही है?
सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जा रही है।
विस्थापितों के लिए कितने राहत शिविर चलाए जा रहे हैं?
प्रशासन द्वारा चार जिलों में कुल 15 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 दिन पहले

असम में बाढ़ से 105 मौतों का आंकड़ा और 147 गांवों का अब भी जलमग्न रहना यह दर्शाता है कि आपदा के बाद का संकट और विस्थापन कितना गंभीर है। हालांकि शासन स्तर पर 96 हजार से अधिक परिवारों को 15,000 रुपये की वित्तीय सहायता और राहत शिविरों के संचालन जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन कृषि भूमि को पहुंचे भारी नुकसान और बुनियादी ढांचे की क्षति के बाद कानून-व्यवस्था और पुनर्वास प्रक्रिया पर पैनी नजर रखनी होगी, ताकि राहत सामग्री का वितरण पारदर्शी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·43 दिन पहले

असम में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए केवल फौरी वित्तीय राहत या एकमुश्त सहायता पर्याप्त नहीं है। ब्रह्मपुत्र घाटी में हर साल आने वाली इस आपदा से निपटने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है। तटबंधों की मजबूती, जल निकासी प्रणालियों का आधुनिकीकरण और कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान की भरपाई के लिए एक मजबूत पुनर्वास रणनीति ही यह तय करेगी कि राज्य भविष्य में ऐसे संकटों से कितनी प्रभावी ढंग से निपटता है।

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