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असम में तीन स्तरीय कैंसर उपचार नेटवर्क से मरीजों को मिलेगा घर के नजदीक किफायती इलाजअसम
5 सित॰ 2026, 9:43 pm (25 दिन पहले)· 2

असम में तीन स्तरीय कैंसर उपचार नेटवर्क से मरीजों को मिलेगा घर के नजदीक किफायती इलाज

असम सरकार मरीजों को घर के पास ही स्क्रीनिंग से लेकर विशेष इलाज तक की सुविधा देने के लिए तीन स्तरीय कैंसर उपचार नेटवर्क तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कोकराझार कैंसर केयर सेंटर को इसका उदाहरण बताया।

असम के कैंसर मरीजों को अब बड़े शहरों के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार एक तीन स्तरीय कैंसर देखभाल नेटवर्क तैयार कर रही है, जिसका मकसद मरीजों को उनके घर के पास ही सस्ता और भरोसेमंद इलाज देना है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।

स्क्रीनिंग से लेकर फॉलोअप तक, तीन चरणों में बंटी सुविधा

हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखी पोस्ट में बताया कि राज्य का बढ़ता कैंसर केयर नेटवर्क सिर्फ किफायती इलाज पर ही नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए ज्यादा सहज और संवेदनशील सुविधाएं देने पर भी केंद्रित है। तीन स्तरीय ढांचे में सबसे पहले स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान आती है, उसके बाद डायग्नोसिस और इलाज का चरण आता है, और आखिर में इलाज के बाद की फॉलोअप देखभाल शामिल है। सारी सुविधाएं कुछ बड़े अस्पतालों में सीमित रखने के बजाय स्वास्थ्य व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों पर फैलाई जा रही हैं, ताकि हर चरण पर मरीज को नजदीकी इलाज मिल सके।

कोकराझार सेंटर बना मॉडल उदाहरण

हिमंत बिस्वा सरमा ने कोकराझार कैंसर केयर सेंटर को इस पूरे मॉडल के काम करने का उदाहरण बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह तीन स्तरीय कैंसर केयर ग्रिड मरीजों और उनके साथ आए परिजनों के प्रति देखभाल भरे रवैये के साथ "सबसे किफायती दरों पर सबसे अच्छा इलाज" दिलाने में मदद कर रहा है, और इसमें उन्होंने राज्य की कैंसर केयर एजेंसी केयरअसम को भी टैग किया। अधिकारियों के मुताबिक कोकराझार की यह सुविधा खासतौर पर पश्चिमी असम और आसपास के इलाकों के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगी, क्योंकि इससे कैंसर की जांच और इलाज के लिए होने वाली लंबी यात्रा कम हो जाएगी।

टाटा ट्रस्ट्स के साथ मिलकर हो रहा विस्तार

यह पूरा नेटवर्क टाटा ट्रस्ट्स के साथ साझेदारी में तैयार किया जा रहा है, और कैंसर केयर की सुविधाएं असम के सिर्फ एक या दो बड़े शहरों तक सीमित न रखकर राज्य के कई अलग-अलग हिस्सों में खड़ी की जा रही हैं।

पूर्वोत्तर में कैंसर का बढ़ता बोझ बना वजह

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब असम समेत पूरे पूर्वोत्तर भारत में कैंसर के मामलों का बोझ लगातार ऊंचा बना हुआ है। अब तक इस इलाके के मरीजों को विशेष इलाज के लिए पूर्वोत्तर से बाहर देश के बड़े शहरों तक जाना पड़ता रहा है। इतनी दूर का सफर मरीज और परिवार, दोनों पर पैसे, समय और मानसिक तनाव का बोझ बढ़ा देता है। सरकार की यह विकेंद्रीकृत रणनीति इसी दिक्कत को दूर करने के लिए है, ताकि जरूरी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही मौजूद हों और मरीजों को गिनी-चुनी विशेष अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े।

शुरुआती पहचान और जागरूकता पर भी बराबर जोर

ढांचागत विस्तार के साथ साथ राज्य सरकार स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी उतना ही ध्यान दे रही है, क्योंकि इलाज के नतीजों में इनकी भूमिका उतनी ही अहम मानी जाती है। सरकार का मकसद असम में एक ऐसा समग्र कैंसर केयर तंत्र खड़ा करना है जिसमें बचाव, शुरुआती जांच, विशेष इलाज और फॉलोअप देखभाल सब एक साथ जुड़े हों, ताकि शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह के इलाकों के मरीजों तक किफायती और सुलभ सुविधा पहुंच सके।

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सवाल-जवाब

असम का तीन स्तरीय कैंसर केयर नेटवर्क क्या है?
यह एक ऐसा ढांचा है जिसमें कैंसर की स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान, डायग्नोसिस व इलाज, और फॉलोअप देखभाल को कुछ बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय स्वास्थ्य व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों पर फैलाया गया है।
इस विस्तार की जानकारी किसने दी?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी।
सरमा ने किस सुविधा को उदाहरण के तौर पर बताया?
उन्होंने कोकराझार कैंसर केयर सेंटर को इस मॉडल के काम करने का उदाहरण बताया।
असम इस नेटवर्क को किसके साथ मिलकर बना रहा है?
राज्य टाटा ट्रस्ट्स के साथ साझेदारी में इस नेटवर्क का विस्तार कर रहा है।
पूर्वोत्तर को ऐसे नेटवर्क की जरूरत क्यों है?
असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में कैंसर का बोझ ऊंचा रहा है, और मरीजों को अब तक विशेष इलाज के लिए इलाके से बाहर बड़े शहरों में जाना पड़ता रहा है।
कोकराझार सेंटर से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा?
पश्चिमी असम और आसपास के इलाकों के मरीजों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे कैंसर की जांच और इलाज के लिए होने वाली यात्रा कम होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

असम सरकार की यह विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य पहल पूर्वोत्तर राज्यों में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है। जब सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को स्थानीय स्तर पर मजबूत किया जाता है, तो इससे न केवल मरीजों का आर्थिक बोझ कम होता है, बल्कि समय पर सही निदान मिलने से जीवन रक्षा की संभावना भी काफी हद तक बढ़ जाती है। टाटा ट्रस्ट्स के साथ इस साझेदारी और तीन-स्तरीय ग्रिड के सफल क्रियान्वयन से सुदूर इलाकों के नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 दिन पहले

यह विकेंद्रीकृत ग्रिड मॉडल इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी क्षेत्रीय स्वास्थ्य असमानताओं को पाटने में मददगार हो सकती है। पूर्वोत्तर में कैंसर के उच्च प्रसार को देखते हुए, ऐसी नीतिगत पहलें न केवल वित्तीय तनाव कम करती हैं, बल्कि सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को सुगम बनाकर शासन और जनहित के मोर्चे पर एक बड़ा नीतिगत बदलाव लाती हैं।

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