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असम विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल ईवीएम की विश्वसनीयता पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय में सुनवाई शुरूअसम
19 सित॰ 2026, 12:26 pm (12 दिन पहले)· 0

असम विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल ईवीएम की विश्वसनीयता पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू

असम विधानसभा चुनाव 2026 में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माइक्रोचिप्स और प्रोग्रामिंग की निष्पक्षता को लेकर दायर जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर अदालत विचार कर रही है।

असम विधानसभा चुनाव 2026 में इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की वैधानिक स्वीकार्यता और तकनीकी विश्वसनीयता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय के समक्ष प्रारंभिक बहस शुरू हुई। अदालत वर्तमान में इस पहलू का परीक्षण कर रही है कि क्या इस याचिका को सुनवाई के लिए विधिवत स्वीकार किया जा सकता है।

यह कानूनी चुनौती असम जातीय परिषद के नेता जियाउर रहमान तथा कांग्रेस नेताओं गुप्तमणि शर्मा और रिपुन बोरा द्वारा संयुक्त रूप से पेश की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मतदान मशीनों में प्रयुक्त तकनीकी घटकों, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर उपकरणों और माइक्रोचिप्स की आंतरिक कार्यप्रणाली के साथ ही प्रोग्रामिंग व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह प्रकट किया है।

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सेमीकंडक्टर तकनीक और सोर्स कोड पर उठाए गए सवाल

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह मामला मतदान उपकरणों से जुड़ी पूर्ववर्ती याचिकाओं की तुलना में भिन्न आधारों पर टिका है। इसमें मशीनों के भीतर लगे सेमीकंडक्टर घटकों की वास्तविक बनावट और उनकी स्वतंत्र जांच की अनुपलब्धता को मुख्य आधार बनाया गया है। याचिका में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ईवीएम के सोर्स कोड को सार्वजनिक सत्यापन के लिए सुलभ न कराए जाने की नीति पर भी आपत्ति दर्ज की गई है।

इसके साथ ही याचिका में एक जापानी सेमीकंडक्टर फर्म और राज्य सरकार के निवेश प्रयासों के बीच कथित संबंधों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। रहमान का दावा है कि इस विदेशी प्रतिष्ठान के प्रतिनिधियों ने जनवरी 2025 में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के जापान दौरे के समय उनसे भेंट की थी। उल्लेखनीय है कि संबंधित जापानी कंपनी को भी इस न्यायिक प्रक्रिया में एक पक्षकार बनाया गया है।

मतदान पैटर्न और आगामी न्यायिक कार्यवाही

अदालत में प्रस्तुत याचिका में विधानसभा चुनाव के आधिकारिक मतदान आंकड़ों का भी उल्लेख है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मतदान दिवस पर एक तय समयावधि में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के भीतर एकसमान वोटिंग पैटर्न दर्ज किया गया था, जिसकी गहन अदालती जांच आवश्यक है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि ये तमाम बिंदु केवल याचिकाकर्ताओं के दावे हैं और उच्च न्यायालय ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

शुक्रवार को हुई शुरुआती अदालती बैठक के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं तथा भारत निर्वाचन आयोग के कानूनी प्रतिनिधियों ने अपनी दलीलें रखीं। मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी स्वीकार्यता पर अगली विस्तृत सुनवाई 4 नवंबर के लिए मुकर्रर की है। रहमान ने बताया कि अदालत ने इसे एक अत्यंत गंभीर विषय माना है, जिसके कई तार सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों में पहले से विचाराधीन या निपटाए गए मामलों से जुड़ते हैं। अगली बैठक में असम सरकार भी अपना पक्ष रखेगी।

सवाल-जवाब

गुवाहाटी उच्च न्यायालय में किस विषय पर सुनवाई हो रही है?
अदालत 2026 के असम विधानसभा चुनाव में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर विचार कर रही है।
यह जनहित याचिका किसने दायर की है?
यह याचिका असम जातीय परिषद के नेता जियाउर रहमान और कांग्रेस पार्टी के नेताओं गुप्तमणि शर्मा व रिपुन बोरा द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने मशीनों को लेकर मुख्य आरोप क्या लगाए हैं?
याचिकाकर्ताओं ने मशीनों में लगे सेमीकंडक्टर उपकरणों, माइक्रोचिप्स की पारदर्शिता और सार्वजनिक रूप से सोर्स कोड उपलब्ध न कराए जाने पर सवाल उठाए हैं।
इस मामले में जापानी कंपनी का क्या संदर्भ है?
याचिका में दावा किया गया है कि एक जापानी सेमीकंडक्टर कंपनी के प्रतिनिधियों ने जनवरी 2025 में असम के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी, और उस कंपनी को मामले में पक्षकार बनाया गया है।
उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई कब होगी?
मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की स्वीकार्यता पर अगली सुनवाई 4 नवंबर को करेगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·11 दिन पहले

गुवाहाटी उच्च न्यायालय में ईवीएम के हार्डवेयर और सोर्स कोड को लेकर शुरू हुई यह सुनवाई भारतीय लोकतंत्र में तकनीकी पारदर्शिता की एक नई बहस को जन्म दे रही है। इसमें एक जापानी सेमीकंडक्टर फर्म का नाम आने और मतदान के पैटर्न पर सवाल उठने से यह मामला केवल एक राज्य का न रहकर अंतरराष्ट्रीय और तकनीकी भू-राजनीति से भी जुड़ता दिख रहा है। 4 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या अदालतों के दायरे में चुनाव आयोग की तकनीकी प्रणालियों की ऐसी गहन फोरेंसिक समीक्षा संभव है या नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·11 दिन पहले

यह मामला ईवीएम पर पारंपरिक राजनीतिक बहसों से आगे निकलकर तकनीकी और भू-राजनीतिक स्तर पर पहुँच गया है। सोर्स कोड की पारदर्शिता, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला और जापानी फर्म के निवेश संबंधों को कानूनी चुनौती का आधार बनाना इसे बेहद जटिल बनाता है। यदि अदालत इस जनहित याचिका को सुनवाई योग्य मानती है, तो चुनाव आयोग की तकनीकी और वैधानिक नीतियों पर इसका दूरगामी असर देखने को मिल सकता है। अगली सुनवाई में निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार का रुख इस कानूनी लड़ाई की दिशा तय करेगा।

Rohan Gupta@rohan-gupta·11 दिन पहले

यह मामला केवल चुनावी मशीन की विश्वसनीयता तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल सप्लाई चेन और हार्डवेयर पारदर्शिता के तकनीकी पहलुओं को कानूनी दायरे में खींचता है। यदि न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई जारी रखता है, तो यह देश भर में चुनाव तकनीक और सोर्स कोड ऑडिट नीति की कानूनी समीक्षा का एक नया मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 दिन पहले

यह कानूनी मामला केवल ईवीएम की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक विदेशी सेमीकंडक्टर फर्म को पक्षकार बनाना और सोर्स कोड की पारदर्शिता जैसे तकनीकी पहलू शामिल हैं, जो चुनाव प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा के दायरे को एक नए स्तर पर ले जाते हैं। आगामी चार नवंबर को उच्च न्यायालय तय करेगा कि यह जनहित याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, जिसके बाद निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया से इस मामले की अगली दिशा तय होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·11 दिन पहले

असम उच्च न्यायालय में चल रही यह सुनवाई भारत के चुनावी इतिहास में तकनीकी और भू-आर्थिक गलियारों को एक साथ जोड़ती है। जब किसी याचिका में विदेशी सेमीकंडक्टर फर्मों, चिप प्रोग्रामिंग और सोर्स कोड की पारदर्शिता जैसे वैश्विक सप्लाई-चेन से जुड़े मुद्दे उठाए जाते हैं, तो वित्तीय बाजारों और डिजिटल एसेट्स स्पेस की तरह ही लोकतांत्रिक संस्थानों में भी तकनीकी जवाबदेही की मांग तेज हो जाती है। चार नवंबर की अगली सुनवाई तय करेगी कि न्यायपालिका तकनीकी मामलों में कितनी गहराई तक दखल देती है, जिसका असर भविष्य की चुनावी तकनीक और कॉर्पोरेट-सरकारी निवेश नीतियों पर भी पड़ सकता है।

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