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अटरू पालिका अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस की निशा नैनीवाल विजयी, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई हारेराजस्थान
22 सित॰ 2026, 12:23 pm (3 दिन पहले)· 3

अटरू पालिका अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस की निशा नैनीवाल विजयी, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई हारे

बारां जिले की नवगठित अटरू नगरपालिका में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी को 3 मतों से हरा दिया।

बारां जिले की नवगठित अटरू नगरपालिका के पहले अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस ने बाजी मारते हुए स्थानीय निकाय पर कब्जा जमा लिया है। सोमवार को संपन्न हुए मतदान में कांग्रेस प्रत्याशी निशा नैनीवाल ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के सगे छोटे भाई कृष्ण मुरारी दिलावर को पराजित कर दिया। इस चुनाव में निशा नैनीवाल को 14 वोट हासिल हुए, जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार कृष्ण मुरारी दिलावर के पक्ष में 11 मत पड़े। इस तरह तीन वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर निशा नैनीवाल अटरू नगर पालिका की पहली निर्वाचित अध्यक्ष बन गई हैं।

नवगठित नगरपालिका के पहले चुनाव में सियासी घमासान

अटरू के नगर पालिका बनने के पश्चात यह पहला मौका था जब यहां निकाय स्तर के चुनाव आयोजित कराए गए। यही वजह थी कि सूबे भर की सियासी निगाहें इस मुकाबले पर टिकी हुई थीं। अटरू नगर पालिका क्षेत्र में कुल 25 वार्ड शामिल हैं। हाल ही में संपन्न हुए पार्षद पद के चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 25 में से 14 वार्डों में जीत दर्ज की थी और स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा छू लिया था। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के खाते में 10 वार्ड गए थे, जबकि एक वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार ने कामयाबी हासिल की थी।

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क्रॉस वोटिंग रोकने में सफल रही कांग्रेस

अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सूबे के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी दिलावर पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा था। उधर कांग्रेस ने निशा नैनीवाल को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया। अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। मतदान के दौरान भारतीय जनता पार्टी निर्दलीय पार्षद का समर्थन जुटाने में तो कामयाब रही, जिससे उनके प्रत्याशी को 11 वोट मिले, लेकिन वह कांग्रेस के खेमे में कोई सेंधमारी नहीं कर पाई। कांग्रेस के सभी 14 पार्षदों ने एकजुट रहते हुए अपनी पार्टी की प्रत्याशी निशा नैनीवाल के पक्ष में मतदान किया। नतीजतन नैनीवाल ने पूरे 14 वोटों के साथ अध्यक्ष की कुर्सी अपने नाम कर ली।

टिकट बंटवारे से ही सुर्खियों में था मुकाबला

भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी दिलावर अटरू के वार्ड नंबर 5 से पार्षद निर्वाचित होकर आए हैं। वे इलाके के कोई नए चेहरे नहीं हैं, बल्कि लंबे अरसे से स्थानीय राजनीति का हिस्सा रहे हैं। वे चरड़ाना ग्राम पंचायत के लगातार 4 बार सरपंच भी रह चुके हैं। पार्षद चुनाव के दौरान वार्ड नंबर 5 की सीट उस वक्त खासी चर्चा में आ गई थी, जब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर ने भी इसी वार्ड से भाजपा का टिकट मांगा था। एक ही परिवार के भीतर चाचा और भतीजे दोनों के एक ही सीट से दावेदारी करने के कारण यह मामला पार्टी और जनता के बीच खींचतान का विषय बन गया था। हालांकि बाद में संगठन ने मंत्री के भाई कृष्ण मुरारी को अधिकृत प्रत्याशी बनाया और वे पार्षद का चुनाव जीतने में सफल रहे थे, लेकिन अध्यक्ष पद की अंतिम जंग में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा।

सवाल-जवाब

अटरू नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव में किसकी जीत हुई?
अटरू नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार निशा नैनीवाल ने जीत दर्ज की।
निशा नैनीवाल को कितने वोट मिले और हारने वाले प्रत्याशी कौन थे?
निशा नैनीवाल को 14 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी को 11 वोट प्राप्त हुए।
अटरू नगर पालिका में कुल कितने वार्ड हैं और उनमें दलों की क्या स्थिति थी?
अटरू नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं, जिनमें से 14 में कांग्रेस, 10 में भाजपा और 1 में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी।
कृष्ण मुरारी दिलावर किस वार्ड से पार्षद चुने गए थे?
कृष्ण मुरारी दिलावर अटरू के वार्ड नंबर 5 से पार्षद चुने गए थे और वे चरड़ाना ग्राम पंचायत के 4 बार सरपंच भी रह चुके हैं।
अटरू नगर पालिका अध्यक्ष का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित था?
अटरू नगर पालिका अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·2 दिन पहले

शिक्षा मंत्री के भाई का चुनाव हारना वाकई बड़ा उलटफेर है। कांग्रेस ने अपने पाले में सेंध नहीं लगने दी, यह उनकी मजबूत रणनीति दिखती है। वैसे, क्या मंत्री जी के परिवार के भीतर की कलह ने भी इस हार में कोई भूमिका निभाई?

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

शिक्षा मंत्री के गृह जिले में ही हार जाना भाजपा के लिए बड़ा झटका है।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

अर्जुन, हार तो ठीक है पर मंत्री के भाई और बेटे में टिकट की जो खींचतान पहले हुई थी, वही इस हार की असली शुरुआत लग रही है।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

शिक्षा मंत्री के घर के पास ही इतनी बड़ी मात मिल जाना सचमुच चौंकाने वाला है। मंत्री जी के परिवार के ही सदस्य मैदान में थे, फिर भी पार्टी अपनी बढ़त को जीत में नहीं बदल पाई। क्या स्थानीय संगठन में अंदरखाने कोई नाराजगी चल रही थी या फिर कांग्रेस की रणनीति सचमुच इतनी मजबूत थी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

रोहन भाई, चौदह पार्षदों का एक भी वोट न टूटना सचमुच कमाल है, कांग्रेस ने अपनी रणनीति एकदम पक्की रखी थी।

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