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अयोध्या के दान पात्रों में लगी सेंध पर SIT की शुरुआती रिपोर्ट सरकार के पास, असली जांच अभी बाकीउत्तर प्रदेश
24 जून 2026, 6:09 pm (34 दिन पहले)· 2

अयोध्या के दान पात्रों में लगी सेंध पर SIT की शुरुआती रिपोर्ट सरकार के पास, असली जांच अभी बाकी

राम मंदिर के दान पात्रों में चोरी की जांच कर रही SIT ने प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल अब भी कायम हैं। साथ ही लखनऊ अग्निकांड के बाद कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा और NEET री-एग्ज़ाम में फर्जीवाड़े का खुलासा भी सुर्खियों में है।

राम मंदिर के दान पात्रों से रुपये पैसे की चोरी की जांच कर रही SIT ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। चूंकि यह सिर्फ प्राथमिक रिपोर्ट है, इसलिए जांच की आंच अभी राम मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों तक नहीं पहुंची। इसी बीच ट्रस्ट के सचिव चंपत राय इस पूरे विवाद के शुरू होने के बाद पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर दिखे, मौका था शेषावतार मंदिर के ध्वजारोहण समारोह का। दिलचस्प यह रहा कि ट्रस्ट से जुड़े वे तमाम चेहरे, जो शक के घेरे में हैं, एक साथ मंच पर मौजूद थे, जैसे कुछ हुआ ही न हो।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि दान पात्रों में डाले गए पैसे की चोरी लगातार होती रही और व्यवस्था संभालने वालों को भनक तक नहीं लगी, यह कैसे मुमकिन है? गिनती के जो नियम कायदे तय थे, उनकी अनदेखी होती रही और प्रबंधन को इसका भी पता नहीं चला, यह बात गले नहीं उतरती।

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जेबों में नोटों की गड्डियां भरकर बाहर निकल रहे लोगों की तलाशी तक नहीं हुई। गिनती के काम में लगे लोग मकान बनाते रहे, दुकानें खरीदते रहे, नई गाड़ियां ले आए, यह सब आसपास के लोगों ने देखा, पर ट्रस्ट के प्रबंधन को कुछ नजर नहीं आया।

हैरानी की बात यह भी है कि जब कुछ लोगों ने आकर चोरी की जानकारी दी, तब भी ट्रस्ट के कर्ता-धर्ता ने उस पर भरोसा नहीं किया। लोगों के घर से नकदी मिली, बैंक खातों में मोटी रकम जमा मिली, फिर भी ट्रस्ट के मुखिया को यह यकीन नहीं हुआ कि उनके करीबी लोग भगवान राम के घर में हाथ साफ कर सकते हैं।

चंपत राय ने SIT बनाने के लिए चिट्ठी लिखी, खुद गवाही दी, जांच टीम को सब कुछ बता दिया और यह मानकर बैठ गए कि उनकी जिम्मेदारी पूरी हो गई। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। यह तो सिर्फ शुरुआती रिपोर्ट है, असली जांच अभी होनी बाकी है।

अब असली सवाल इन बिंदुओं पर टिके हैं। किस किसने अपने रिश्तेदारों को गिनती के काम में लगवाया? CEO की नियुक्ति को किसने अटकाया? मिंट कॉरपोरेशन को बाहर का रास्ता किसने दिखाया? और दान पात्रों में हुई चोरी की जानकारी किसने दबाई? इन सब बातों की जांच जरूरी है। इस पाप में जो भी भागीदार रहे हैं, सबका हिसाब होना चाहिए।

सबसे चौंकाने वाली बात तो यह रही कि चंपत राय ने रामलला के दरबार में खड़े होकर चढ़ावे की चोरी पर एक शब्द नहीं कहा। उन्होंने लखनऊ के अग्निकांड में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना जरूर की, लेकिन चढ़ावा चुराने वालों को कड़ी सजा मिले, इसके लिए रामलला से प्रार्थना तक नहीं की।

कोचिंग सेंटर या मौत के कुएं?

लखनऊ के एक गेमिंग जोन में आग लगने से 15 नौजवानों की मौत के बाद प्रशासन की नींद टूटी है। पुलिस ने इमारत के मालिक, Pet Shop के मालिक, हूपर्स गेमिंग जोन और एनिमेशन एकेडमी चलाने वाले संचालक के साथ ही आईटी कंपनी चलाने वाले सुरेश साहू को गिरफ्तार किया है। दो आरोपी अब भी फरार हैं।

लखनऊ विकास प्राधिकरण, फायर ब्रिगेड और बिजली विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। प्राधिकरण ने इमारत के मालिक को 15 दिन के भीतर बिल्डिंग गिराने का आदेश भी दिया है।

यह हालत सिर्फ लखनऊ की एक इमारत की नहीं है। देशभर में चल रहे ज्यादातर कोचिंग सेंटरों और कमर्शियल बिल्डिंगों में न तो फायर सेफ्टी का कोई पुख्ता इंतजाम है और न ही इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था।

लखनऊ में हादसा हुआ तो अफसर हरकत में आए और पूरे देश में कोचिंग सेंटरों पर छापे शुरू हो गए। यूपी, बिहार, राजस्थान से लेकर गुजरात तक कोचिंग सेंटरों और गेमिंग जोन का सिक्योरिटी ऑडिट हो रहा है और हर जगह सुरक्षा इंतजामों में भारी लापरवाही सामने आ रही है।

कानपुर विकास प्राधिकरण की टीमों ने 16 अवैध कोचिंग और व्यापारिक संस्थानों को सील कर दिया। यह किसी एक शहर या किसी एक सेंटर की कहानी नहीं है। अहमदाबाद, जयपुर, पटना और गोरखपुर जैसे शहरों में कोचिंग सेंटरों का जायजा लिया गया तो हर जगह फायर सेफ्टी का कोई भरोसेमंद इंतजाम नहीं मिला।

देशभर में कोचिंग सेंटर का मतलब है, न ढंग की इमारत, न इमरजेंसी एग्जिट और न फायर सेफ्टी। ये तो बस कमाई के अड्डे बनकर रह गए हैं, जहां पढ़ने वालों की सुरक्षा का जरा भी ध्यान नहीं रखा जाता। मामला सिर्फ कोचिंग सेंटरों तक सीमित नहीं है। इन सेंटरों में पढ़ने वाले छात्र जिन कमरों और इमारतों में रहते हैं, वे भी सुरक्षित नहीं हैं। वहां भी आग लगती है, बेसमेंट में पानी भर जाता है और कई बार छात्रों की जान तक जा चुकी है।

कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा को लेकर जो हालात सामने आए हैं, उन्हें आधार बनाकर पूरे देश में कोचिंग सेंटरों और हॉस्टल सुविधाओं का ऑडिट होना चाहिए और सख्त गाइडलाइंस बननी चाहिए, जिनका कड़ाई से पालन कराना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी हो।

NEET के मुन्नाभाई कैसे पकड़े गए

बिहार के लखीसराय में NEET री-एग्ज़ाम के दौरान असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दे रहे 9 MBBS छात्रों को गिरफ्तार किया गया। बिहार पुलिस भले ही दावा करे कि उसने NEET में पहुंचे सभी 'मुन्ना भाइयों' को दबोच लिया, लेकिन सच यह है कि पुलिस को इस पूरे खेल की भनक तक नहीं थी।

परीक्षा शुरू हो चुकी थी, तभी दोपहर में बिहार पुलिस मुख्यालय और NTA को एक अनजान शख्स का मेल मिला। मेल में बताया गया कि लखीसराय के केंद्रीय विद्यालय वाले NEET सेंटर पर असली परीक्षार्थी मधुप्रिया की जगह, BHU में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही पूनम परीक्षा दे रही है।

इसके बाद पुलिस हरकत में आई और पूनम को पकड़ा। पूनम ने सच उगल दिया और फिर एक-एक कर MBBS के 9 छात्र दूसरे परीक्षार्थियों की जगह इम्तहान देते पकड़े गए। दरअसल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने छात्रों के बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का ठेका EDCIL कंपनी को दिया था, जिसने यह काम इनोवेटिव व्यू नाम की कंपनी को सौंप दिया। मंगलवार को खुलासा हुआ कि इस कंपनी को 2022 में उत्तर प्रदेश सरकार ब्लैकलिस्ट कर चुकी थी।

2025 में झारखंड और तमिलनाडु की सरकारों ने भी इसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट में डाला था। इसके बावजूद NEET री-एग्ज़ाम में छात्रों की बायोमेट्रिक जांच का ठेका इसी कंपनी को मिल गया। कंपनी ने बायोमेट्रिक चेक करने के लिए पांच-पांच सौ रुपये में स्थानीय लोगों को रख लिया था।

इन्हीं लोगों ने पैसे लेकर असली परीक्षार्थियों की जगह देश के अलग-अलग हिस्सों से बुलाए गए MBBS के नौ छात्रों को परीक्षा केंद्रों में घुसा दिया। कंपनी के स्थानीय स्टाफ ने असली परीक्षार्थियों के बायोमेट्रिक तीनों परीक्षा केंद्रों से दूर खड़ी एक कार में लिए। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा होते ही असली परीक्षार्थियों की जगह MBBS छात्रों को परीक्षा केंद्र भेज दिया गया।

इस मामले में पुलिस ने एक परीक्षार्थी और बायोमेट्रिक कंपनी के 18 कर्मचारियों समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूरे खेल का मास्टरमाइंड पटना मेडिकल कॉलेज के तीसरे साल का छात्र अश्विनी कुमार है। लखीसराय में परीक्षा देने पहुंचे 9 MBBS छात्रों का ब्यौरा भी चौंकाने वाला है।

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज में MBBS फोर्थ ईयर का छात्र मनतोष कुमार, संजीत की जगह परीक्षा देने पहुंचा था। गया के AN मेडिकल कॉलेज में MBBS फोर्थ ईयर का छात्र विवेक कुमार भी परीक्षा देने आया, पर पकड़ा गया। सतना मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर का छात्र हिमांशु कुमार, शुभम वर्मा की जगह बैठा था।

AIIMS रायबरेली में फोर्थ ईयर का छात्र सौरभ झा, ईशान सिंह की जगह परीक्षा देने गया था। BHU में नर्सिंग का कोर्स कर रही पूनम कुमारी, मधु प्रिया बनकर लखीसराय परीक्षा देने आई थी। दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज में MBBS की इंटर्नशिप कर रहा अमन अग्रवाल भी इस रैकेट का हिस्सा था। ओडिशा के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में आयुर्वेद की पढ़ाई कर रही चंचल कुमारी, लखीसराय में नंदिनी राज की जगह परीक्षा देने पहुंची थी। इन सबको पटना के अश्विनी कुमार ने ही जुटाया था।

एक परीक्षार्थी को पास कराने के लिए 60 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसमें से 25 लाख रुपये अश्विनी कुमार को मिलने थे। इनके साथ दो दलाल भी पकड़े गए हैं। लेकिन एक सवाल का जवाब अब भी नहीं मिला है कि पैसों के लालच में इन मेडिकल छात्रों ने अपना करियर क्यों दांव पर लगाया, जबकि वे खुद डॉक्टर बनने की राह पर थे।

पकड़े गए कई MBBS छात्रों का बैकग्राउंड चौंकाने वाला है। इनमें ज्यादातर मिडिल क्लास परिवारों से हैं और कुछ तो बेहद गरीब हैं। इस खेल के मास्टरमाइंड के पिता किसान हैं, जिन्होंने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी। बेटा मेडिकल की आधी पढ़ाई पूरी कर चुका था। मां-बाप सोच रहे थे कि बेटा डॉक्टर बनेगा तो उनकी मेहनत सफल हो जाएगी, लेकिन बेटा जेल पहुंच गया।

सवाल-जवाब

SIT ने सरकार को क्या सौंपा है?
राम मंदिर के दान पात्रों में चोरी की जांच कर रही SIT ने अपनी शुरुआती यानी प्राथमिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। यह सिर्फ प्रारंभिक रिपोर्ट है, असली जांच अभी बाकी है।
क्या ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी जांच के दायरे में आए हैं?
अभी तक जांच की आंच ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों तक नहीं पहुंची है। सचिव चंपत राय ने SIT बनाने के लिए चिट्ठी लिखी और खुद गवाही भी दी।
लखनऊ के गेमिंग जोन हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
लखनऊ के गेमिंग जोन में लगी आग में 15 नौजवानों की मौत हुई।
लखनऊ हादसे में किन पर कार्रवाई हुई?
पुलिस ने इमारत के मालिक, Pet Shop मालिक, गेमिंग जोन व एनिमेशन एकेडमी के संचालक और सुरेश साहू को गिरफ्तार किया, दो फरार हैं। साथ ही चार अधिकारी निलंबित किए गए और इमारत 15 दिन में गिराने का आदेश दिया गया।
NEET री-एग्ज़ाम में फर्जीवाड़ा कैसे पकड़ा गया?
परीक्षा के दौरान बिहार पुलिस मुख्यालय और NTA को एक अनजान शख्स का मेल मिला, जिसके बाद पूनम पकड़ी गई और कुल 9 MBBS छात्र दूसरों की जगह परीक्षा देते पकड़े गए।
इस NEET रैकेट का मास्टरमाइंड कौन है?
इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पटना मेडिकल कॉलेज के तीसरे साल का छात्र अश्विनी कुमार है।
बायोमेट्रिक जांच में चूक कैसे हुई?
NTA ने बायोमेट्रिक का ठेका EDCIL को दिया, जिसने इसे इनोवेटिव व्यू को सौंपा। यह कंपनी 2022 में यूपी और 2025 में झारखंड व तमिलनाडु में ब्लैकलिस्ट हो चुकी थी, फिर भी इसे ठेका मिला और इसने 500 रुपये में स्थानीय लोग रखे।
एक परीक्षार्थी को पास कराने के लिए कितने पैसे मांगे गए?
एक परीक्षार्थी को पास कराने के लिए 60 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसमें से 25 लाख रुपये अश्विनी कुमार को मिलने थे।
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