अयोध्या जिले में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण निचले इलाकों में गंभीर स्थिति पैदा हो गई है और लोगों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। नदी का पानी फैलने से माझा कला गांव के 100 से अधिक घरों के भीतर पानी घुस चुका है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। गांव के कई रास्ते पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं, जिस वजह से स्थानीय लोगों को आने-जाने के लिए पानी के बीच से ही रास्ता पार करना पड़ रहा है। इस विकट परिस्थिति के कारण न केवल बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र में गंभीर बीमारियों के फैलने और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचने का बड़ा संकट भी मंडरा रहा है।
बाढ़ की मार झेल रही स्थानीय महिला पार्वती ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि बरसात के मौसम में हर साल उन्हें आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में उनके घर के अंदर तक बाढ़ का पानी भर चुका है, जिससे छोटे बच्चों का स्कूल जाना पूरी तरह बंद हो गया है और हर समय बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें महीने में केवल एक बार राहत सामग्री जरूर मिली थी, लेकिन अब उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं बचा है। उनके परिवार के पास अपनी कोई जमीन भी नहीं है, जिसके कारण वे मजबूरी में इस जलभराव के बीच जीवन गुजारने को विवश हैं।
गांव की एक अन्य पीड़ित महिला रीना ने बताया कि इस आपदा की चपेट में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार आए हुए हैं। हर तरफ घरों के अंदर पानी भरा हुआ है और पानी के ठहराव के कारण बीमारियों का अंदेशा लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर से फिलहाल खाने-पीने का राशन तो मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन बाढ़ से जूझ रहे इन लोगों को अन्य बुनियादी और जरूरी सुविधाओं की भी सख्त जरूरत है। लगातार हो रही बारिश और सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है।
दुर्घटनाओं का बना रहता है खतरा
स्थानीय ग्रामीण शंकर निषाद ने स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे लोग किसी नदी के ठीक बीचों-बीच अपना जीवन बसर कर रहे हैं। गांव में छोटे-छोटे बच्चे मौजूद हैं, और ऐसे में किसी भी बच्चे के गहरे पानी में डूब जाने का खतरा हर वक्त बना रहता है। उन्होंने यह भी बताया कि वे लोग काफी लंबे समय से सुरक्षित आवास की मांग करते आ रहे हैं। बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने के बाद नाव ही ग्रामीणों के आने-जाने का एकमात्र मुख्य साधन बचती है। इसी नाव के सहारे लोग खाने-पीने की चीजें, पीने का पानी और जरूरी दवाइयां लेने के लिए बाहर निकलते हैं। उनका सीधा आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने आते हैं, हालात का जायजा लेकर वापस चले जाते हैं लेकिन धरातल पर स्थायी समाधान नहीं होता है।
इन तमाम गंभीर हालातों के बीच जिला अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि सरयू नदी का जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा और अधिक गहरा गया है। जिले की रुदौली, सोहावल और सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र अक्सर बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। स्थिति से निपटने के लिए सभी बाढ़ चौकियों को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है और प्रभावित इलाकों में आवागमन के लिए पर्याप्त नावों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रशासन की तरफ से लगातार भोजन के पैकेट और राहत सामग्री की किटें भी जरूरतमंदों के बीच बांटी जा रही हैं।
फिलहाल सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन की तरफ से बचाव और राहत की तैयारियां जारी हैं, परंतु माझा कला जैसे बाढ़ प्रभावित गांवों में रह रहे परिवारों के लिए सुरक्षित ठिकाना, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सामान्य आवागमन सुनिश्चित करना अभी भी एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है।























