उदयपुर के जाने-माने अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण शिल्पी डॉक्टर इकबाल सक्का ने अपनी अद्भुत कला के दम पर एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। बारह वफात और ईद मिलादुन्नबी के पावन अवसर पर उन्होंने इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों के बेहद सूक्ष्म मॉडल गढ़े हैं। इन कलाकृतियों का आकार मात्र एक मिलीमीटर है, जो दिखने में मूंग के दाने से भी छोटे हैं। सामान्य नजरों से इन्हें देख पाना मुमकिन नहीं है और इनकी बारीक बनावट को निहारने के लिए सूक्ष्म लेंस का सहारा लेना पड़ता है।
सोने और चांदी से तराशे गए पवित्र मॉडल
इस अनूठी कारीगरी के तहत डॉक्टर सक्का ने सोने का इस्तेमाल करते हुए खाना-ए-काबा का बेहद सूक्ष्म प्रतिरूप तैयार किया है। इस छोटी सी रचना में काबा की मीनारों के साथ-साथ सोने का नन्हा दरवाजा भी बखूबी उकेरा गया है। इस पूरे मॉडल को काली मखमल पर स्थापित किया गया है, जिसके लिए उन्होंने खास तौर पर काली पोशाक की रूपरेखा तैयार की है। जब इसे लेंस के जरिए देखा जाता है, तो यह बिल्कुल असली काबा शरीफ जैसा अनुभव कराता है और इसकी हर एक डिटेल साफ नजर आती है.
मदीना शरीफ की बारीक कारीगरी और जन्नती पत्थर
कारीगर के अनुसार, मक्का शरीफ के प्रवेश द्वार की पूर्वी दीवार पर जन्नती पत्थर यानी संग-ए-अस्वद सुसज्जित है। इसी बात का ध्यान रखते हुए उन्होंने अपने बनाए चांदी के मॉडल में भी चांदी के दरवाजे पर संग-ए-अस्वद का सूक्ष्म प्रतीक जोड़ा है। इसके लिए सऊदी अरब से लाए गए एक अति लघु पत्थर को बेहद करीने से तराशकर चांदी की फ्रेम में जड़ा गया है, जो बिना लेंस के देखना असंभव है। इसके अलावा उन्होंने एक मिलीमीटर आकार का मदीना शरीफ भी बनाया है, जिसमें मीनारों के साथ एक मनमोहक हरे रंग का गुंबद शामिल है। गुंबदे खिजरा के ठीक ऊपर एक नन्हीं खिड़की भी गढ़ी गई है, जो इस रचना को जीवंत बनाती है.
भारत और सऊदी अरब की दोस्ती का पैगाम
इन दोनों कलाकृतियों के माध्यम से दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ संबंधों का संदेश भी प्रसारित किया गया है। इन मॉडलों के साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और सऊदी अरब का राष्ट्रीय झंडा भी लगाया गया है। सऊदी झंडे पर अरबी भाषा में ला इलाहा इल्लल्लाह अंकित किया गया है। डॉक्टर इकबाल सक्का की इच्छा है कि वे देश के 140 करोड़ नागरिकों की तरफ से यह अमूल्य कलाकृतियां सऊदी अरब के वली अहद एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान को भेंट करें। इस सिलसिले में उन्होंने दिल्ली स्थित सऊदी दूतावास के राजदूत के नाम पत्र भेजा है और साथ ही प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान को भी आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है.
निर्माण में लगा समय और धातु की मात्रा
इन बेहद सूक्ष्म मॉडलों को मुकम्मल करने में कारीगर को लगभग सात दिन का वक्त लगा। इस पूरी प्रक्रिया में कुल मिलाकर करीब दो ग्राम चांदी और 100 मिलीग्राम सोने का प्रयोग किया गया है, जिसने इस कला को और अधिक अनमोल बना दिया है.





















