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बागेश्वर का गोमती मोटर पुल: छह दशक बाद भी संभाल रहा ट्रैफिकउत्तराखंड
27 सित॰ 2026, 4:18 pm (40 दिन पहले)· 1

बागेश्वर का गोमती मोटर पुल: छह दशक बाद भी संभाल रहा ट्रैफिक

उत्तराखंड के बागेश्वर में गोमती नदी पर बना गोमती मोटर पुल छह दशक से अधिक पुराना होने के बावजूद आज भी यातायात का प्रमुख केंद्र बना हुआ है और राष्ट्रीय राजमार्ग 309A पर वाहनों का भारी दबाव झेल रहा है।

आज के दौर में जब आधुनिक निर्माण कार्यों की मजबूती और स्थायित्व पर अक्सर सवालिया निशान खड़े किए जाते हैं, तब उत्तराखंड का एक ऐतिहासिक पुल अपनी मजबूती की लंबी दास्तान लिख रहा है। सरयू और गोमती नदियों के संगम स्थल के रूप में अपनी पहचान रखने वाले बागेश्वर शहर में गोमती नदी के ऊपर बना गोमती मोटर पुल लगभग 60 से 64 साल पुराना होने के बावजूद आज भी लोगों के आने-जाने का एक मजबूत जरिया बना हुआ है। छह दशक से भी अधिक समय तक लगातार बिना रुके उपयोग में बना रहना इस पुल की निर्माण गुणवत्ता और इसकी उपयोगिता की बड़ी गवाही देता है।

भारत-चीन युद्ध के बाद शुरू हुआ था निर्माण

गोमती मोटर पुल का निर्माण कार्य 1960 के शुरुआती दौर में उस कालखंड में हुआ था जब देश के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के विकास और यातायात के साधनों को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे थे। जिला नागरिक समिति के सदस्य संजय शाह जगाती का कहना है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद रणनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से सीमावर्ती तथा पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की सख्त जरूरत महसूस हुई थी। इसी ऐतिहासिक कालखंड के दौरान बागेश्वर जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में मार्गों और पुलों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जिसके तहत गोमती मोटर पुल का निर्माण अस्तित्व में आया।

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व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी का मुख्य आधार

इस मोटर पुल के निर्माण से स्थानीय स्तर पर आवागमन की तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जिससे आसपास के दूरदराज इलाकों से बागेश्वर बाजार तक नागरिकों और आवश्यक सामग्रियों का आना-जाना बहुत सुगम हो गया। इसका प्रत्यक्ष लाभ इस क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधियों को भी मिला, जिससे व्यापारियों और स्थानीय लोगों के व्यापार को नई गति प्राप्त हुई। यानी यह पुल केवल एक नदी को पार करने का माध्यम भर नहीं रहा, बल्कि यह बागेश्वर के निवासियों के दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों की एक मजबूत धुरी बन गया, जो इतने लंबे समय के बाद भी बदस्तूर जारी है।

बढ़ते ट्रैफिक और राष्ट्रीय राजमार्ग का दबाव

जैसे-जैसे समय बीतता गया, बागेश्वर क्षेत्र में वाहनों के बेड़े में भी लगातार इजाफा दर्ज किया गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि गोमती मोटर पुल महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग 309A पर यातायात की एक अनिवार्य और बेहद अहम कड़ी बन चुका है। शहर के बीचों-बीच गुजरने वाले इस मुख्य मार्ग पर प्रतिदिन अनगिनत छोटे और बड़े वाहन अपनी सेवाएं देते हैं, जिसके कारण इस छह दशक पुराने पुल पर परिवहन का दबाव पिछले दशकों की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गया है।

भारी वाहनों की आवाजाही और तकनीकी देखरेख की जरूरत

पुल को बने हुए साठ साल से ऊपर का वक्त बीत चुका है और इस समयावधि में यहां से गुजरने वाले ट्रैफिक की प्रकृति में भी भारी बदलाव आया है। शुरुआती दौर में जहां इस मार्ग पर यातायात का दबाव सीमित हुआ करता था, वहीं अब इस पर यात्री बसों, भारी ट्रकों, सामान ढोने वाले वाहनों और तमाम निजी गाड़ियों का तांता लगा रहता है। इस प्रकार लगातार बढ़ रहे भारी वाहनों के दबाव ने पुराने ढांचे के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञों का इस संदर्भ में मानना है कि ऐसे ऐतिहासिक और लंबे समय से उपयोग हो रहे पुलों की समय-समय पर तकनीकी जांच और आवश्यकतानुसार मरम्मत होना अनिवार्य है, जिससे इनकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

इतिहास के पन्नों में दर्ज अन्य पुराने पुल

गोमती नदी पर वर्तमान में खड़े इस मोटर पुल के अस्तित्व में आने से पहले यहां एक और प्राचीन और ऐतिहासिक पुल हुआ करता था, जो समय के पहिए के साथ जर्जर स्थिति में पहुंच गया था। इसके बाद 1970 के दशक के दौरान उस पुराने ढांचे को पूरी तरह हटा दिया गया और वर्तमान मोटर पुल ने यातायात व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभाल ली। इसके अतिरिक्त, बागेश्वर में साल 1913 के दौरान सरयू नदी पर बनाया गया एक पुराना झूला पुल भी यहां के ऐतिहासिक विरासतों में शुमार है। यह झूला पुल एक सदी से अधिक का समय पार कर चुका है और शहर की पुरानी सांस्कृतिक पहचान का एक अहम हिस्सा माना जाता है।

विकास की कहानी और भविष्य की सुरक्षा

गोमती मोटर पुल और सरयू नदी का पुराना झूला पुल दोनों ही बागेश्वर के अलग-अलग ऐतिहासिक दौर के विकास और परिवहन व्यवस्था की गाथा कहते हैं। जहां एक ढांचा छह दशकों से अधिक समय से लोगों की आवाजाही का निर्बाध हिस्सा बना हुआ है, वहीं दूसरा पुल एक सौ साल से ज्यादा पुराना गवाह है। आज भी गोमती मोटर पुल बागेश्वर के सुगम व्यापार और सुरक्षित यातायात के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हो रहा है। यदि ऐसे पुराने और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण पुलों की निरंतर देखरेख और समयबद्ध जांच होती रहे, तो आधुनिक समय के बढ़ते ट्रैफिक के बीच भी इनकी सुरक्षा और मजबूती लंबे समय तक बरकरार रखी जा सकती है।

सवाल-जवाब

गोमती मोटर पुल कहां स्थित है?
गोमती मोटर पुल उत्तराखंड के बागेश्वर शहर में गोमती नदी पर स्थित है।
गोमती मोटर पुल कितना पुराना है?
यह पुल लगभग 60 से 64 साल पुराना है और इसका निर्माण 1960 के दशक में हुआ था।
इस पुल के निर्माण के पीछे मुख्य वजह क्या थी?
साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में सड़क संपर्क मजबूत करने की जरूरत के तहत इसका निर्माण किया गया था।
यह पुल किस राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है?
गोमती मोटर पुल राष्ट्रीय राजमार्ग 309A पर यातायात की एक अहम कड़ी है।
बागेश्वर में सरयू नदी पर बना झूला पुल कब का है?
बागेश्वर में सरयू नदी पर बना पुराना झूला पुल साल 1913 में तैयार किया गया था।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·39 दिन पहले

1962 की जंग के बाद बने इस पुल ने आज तक इतना ट्रैफिक झेल लिया, यह वाकई गज़ब है। आजकल तो नए पुल पाँच साल भी न टिकें।

Arjun Mehta@arjun-mehta·39 दिन पहले

साठ साल पहले की इंजीनियरिंग आज के सरकारी ठेकों पर भारी पड़ रही है। तब शायद ईमानदारी से काम होता होगा, तभी आज भी इतने भारी ट्रैफिक को झेल रहा है यह पुल।

Ravikash Gupta@ravikash·39 दिन पहले

अर्जुन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। मैं खुद दो साल पहले बागेश्वर गया था और उस पुराने पुल पर जाम के बीच खड़ा होकर सोच रहा था कि तब की इंजीनियरिंग वाकई दमदार थी।

Rohan Verma@rohan-verma·39 दिन पहले

संजय शाह जगाती ने सही याद दिलाया कि 1962 की जंग के बाद पहाड़ों में सड़कें और पुल कितने जरूरी हो गए थे। आज भी वो पुराने पुल ही असली जान बचाए हुए हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

रोहन भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। मैं पिछली बार बागेश्वर गया था तो खुद देखा था कि इस पुराने पुल पर कितना ट्रैफिक रहता है, तब भी यह एकदम मजबूत खड़ा था।

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