कांगड़ा में भाजपा नेता राकेश चौहान का दिल का दौरा पड़ने से निधन, हिमाचल के राजनीतिक गलियारों में शोककार्तिक माह में रमा एकादशी 5 नवंबर को, जानिए सम्पूर्ण पूजन विधान और पारण मुहूर्तउत्तर प्रदेश के आठ शहरों में सत्रह रियल एस्टेट योजनाओं को हरी झंडी, 4844 करोड़ रुपये से बनेंगे 5726 मकान और दुकानेंब्रह्मपुरा में महिला से झपटी गई सोने की चेन का मामला सुलझा, तीन धरे गए और पिघलाया सोना बरामदसोलन के धर्मपुर में पीएनबी एटीएम तोड़ने वाला राजस्थान से पकड़ा गया, साथी की तलाश जारीझुमरी तिलैया के दो स्कूली साथियों ने किताबों के कारोबार से बनाई पहचान, 30 की उम्र में पार किया 50 लाख का आंकड़ाचीन के केंद्रीय बैंक ने डॉलर के मुकाबले युआन की दैनिक संदर्भ दर 6.7180 तय कीनई दिल्ली में इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग शुरू, राजनाथ सिंह देंगे विशेष स्मृति संबोधनअक्टूबर में चीन का सर्विसेज पीएमआई घटकर 50.8 पर आया, सुस्त आंकड़ों के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बढ़तअसम में पुलिस हिरासत से भागने के प्रयास के दौरान गोलीबारी में होटल हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त घनकांत गोगोई ढेर
उत्तराखंड के बागेश्वर में महिला उद्यमियों के हुनर की महक, नुमाइशखेत में पारंपरिक उत्पादों और सांस्कृतिक रंगों का संगमउत्तराखंड
4 नव॰ 2026, 8:44 am (9 मिनट पहले)· 0

उत्तराखंड के बागेश्वर में महिला उद्यमियों के हुनर की महक, नुमाइशखेत में पारंपरिक उत्पादों और सांस्कृतिक रंगों का संगम

बागेश्वर के नुमाइशखेत में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तीन दिवसीय सरस मेले की शुरुआत हुई, जहां 35 स्टॉलों के जरिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सीधा बाजार मिल रहा है।

पहाड़ी अंचल की आत्मनिर्भर महिलाओं के हुनर और उत्तराखंड की समृद्ध लोक विरासत का शानदार संगम बागेश्वर में देखने को मिल रहा है। शहर के ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान में तीन दिवसीय सरस मेले का विधिवत आगाज़ हो चुका है, जो पांच नवंबर तक चलेगा। इस विशेष आयोजन की कमान ग्रामीण विकास विभाग ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संभाली है। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा के साथ बागेश्वर विधायक पार्वती दास तथा कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर आयोजन की शुरुआत की। मेले का मुख्य केंद्र बिंदु स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी वे ग्रामीण महिलाएं हैं, जो अपने हाथों से तैयार विशिष्ट उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा रही हैं।

नुमाइशखेत में सजी 35 दुकानें, पहाड़ी खानपान की भारी मांग

इस ग्रामीण हाट में कुल 35 दुकानें सजाई गई हैं, जिनमें सरकारी विभागों और महिला समूहों का साझा प्रयास दिखाई दे रहा है। स्टॉल संचालक चांदनी कोरंगा के अनुसार, इन 35 स्टॉलों पर कृषि, उद्यान तथा उद्योग विभाग के समन्वय से तैयार उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। मेलार्थियों की चहल-पहल से पूरा मैदान गुलजार है और लोग शुद्ध पहाड़ी अनाजों, मसालों और पारंपरिक हस्तशिल्प की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। बिचौलियों की गैरमौजूदगी के कारण महिला कारीगरों को अपनी मेहनत का पूरा दाम सीधा मिल रहा है, जिससे उनके चेहरे खिले हुए हैं।

ये भी पढ़ें

स्टॉल संचालक सोनू धामी ने बताया कि मेले में आने वाले खरीदारों के बीच स्थानीय पहाड़ी खानपान, जैविक फल, ताजी सब्जियां और हाथ से बुने परिधान आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के मंचों का सीधा मकसद पर्वतीय उत्पादों को एक संगठित बाजार देना और गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। लोग पहाड़ी दालों, मोटे अनाजों और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने के साथ-साथ घर के लिए भी इन वस्तुओं को खरीद रहे हैं।

लोकगीतों की गूंज, ऐपण और पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं की धूम

मेला केवल व्यापार तक सीमित न रहकर उत्तराखंड की जीवंत संस्कृति का उत्सव बन गया है। स्वयं सहायता समूह की सदस्य दीपा नगरकोटी ने बताया कि खरीदारी के साथ-साथ रंगारंग सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन हो रहा है। मंच पर गूंजते लोकगीत और थिरकते लोकनृत्य दर्शकों को अपनी जड़ों से जोड़ रहे हैं। इसके साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए पारंपरिक ऐपण कला, मेहंदी प्रतियोगिता और कई देशी खेल गतिविधियां भी आयोजित की गई हैं। इन आयोजनों के माध्यम से मेले में पहुंचे पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को कुमाऊं की सदियों पुरानी रीति-रिवाजों और कला को नजदीक से समझने का अवसर मिल रहा है।

बायर-सेलर मीट और लखपति दीदी पहल को रफ्तार

स्थानीय उत्पादों को जिले से बाहर बड़ा बाजार दिलाने के लिए मेले में विशेष क्रेता-विक्रेता बैठक यानी बायर-सेलर मीट आयोजित की गई है। समूह की सदस्य रीता जोशी ने कहा,

"इसके माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं सीधे खरीदारों और व्यापारियों से जुड़ रही हैं।"
इस पहल से महिलाओं को थोक खरीदारों से दीर्घकालिक आर्डर मिलने की राह खुली है। बड़े कारोबारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित होने से महिला समूहों को पैकेजिंग, गुणवत्ता और बाजार की नई मांगों के अनुसार उत्पाद ढालने में भी मदद मिल रही है।

प्रशासनिक स्तर पर इस पहल को महिला सशक्तिकरण की रीढ़ माना जा रहा है। जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने बताया कि आयोजन की मूल भावना ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार देकर वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्पादों को उचित मंच मिलने से महिलाओं की मासिक आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और सरकार के महत्वाकांक्षी लखपति दीदी मिशन को धरातल पर गति मिलेगी। समूह की सदस्य शालिनी ने साझा किया कि इस आयोजन से ग्रामीण कारीगरों को अपने ब्रांड की पहचान बनाने और व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचने का दुर्लभ अवसर मिला है।

सवाल-जवाब

बागेश्वर में सरस मेला कब से कब तक आयोजित किया जा रहा है?
यह मेला नुमाइशखेत मैदान में 3 नवंबर से शुरू हुआ है और 5 नवंबर तक चलेगा।
मेले का उद्घाटन किन प्रमुख हस्तियों ने किया?
मेले का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, बागेश्वर विधायक पार्वती दास और कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने संयुक्त रूप से किया।
सरस मेले में कुल कितने स्टॉल लगाए गए हैं?
मेले में कुल 35 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें स्वयं सहायता समूहों और सरकारी विभागों के उत्पाद शामिल हैं।
मेले में खरीदारी के अलावा कौन से सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं?
मेले में लोकगीत, लोकनृत्य, ऐपण प्रतियोगिता, मेहंदी प्रतियोगिता और पारंपरिक खेल गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
मेले में आयोजित बायर-सेलर मीट का क्या फायदा है?
बायर-सेलर मीट के जरिए महिला स्वयं सहायता समूह सीधे बड़े व्यापारियों से जुड़ रहे हैं, जिससे उन्हें थोक बाजार और नए खरीदार मिल रहे हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार इस मेले का मुख्य लक्ष्य क्या है?
जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे के अनुसार, मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी आमदनी बढ़ाना और लखपति दीदी योजना को गति देना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp