खेती की लागत घटाने और बुवाई के काम को सुगम बनाने के लिए बहराइच जिले में छोटे और सीमांत किसानों के बीच हाथ से चलने वाली आधुनिक सीडर मशीन काफी लोकप्रिय हो रही है। परंपरागत तौर पर हाथों से बीज छिटककर बुवाई करने पर बीज की बर्बादी अधिक होती थी और काम में समय भी काफी लगता था। अकोला, महाराष्ट्र की कृषि उपकरण निर्माता कंपनी एग्रोश्योर प्रोडक्ट्स एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि ध्रुव राज गुप्ता के अनुसार, इस साधारण लेकिन प्रभावी यंत्र की मदद से किसानों की श्रम लागत में बड़ी कटौती दर्ज की जा रही है। इसके इस्तेमाल से बीज की खपत नियंत्रित होती है और फसलों की कतारबद्ध बुवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
बीज की बचत और पैदावार में ठोस इजाफा
पारंपरिक छिटकाव तकनीक की तुलना में यह मैनुअल सीडर लगभग 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक बीज की बचत कराता है। फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मक्के की बुवाई में लगभग 10 प्रतिशत और गेहूं में 50 प्रतिशत तक बीज बच जाता है। बीज जमीन में उचित गहराई और एकसमान फासले पर पड़ते हैं, जिससे पौधों का फैलाव बेहतर होता है। इसी सटीक रोपाई का परिणाम है कि किसानों को प्रति बीघा करीब 1 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही खेतों में कम नमी होने पर भी बीज के 100 प्रतिशत अंकुरण की अनुकूल स्थिति बनती है, क्योंकि मशीन के पीछे लगा रोलर बीज गिरते ही मिट्टी को बराबर दबाता चलता है।
तकनीकी खूबियां और इस्तेमाल में आसानी
इस यंत्र में पौधों के बीच की दूरी को जरूरत के अनुसार 4 इंच से लेकर 12 इंच तक तय करने की सुविधा मौजूद है। कतार से कतार के बीच सही दूरी बनाए रखने के लिए उपकरण में एक खास मार्किंग सिस्टम भी जोड़ा गया है। यह सीडर बीज को जमीन के भीतर 2 से 2.5 इंच की सटीक गहराई पर बोता है, जिससे चिड़ियों या तेज हवा से नुकसान का डर नहीं रहता। वजन में हल्की और चलाने में बेहद आसान होने की वजह से इसे पुरुष अथवा महिला किसान ही नहीं, बल्कि 10 से 15 वर्ष के बच्चे भी बिना किसी परेशानी के संचालित कर सकते हैं।
मजदूरी में भारी कमी और रियायती दरों पर उपलब्धता
खुरपी और दिहाड़ी मजदूरों के भरोसे 15 बीघे खेत में मक्के की बुवाई कराने पर प्रति बीघा ₹300 के हिसाब से करीब ₹4,500 से ₹5,000 की मजदूरी चुकानी पड़ती थी। इसके विपरीत, इस सीडर मशीन की मदद से अकेला व्यक्ति पूरे दिन में 15 बीघे तक बुवाई का काम निपटा सकता है, जिससे मजदूरी का खर्च लगभग शून्य हो जाता है। खुले बाजार में इस यंत्र का मूल्य तकरीबन ₹6,000 है, लेकिन सब्सिडी और अलग-अलग निर्माताओं की छूट के बाद यह ₹4,800 तक उपलब्ध हो जाता है। बहराइच में उद्यमी महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) इस उपकरण की अधिकृत विक्रेता है, जो किसानों को 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की विशेष छूट पर यह मशीन मुहैया करा रही है।



















