अश्लेशा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश: अगले 49 दिनों तक मेष, मिथुन समेत इन 7 राशियों की चमकेगी किस्मतफरीदाबाद में मिट्टी की गणेश मूर्तियां पानी में मिनटों में घुलती हैं और 70 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैंटाटा संस की अर्जी रिजर्व बैंक ने की खारिज, अब शेयर बाजार में दस्तक देने के अलावा नहीं बचा कोई रास्ताराजस्थान में डिजिटल स्क्रीन और उम्मीदों के भारी दबाव से घट रही बच्चों की एकाग्रता, मानसिक तनाव पर विशेषज्ञों की रायदेवघर में धान की बंपर पैदावार के लिए रोपाई के 20 से 25 दिनों बाद क्यों जरूरी है सही खाद का इस्तेमालदेहरादून में बैंक कर्मचारी पर 5 लाख की सुपारी देकर गोली चलवाने वाली पूर्व प्रेमिका और शूटर गिरफ्तारकिचन के चिपचिपे पंखे को नए जैसा चमकाने के लिए अपनाएं ये तीन बेहद आसान घरेलू नुस्खेगणेशोत्सव पर पाना है पारंपरिक और शाही लुक, तो आजमाएं पैठणी साड़ी के ये 5 बेहद खूबसूरत डिजाइनबीकानेर में करीब 1 करोड़ रुपये की व्हेल की उल्टी जब्त, महाराष्ट्र से आए तीन तस्करों पर कसा शिकंजाभारत मंडपम में वैश्विक नेताओं के सामने पेश हुई भारतीय विरासत, पीएम नरेंद्र मोदी ने दिखाई रामेश्वरम के रामनाथस्वामी मंदिर की भव्य झलक
बलिया में गंगा का कहर: शहर के कई मोहल्ले पानी में डूबे, छतों पर जीवन गुजारने को मजबूर लोगउत्तर प्रदेश
23 अग॰ 2026, 9:38 am (21 दिन पहले)· 2

बलिया में गंगा का कहर: शहर के कई मोहल्ले पानी में डूबे, छतों पर जीवन गुजारने को मजबूर लोग

बलिया शहर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। लोग अपने घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं और जिला प्रशासन के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गंगा नदी का पानी अब केवल खेतों या ग्रामीण तटवर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने शहर की घनी बस्तियों में भी अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। खतरे के निशान को पार कर चुकी गंगा का पानी अब रिहायशी मकानों के अंदर तक पहुंच चुका है। कई मोहल्लों में स्थिति यह है कि मकानों का पूरा निचला हिस्सा पानी में पूरी तरह डूब चुका है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों ने अपना जरूरी सामान समेट लिया है और अब छतों को ही अपना नया आशियाना बना लिया है।

सड़कों पर पानी और आवाजाही में भारी परेशानी

नदी का जलस्तर बढ़ने से इलाके के सभी आने-जाने वाले रास्ते जलमग्न हो चुके हैं। जरूरी काम या रोजमर्रा की चीजों को लाने के लिए भी लोगों को घुटने से लेकर कमर तक भरे गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा गंभीर समस्या स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के सामने आ रही है, जिन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर इसी जलभराव के बीच से आवागमन करना पड़ रहा है। इसके अलावा बाढ़ के पानी के साथ फैली भारी गंदगी और जहरीले जीव-जंतुओं के लगातार सामने आने से लोगों का डर और ज्यादा बढ़ गया है, जिससे स्थानीय परिवारों में हर वक्त दहशत का माहौल बना हुआ है.

ये भी पढ़ें

प्रशासन के दावों की खुली पोल

स्थानीय निवासी धनंजय चौहान ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में सरकार और अधिकारियों को आगे आकर लोगों का दर्द कम करना चाहिए, क्योंकि अब मदद करने का असली वक्त आ गया है। उन्होंने बताया कि इलाके में बमुश्किल एक नाव नजर आ रही है, जो शायद चलने की स्थिति में भी नहीं है, और लोग मजबूरन पैदल ही पानी पार करने को विवश हैं। चारों तरफ फैली गंदगी के बीच अगर किसी का पैर फिसल जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। एक अन्य स्थानीय निवासी पंकज कुमार प्रजापति ने कहा कि घरों के निचले हिस्से के डूब जाने से जो भावनात्मक तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे जिला प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोल रही हैं। पानी लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे जरूरी सामान जुटाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है.

बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का संकट

धर्मेंद्र कुमार ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि बाढ़ के पानी से स्कूली बच्चों की ड्रेस भीग जाती है और हमेशा बहने या डूबने का खतरा बना रहता है। साथ ही जहरीले जीव-जंतुओं का डर लोगों को मानसिक रूप से सहमा रहा है, जिन्हें अक्सर पानी के पास देखा जाता है। आपदा के इस समय में समाजसेवियों और स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई ठोस मदद नहीं मिल पा रही है, जिससे लोग खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं। धरातल पर प्रशासन के दावे पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं और जनता हर रोज नई मुसीबतों का सामना कर रही है.

सवाल-जवाब

बलिया में बाढ़ के हालात क्यों पैदा हुए हैं?
गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिसके कारण पानी शहर की बस्तियों और रिहायशी इलाकों के अंदर तक घुस गया है।
स्थानीय लोगों को किन प्रमुख समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
घरों के निचले हिस्से पूरी तरह डूब चुके हैं, रास्ते पानी में विलीन हो गए हैं और लोगों को घुटने से कमर तक पानी में चलकर जरूरी काम करने पड़ रहे हैं।
स्कूली बच्चों और बुजुर्गों पर इस आपदा का क्या असर है?
बच्चों के स्कूल के कपड़े भीग जाते हैं और उन्हें बहने या डूबने के खतरे के बीच आना-जाना पड़ता है, जबकि जहरीले जीव-जंतुओं का डर भी लगातार बना हुआ है।
प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों की क्या शिकायत है?
निवासियों का आरोप है कि जिला प्रशासन के दावे धरातल पर पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं और संकट के इस समय में कोई पर्याप्त मदद या नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

बलिया में शहरी बाढ़ का यह संकट केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नगर नियोजन और प्रशासनिक सुस्ती का गंभीर परिणाम है। यदि समय रहते तटबंधों की मजबूती और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो यह स्थिति महामारी को न्योता देगी और जिला प्रशासन की आपदा प्रबंधन क्षमता पर बड़े सवाल खड़े करेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·20 दिन पहले

बलिया में गंगा के उफान से उत्पन्न यह संकट केवल मानवीय पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और आपूर्ति श्रृंखला को भी बुरी तरह बाधित कर रहा है। शहरी बस्तियों में पानी भरने से रोजमर्रा का कारोबार ठप हो गया है, जिससे छोटे दुकानदारों और दिहाड़ी कामगारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। यदि जलभराव की इस स्थिति से शीघ्र नहीं निपटा गया, तो यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा और इससे उबरने में महीनों लग सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

बलिया में गंगा के विकराल रूप और शहरी बस्तियों में पानी घुसने से कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिला प्रशासन के दावों और धरातल पर नाकाफी राहत उपायों के बीच, जहरीले जीवों के खतरे और आवागमन ठप होने से किसी भी अनहोनी की आशंका बढ़ गई है। यदि समय रहते प्रभावी आपदा प्रबंधन और बचाव दल तैनात नहीं किए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

बलिया की शहरी बस्तियों में बाढ़ का यह संकट केवल जलभराव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला प्रशासन की आपदा प्रबंधन तैयारियों की बड़ी पोल खोलता है। निचले इलाकों में पानी घुसने और आवागमन ठप होने से अब स्वास्थ्य और स्वच्छता का गंभीर संकट पैदा हो गया है। यदि समय रहते बोट्स की तैनाती, राहत सामग्री का वितरण और फॉगिंग जैसे कदम नहीं उठाए गए, तो महामारी फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR