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बालोद में बनारसी टिकिया चाट का जलवा, ₹35 की प्लेट के लिए उमड़ रहे खाने के शौकीनछत्तीसगढ़
19 सित॰ 2026, 2:30 pm (6 दिन पहले)· 0

बालोद में बनारसी टिकिया चाट का जलवा, ₹35 की प्लेट के लिए उमड़ रहे खाने के शौकीन

छत्तीसगढ़ के बालोद में बनारस से आए कारीगर प्रेमचंद की टिकिया चाट काफी लोकप्रिय हो रही है, जहां दोपहर से रात तक ₹35 की भरपूर प्लेट के लिए भीड़ जुटती है।

छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में स्ट्रीट फूड प्रेमियों के बीच इन दिनों पारंपरिक स्वाद की जबर्दस्त मांग देखी जा रही है। शहर के घड़ी चौक पर स्थित बीकानेर स्वीट्स में परोसी जाने वाली खास टिकिया चाट स्थानीय लोगों की जुबान पर चढ़ चुकी है। बेहतरीन स्वाद, शुद्ध सामग्री और पेट भर देने वाली मात्रा के चलते यह चाट रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहकों को अपनी ओर खींच रही है। सिर्फ 35 रुपए प्रति प्लेट की बेहद किफायती कीमत होने के कारण यहां हर दिन करीब 150 प्लेट टिकिया चाट आसानी से बिक जाती है। दोपहर 1 बजे से लेकर रात 8 बजे तक इस प्रतिष्ठान के बाहर चाट चखने वालों का तांता लगा रहता है।

बनारस से बालोद तक स्वाद का सफर

इस लोकप्रिय चाट को तैयार करने वाले कारीगर प्रेमचंद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बनारस के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि बनारसी चाट की अपनी एक अलग तासीर, खुशबू और पहचान होती है, जिसे वे पिछले कई वर्षों से लगातार बालोद के बाशिंदों तक पहुंचा रहे हैं। अपनी इसी अनूठी पहचान के कारण यह चाट शहर के आम नाश्ते से अलग हटकर अपनी मजबूत जगह बना चुकी है। दोपहर ढलते ही शाम तक दुकान के आसपास युवाओं और परिवारों की चहल-पहल साफ देखी जा सकती है।

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आलू, बेसन और चना दाल का अनोखा मेल

प्रेमचंद के अनुसार इस खास टिकिया को तैयार करने में मुख्य घटक के रूप में आलू, बेसन और चना दाल का उपयोग किया जाता है। इन मुख्य चीजों के साथ जीरा, नमक और अन्य जरूरी मसालों का संतुलित मिश्रण तैयार कर टिकिया बनाई जाती है। गर्म टिकिया पर स्वादिष्ट चटनी और मसाले डालकर जब ग्राहकों को परोसा जाता है, तो इसका लाजवाब स्वाद लोगों को खूब भाता है। चाट की सबसे बड़ी खासियत इसका पारंपरिक स्वाद और मात्रा का भरपूर होना है, जिससे एक बार आने वाला ग्राहक बार-बार यहां खिंचा चला आता है।

18 वर्षों का अनुभव और लगन की कहानी

प्रेमचंद इस पेशे में पिछले 18 वर्षों से सक्रिय हैं और लगातार अपने हुनर को निखार रहे हैं। उन्होंने यह कारीगरी अपने गांव बनारस में ही सीखी थी, जहां वे शुरुआती दिनों में चाट की एक सामान्य दुकान पर हेल्पर के तौर पर काम किया करते थे। वहीं काम करते हुए उन्होंने चाट के मसालों के संतुलन और टिकिया की हर बारीकी को गहराई से सीखा। आगे चलकर इसी हुनर को उन्होंने अपनी आजीविका का मुख्य साधन बना लिया। बनारस की गलियों से सीखा गया यही अनुभव आज बालोद में एक सफल स्ट्रीट फूड पहचान बन चुका है।

सवाल-जवाब

बालोद में यह बनारसी चाट कहां मिलती है?
यह चाट छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में घड़ी चौक स्थित बीकानेर स्वीट्स पर उपलब्ध है।
एक प्लेट टिकिया चाट की कीमत कितनी है?
टिकिया चाट की एक प्लेट की कीमत 35 रुपए है।
दुकान पर चाट मिलने का समय क्या है?
दुकान पर चाट दोपहर 1 बजे से लेकर रात 8 बजे तक मिलती है।
टिकिया चाट बनाने में किन मुख्य सामग्रियों का इस्तेमाल होता है?
इसे बनाने में मुख्य रूप से आलू, बेसन, चना दाल, जीरा, नमक और जरूरी मसालों का उपयोग किया जाता है।
चाट बनाने वाले कारीगर कौन हैं और उनका अनुभव कितना है?
चाट बनाने वाले कारीगर बनारस निवासी प्रेमचंद हैं, जिन्हें चाट बनाने का 18 वर्षों का अनुभव है।
दुकान पर रोजाना कितनी प्लेट चाट बिक जाती है?
दुकान पर रोजाना लगभग 150 प्लेट टिकिया चाट की बिक्री होती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·5 दिन पहले

यह खबर दर्शाती है कि कैसे छोटे शहरों में भी पारंपरिक खान-पान और कुशल कारीगरी की बदौलत मजबूत स्थानीय आर्थिकी और उपभोक्ता जुड़ाव पैदा हो सकता है। महज पैंतीस रुपए प्रति प्लेट की किफायती कीमत और अठारह साल के लंबे तजुर्बे के बल पर यह स्ट्रीट फूड मॉडल यह साबित करता है कि गुणवत्ता और स्थिरता छोटे व्यवसायों को टिकाऊ सफलता दिला सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह खबर दर्शाती है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों की स्थानीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म उद्यमों और अनौपचारिक क्षेत्र की क्या भूमिका है। मात्र 35 रुपये की कीमत और 150 प्लेट की दैनिक बिक्री यह साबित करती है कि पारंपरिक कौशल और किफायती मूल्य मॉडल के मेल से छोटे शहरों में भी स्थिर आजीविका और मजबूत उपभोक्ता मांग पैदा की जा सकती है, जो जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन का एक बेहतरीन उदाहरण है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह आर्थिक समावेश और सूक्ष्म उद्यमिता का स्पष्ट उदाहरण है, जहां बिना बड़े पूंजी निवेश के पारंपरिक कौशल स्थानीय स्तर पर ही आजीविका और उपभोग चक्र को गति दे रहा है। ऐसे मॉडल छोटे शहरों में क्रय शक्ति को बनाए रखने और आंतरिक बाजार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और पारंपरिक खाद्य कला प्रवासन के जरिए देश के अन्य हिस्सों में अपनी मजबूत आर्थिक और सामाजिक पहचान बना रही है। बनारस के एक साधारण कारीगर का छत्तीसगढ़ के बालोद में 18 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद ₹35 की किफायती कीमत पर प्रतिदिन 150 प्लेट चाट बेचना, छोटे पैमाने के उद्यमों की आजीविका और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक अनूठा उदाहरण है। यह प्रवृत्ति ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट फूड अर्थव्यवस्था की बढ़ती लोकप्रियता को रेखांकित करती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

एक क्राइम और समाज-व्यवस्था के विश्लेषक के रूप में, यह घटना दर्शाती है कि कैसे अर्ध-शहरी और ग्रामीण बाजारों में छोटे स्ट्रीट फूड वेंडर स्थानीय अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक आजीविका को मजबूत कर रहे हैं। बिना किसी बड़े औपचारिक वित्तपोषण के, केवल 18 वर्षों के व्यक्तिगत कौशल और निरंतरता के बल पर इस तरह के रोजगार खड़े होते हैं। यह माइग्रेशन और लोकल कॉमर्स का एक सकारात्मक पहलू है, जो सुरक्षा, स्थिरता और आजीविका के स्व-निर्मित अवसरों को उजागर करता है।

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